
भारत की मेजबानी में आयोजित होने वाले 18वें ब्रिक्स (BRICS) शिखर सम्मेलन की गूंज इस समय पूरी दुनिया में सुनाई दे रही है। वैश्विक राजनीति और अर्थव्यवस्था में एक नए शक्ति-समीकरण की नींव रखने जा रहे इस सम्मेलन ने पश्चिमी ताकतों और वाशिंगटन की रातों की नींद उड़ा दी है। वैश्विक मंच पर यह सवाल तेजी से उठने लगा है कि क्या नई दिल्ली से तय होने वाला यह सम्मेलन अमेरिकी डॉलर के दशकों पुराने वर्चस्व को समाप्त कर देगा। इस पूरे सम्मेलन का सबसे बड़ा आकर्षण रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन का भारत आगमन है, जो ब्रिक्स समिट से ठीक पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ एक बेहद अहम और रणनीतिक द्विपक्षीय बैठक करने जा रहे हैं।
11 सितंबर को मोदी-पुतिन की ‘सीक्रेट’ रणनीतिक वार्ता क्रेमलिन के आधिकारिक बयान के अनुसार, रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन 12 और 13 सितंबर को आयोजित होने वाले 18वें ब्रिक्स सम्मेलन में भाग लेने नई दिल्ली पहुंच रहे हैं। लेकिन इससे ठीक एक दिन पहले यानी 11 सितंबर को पीएम नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति पुतिन के बीच एक अत्यंत निजी और रणनीतिक बैठक होगी। क्रेमलिन प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव ने इस मुलाक़ात को बेहद खास बताते हुए कहा कि दोनों नेताओं के बीच असाधारण और ईमानदार संबंध हैं। दोनों राष्ट्रध्यक्ष वैश्विक एजेंडे के सबसे संवेदनशील मुद्दों, रक्षा समझौतों, रूस-यूक्रेन युद्ध और मध्य पूर्व के हालिया तनाव पर बिना किसी हिचकिचाहट के सीधी चर्चा करेंगे।
डॉलर का वर्चस्व खत्म? 96% व्यापार रुपये और रूबल में अमेरिका और पश्चिमी देशों की सबसे बड़ी चिंता व्यापार में डॉलर का घटता दबदबा है। आंकड़ों के मुताबिक, भारत और रूस के बीच होने वाला कुल व्यापार का 96 प्रतिशत हिस्सा अब डॉलर के बजाय सीधे रुपये और रूबल में संपन्न हो रहा है। इसके अलावा, जुलाई 2026 तक भारत के कुल कच्चे तेल आयात का 50.83% हिस्सा अकेले रूस से आया है, जिससे दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार 70 अरब डॉलर के रिकॉर्ड स्तर को पार कर गया है। क्रेमलिन का दावा है कि ब्रिक्स देशों के बीच अब 90 फीसदी व्यापार राष्ट्रीय मुद्राओं में हो रहा है, जो भविष्य में एक नए क्रॉस-बॉर्डर पेमेंट सिस्टम का मार्ग प्रशस्त करेगा।
ब्रिक्स का महा-विस्तार और ग्लोबल जीडीपी में 40% हिस्सेदारी यह ब्रिक्स सम्मेलन केवल कुछ देशों का जमावड़ा नहीं है, बल्कि दुनिया की 49.5% आबादी और लगभग 40% ग्लोबल जीडीपी का प्रतिनिधित्व करने वाला सबसे शक्तिशाली ब्लॉक बन चुका है। वर्ष 2024 में शुरू की गई ‘पार्टनर कंट्री’ श्रेणी के तहत बेलारूस, वियतनाम, कजाकिस्तान, क्यूबा, नाइजीरिया, मलेशिया, थाईलैंड और उज्बेकिस्तान जैसे देशों को ब्रिक्स के विभिन्न प्रारूपों में शामिल किया जा रहा है। भारत में हो रही इस बैठक में ब्रिक्स के और अधिक विस्तार तथा नए साझेदार देशों को औपचारिक मंच देने पर अंतिम मुहर लग सकती है।
रक्षा और परमाणु क्षेत्र में गेमचेंजर डील की तैयारी अमेरिकी प्रतिबंधों की परवाह किए बिना भारत और रूस अपने रक्षा व परमाणु ऊर्जा सहयोग को एक नए स्तर पर ले जाने की तैयारी में हैं। माना जा रहा है कि इस द्विपक्षीय वार्ता के दौरान दोनों देश सैन्य और रक्षा क्षेत्र में कई बड़े और ऐतिहासिक करारों पर हस्ताक्षर कर सकते हैं। विशेषज्ञ मानते हैं कि भारत और रूस का यह गहरा सैन्य सहयोग न केवल अमेरिका के प्रभुत्व को चुनौती दे रहा है, बल्कि ब्रिक्स के भीतर चीन के बढ़ते प्रभाव को संतुलित करने के लिहाज से भी रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण है।














