
Cabinet Meeting : भारतीय रेलवे के आधुनिकीकरण और क्षमता बढ़ाने की दिशा में केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में देश के सात हाई-डेंसिटी रेलवे कॉरिडोर को फोर-ट्रैक करने की योजना को आगे बढ़ाने का फैसला लिया गया। सरकार का दावा है कि इससे व्यस्त रेल मार्गों पर ट्रेनों की आवाजाही आसान होगी, यातायात का दबाव कम होगा और माल ढुलाई की क्षमता भी बढ़ेगी।
केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कैबिनेट के फैसलों की जानकारी देते हुए बताया कि रेलवे के सबसे व्यस्त रूटों पर बढ़ते यातायात को देखते हुए इन कॉरिडोर की क्षमता बढ़ाने की योजना बनाई गई है। करीब 4,000 किलोमीटर के हिस्से के लिए विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) तैयार की जा रही है।
गोल्डन क्वाड्रिलेटरल के प्रमुख रूट होंगे मजबूत
फोर-ट्रैकिंग योजना में देश के प्रमुख हाई-डेंसिटी रूट शामिल हैं। इसके तहत दिल्ली-मुंबई, मुंबई-चेन्नई, चेन्नई-कोलकाता और कोलकाता-दिल्ली मार्गों से बनने वाले गोल्डन क्वाड्रिलेटरल को कवर किया जाएगा।
इसके अलावा दिल्ली-चेन्नई और मुंबई-कोलकाता के डायगोनल रूट तथा दिल्ली-गुवाहाटी कॉरिडोर को भी योजना में शामिल किया गया है। इन रूटों पर अतिरिक्त ट्रैक बनने से यात्री और मालगाड़ियों की आवाजाही के लिए ज्यादा क्षमता उपलब्ध होगी।
10,783 करोड़ की तीन मल्टी-ट्रैकिंग परियोजनाओं को मंजूरी
कैबिनेट ने रेलवे की तीन मल्टी-ट्रैकिंग परियोजनाओं को भी मंजूरी दी है। इन परियोजनाओं पर करीब 10,783 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है। इनके पूरा होने के बाद रेलवे नेटवर्क में लगभग 656 किलोमीटर की अतिरिक्त रेल लाइनें जुड़ेंगी।
इन परियोजनाओं का उद्देश्य व्यस्त रेल मार्गों पर ट्रेनों की आवाजाही को बेहतर करना और परिचालन में होने वाली देरी को कम करना है। अतिरिक्त लाइनों के निर्माण से मौजूदा ट्रैक पर यातायात का दबाव भी कम होगा।
इन रूटों पर बिछाई जाएंगी नई रेल लाइनें
मंजूर परियोजनाओं के तहत खड़गपुर-झारसुगुड़ा और कटनी-पेंड्रा रोड सेक्शन के बीच चौथी लाइन का निर्माण किया जाएगा। इसके अलावा बिलासपुर (उसलापुर)-पेंड्रा रोड सेक्शन के बीच तीसरी लाइन बिछाई जाएगी।
नई लाइनों के निर्माण से इन व्यस्त रूटों पर ट्रेनों की आवाजाही को अलग-अलग ट्रैक पर संचालित करने में मदद मिलेगी। इससे यात्रियों के साथ-साथ माल परिवहन की क्षमता भी बढ़ने की उम्मीद है।
5 राज्यों के 14 जिलों और 4,790 गांवों को फायदा
सरकार के मुताबिक, इन परियोजनाओं का असर पश्चिम बंगाल, झारखंड, ओडिशा, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ के कुल 14 जिलों पर पड़ेगा। परियोजनाओं से करीब 4,790 गांवों की रेल कनेक्टिविटी बेहतर होने की बात कही गई है।
इससे लगभग 56 लाख लोगों को सीधे तौर पर लाभ मिलने का अनुमान है। बेहतर रेल संपर्क से इन क्षेत्रों के लोगों के लिए प्रमुख शहरों के साथ धार्मिक और पर्यटन स्थलों तक पहुंच आसान हो सकेगी।
PM गति शक्ति योजना से जुड़े हैं प्रोजेक्ट
इन परियोजनाओं को PM गति शक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान के तहत तैयार किया गया है। इसका उद्देश्य देश में मल्टी-मॉडल कनेक्टिविटी और लॉजिस्टिक्स क्षमता को मजबूत करना है।
रेल नेटवर्क के विस्तार से तारातारिणी मंदिर, श्री क्षेत्र जगन्नाथ मंदिर, बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व, अमरकंटक मंदिर, ज्वालेश्वर धाम और रतनपुर महामाया मंदिर जैसे धार्मिक और पर्यटन स्थलों की कनेक्टिविटी को भी मजबूती मिलने की उम्मीद है।
कोयला, सीमेंट और स्टील की ढुलाई होगी आसान
परियोजनाओं के पूरा होने के बाद कोयला, सीमेंट, लोहा और इस्पात जैसी जरूरी वस्तुओं की ढुलाई के लिए रेलवे की क्षमता में करीब 2.7 करोड़ टन सालाना (27 MTPA) की अतिरिक्त बढ़ोतरी होने का अनुमान है।
सरकार के अनुसार, रेलवे सड़क और अन्य परिवहन माध्यमों की तुलना में ऊर्जा दक्ष एवं पर्यावरण के अनुकूल परिवहन साधन है। रेल परिवहन की क्षमता बढ़ने से सड़क मार्ग पर माल ढुलाई का दबाव भी कम किया जा सकता है।
सरकारी अनुमान के मुताबिक, इन परियोजनाओं से करीब 12 करोड़ लीटर तेल के आयात में कमी आ सकती है और लगभग 62 करोड़ किलोग्राम CO₂ उत्सर्जन कम होने का अनुमान है। सरकार ने इस पर्यावरणीय लाभ को करीब 2.48 करोड़ नए पेड़ लगाने के बराबर बताया है।
कुल मिलाकर, इन परियोजनाओं का फोकस रेलवे की क्षमता बढ़ाने, यात्री और माल परिवहन को अधिक सुचारू बनाने तथा देश के प्रमुख औद्योगिक, धार्मिक और पर्यटन क्षेत्रों की कनेक्टिविटी मजबूत करने पर है।














