मिडिल ईस्ट में महासंकट: सऊदी अरब की ‘लाइफलाइन’ पर सटीक ड्रोन अटैक, ठप हुई 50 लाख बैरल तेल की सप्लाई, दुनिया पर मंडराया मंदी का खतरा

मिडिल ईस्ट में जारी भीषण तनाव के बीच वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा पर अब तक का सबसे बड़ा संकट खड़ा हो गया है। फारस की खाड़ी में जारी संघर्ष के दौरान स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) के संभावित बंद होने के खतरे को देखते हुए सऊदी अरब ने जिस ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन को अपनी ‘लाइफलाइन’ और बैकअप प्लान के रूप में तैयार किया था, वह अब पूरी तरह ठप हो चुकी है। लाल सागर के यानबू बंदरगाह तक कच्चा तेल पहुंचाने वाली इस अरबों डॉलर की पाइपलाइन पर हुए सटीक ड्रोन हमलों ने रियाद से लेकर वैश्विक तेल बाजारों तक हड़कंप मचा दिया है।

हमलावरों की खतरनाक रणनीति: पाइप नहीं, सीधे ‘पंपिंग स्टेशन’ को बनाया निशाना

10 और 11 सितंबर 2026 को इराक के मैसान प्रांत से उड़े घातक ड्रोनों ने रियाद और मदीना क्षेत्रों में स्थित महत्वपूर्ण पंप स्टेशनों को निशाना बनाया। हमलावरों ने पाइपलाइन की मुख्य पाइपों को नुकसान पहुंचाने के बजाय उसकी सबसे जटिल ‘पंपिंग मशीनरी’ पर हमला करने की रणनीति चुनी। अगर पाइप में छेद होता तो उसे कुछ ही दिनों में ठीक किया जा सकता था, लेकिन विशिष्ट और दुर्लभ मशीनरी से लैस इन पंपिंग स्टेशनों के तबाह होने से पूरा प्रवाह ही थम गया है। सऊदी ऊर्जा मंत्रालय ने एहतियात के तौर पर पूरी पाइपलाइन को बंद करने का आदेश दिया है, जिसकी मरम्मत में कम से कम 5 से 6 सप्ताह का समय लग सकता है।

ग्लोबल ऑयल मार्केट में हाहाकार, 100 डॉलर पार पहुंची कीमतें

इराक सीमा की ओर से आए इन ड्रोनों के हमले के बाद वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की आपूर्ति बुरी तरह लड़खड़ा गई है। इस पाइपलाइन की दैनिक क्षमता लगभग 70 लाख बैरल है, जिससे सामान्य दिनों में 40 से 50 लाख बैरल कच्चा तेल गुजरता था—जो पूरी दुनिया की कुल तेल आपूर्ति का करीब 4 से 5 प्रतिशत है। इस सप्लाई लाइन के रुकते ही अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल के पार चली गई हैं। यानबू बंदरगाह पर मौजूद सीमित तेल का स्टॉक भी अगले कुछ दिनों में खत्म होने की कगार पर है, जिससे सऊदी अरब की अतिरिक्त उत्पादन क्षमता पूरी तरह बेअसर साबित हो रही है।

तीन प्रमुख रास्तों पर एक साथ मंडराया खतरा, टूटने की कगार पर सप्लाई चेन

वर्तमान में मिडिल ईस्ट का पूरा ऊर्जा परिवहन त्रिकोणीय संकट से घिर चुका है:

  • स्ट्रेट ऑफ होर्मुज: ईरान युद्ध के चलते इस मुख्य समुद्री मार्ग से होने वाला 20 मिलियन बैरल का दैनिक आवागमन पहले ही बहुत कम हो चुका है।

  • बाब अल-मंदेब: लाल सागर के इस संकरे रास्ते पर हूती विद्रोहियों के बढ़ते दबदबे के कारण करोड़ों बैरल तेल का सुरक्षित निकलना मुश्किल हो गया है।

  • ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन: ड्रोन हमलों के बाद यह अंतिम बैकअप रास्ता भी पूरी तरह बंद है।

इन तीनों प्रमुख मार्गों को मिलाकर प्रतिदिन लगभग 30 मिलियन (3 करोड़) बैरल तेल की आपूर्ति या तो पूरी तरह रुक गई है या गंभीर खतरे में है। वैश्विक अर्थव्यवस्था रोजाना करीब 100 मिलियन बैरल तेल की खपत करती है, ऐसे में एक-तिहाई आपूर्ति का बाधित होना इतिहास का सबसे बड़ा ऊर्जा संकट बन चुका है।

चौतरफा मंदी और महंगाई का अलर्ट

यद्यपि सऊदी अरब ने आधिकारिक रूप से इराक से आए ड्रोनों का उल्लेख किया है, लेकिन इस हमले की जिम्मेदारी किसी भी समूह ने नहीं ली है और ईरान ने इन आरोपों का खंडन किया है। इसके बावजूद, यह स्पष्ट हो चुका है कि आधुनिक ड्रोन तकनीक ने पारंपरिक बुनियादी ढांचे की सुरक्षा पर गहरा सवाल खड़ा कर दिया है। विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि यदि बाब अल-मंदेब मार्ग भी पूरी तरह ठप हो जाता है, तो दुनिया को भीषण महंगाई, ईंधन की भारी किल्लत और चौतरफा आर्थिक मंदी का सामना करना पड़ेगा। आने वाले हफ्तों में पाइपलाइन की मरम्मत की गति ही तय करेगी कि यह संकट किस मोड़ पर जाता है।

 

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