यूपी विधानसभा चुनाव में सपा-कांग्रेस सीट शेयरिंग: ‘जीतने की क्षमता’ बनेगी फॉर्मूला, 100 सीटों के दावे पर फंसा पेंच

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव नजदीक आते ही विपक्षी ‘इंडिया’ गठबंधन के दो प्रमुख घटकों—समाजवादी पार्टी (सपा) और कांग्रेस—के बीच सीटों के बंटवारे को लेकर हलचल तेज हो गई है। जहां कांग्रेस आगामी चुनाव में 100 से अधिक सीटों पर अपनी दावेदारी ठोक रही है, वहीं सपा नेतृत्व ने साफ कर दिया है कि सीट शेयरिंग का आधार महज ‘संख्या’ नहीं, बल्कि उम्मीदवार की जीतने की क्षमता (Winability) और स्थानीय राजनीतिक समीकरण होगा।

100 सीटों पर कांग्रेस का दावा, सपा का ‘स्ट्राइक रेट’ पर जोर

कांग्रेस नेताओं का तर्क है कि वर्ष 2017 के विधानसभा चुनाव में सपा-कांग्रेस गठबंधन के तहत पार्टी ने 100 से अधिक सीटों पर अपने प्रत्याशी उतारे थे, इसलिए इस बार भी उसे 100 से ज्यादा सीटें मिलनी चाहिए। हालांकि, 2022 के चुनाव में कांग्रेस का प्रदर्शन बेहद निराशाजनक रहा था और वह केवल 2 सीटों पर ही सिमट गई थी।

दूसरी ओर, 2022 में 111 सीटें जीतने वाली सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव का रुख स्पष्ट है कि चुनाव सरकार बनाने के लिए लड़ा जा रहा है और गठबंधन के लिए हर एक सीट कीमती है। सपा के रणनीतिकारों का मानना है कि कांग्रेस को उन सीटों पर अपने मजबूत और जिताऊ उम्मीदवारों का ब्योरा देना होगा जिनकी वे मांग कर रहे हैं। वर्तमान परिस्थितियों को देखते हुए राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि कांग्रेस के खाते में 40 से 50 सीटें आ सकती हैं।

पुराने सहयोगियों की विदाई और नए समीकरण

वर्ष 2022 के चुनाव में सपा गठबंधन में शामिल रही राष्ट्रीय लोक दल (रालोद – 8 सीटें) और सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (सुभासपा – 6 सीटें) अब सपा से अलग हो चुकी हैं। ऐसे में सपा इस बार अपनी जमीनी पकड़ को और मजबूत करते हुए कमजोर उम्मीदवारों को उतारने का कोई जोखिम नहीं लेना चाहती। सूत्रों के मुताबिक, यदि कांग्रेस 100 सीटों के जिद पर अड़ी रहती है, तो सपा अपने स्तर पर कड़ा फैसला लेने से परहेज नहीं करेगी।

राजभर और निषाद पार्टी से दूरी: सपा का कड़ा सख्त निर्देश

राजनीतिक हलकों में चल रही उन चर्चाओं पर भी सपा ने पूर्ण विराम लगा दिया है, जिनमें एनडीए में शामिल सुभासपा प्रमुख ओमप्रकाश राजभर और निषाद पार्टी प्रमुख संजय निषाद के पाला बदलने की अटकलें लगाई जा रही थीं। सपा नेतृत्व ने अपने सभी पदाधिकारियों, विधायकों और रणनीतिकारों को सख्त हिदायत दी है कि इन दोनों दलों से किसी भी तरह के गठजोड़ या समझौते का प्रस्ताव लाने वाले व्यक्ति के खिलाफ तत्काल अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।

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