फेसबुक-इंस्टाग्राम पर कसने लगा शिकंजा: मेटा को अब नहीं मिलेगा कानूनी कवच, सरकार ले सकती है बड़ा फैसला

सोशल मीडिया जगत की दिग्गज टेक कंपनी मेटा की मुश्किलें भारत में लगातार बढ़ती नजर आ रही हैं। फेसबुक, इंस्टाग्राम और थ्रेड्स जैसे लोकप्रिय प्लेटफॉर्म्स का संचालन करने वाली इस अमेरिकी कंपनी को लेकर भारत सरकार अब अपने रुख में बड़ा बदलाव करने जा रही है। सरकारी सूत्रों के हवाले से मिली जानकारी के मुताबिक मेटा को अब केवल एक साधारण इंटरनेट मध्यस्थ (इंटरमीडियरी) नहीं माना जा सकता। सरकार का स्पष्ट मानना है कि मेटा अपने एल्गोरिदम के जरिए इस बात को खुद नियंत्रित करती है कि कौन सा कंटेंट किसे और कितना दिखेगा। इतना ही नहीं, प्लेटफॉर्म्स पर कंटेंट के प्रसार, वितरण और उसकी पहुंच (रीच) बढ़ाने के लिए बाकायदा पैसे भी लिए जाते हैं। ऐसे में मेटा को महज डेटा होस्ट करने वाली कंपनी के बजाय एक पूर्ण ‘सेवा प्रदाता’ (सर्विस प्रोवाइडर) के रूप में देखा जाना चाहिए।

एल्गोरिदम और रीच के खेल पर सरकार की पैनी नजर

एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने इस पूरे मामले की गंभीरता पर प्रकाश डालते हुए बताया कि कंपनी को अब अपने प्लेटफॉर्मों—फेसबुक, इंस्टाग्राम और थ्रेड्स—पर यूजर्स द्वारा पोस्ट किए गए और एल्गोरिदम द्वारा फैलाए जाने वाले कंटेंट की सीधी जवाबदेही लेनी होगी। अधिकारी के अनुसार मेटा की भूमिका अब सिर्फ इतनी नहीं रह गई है कि वह यूजर के कंटेंट को अपने सर्वर पर रख दे या उसे दूसरों तक पहुंचा दे। असल में उसके प्लेटफॉर्म पर मौजूद जटिल एल्गोरिदम यह तय करते हैं कि यूजर की उम्र, उसका लोकेशन, जेंडर और व्यक्तिगत पसंद-नापसंद के आधार पर उसे किस तरह का कंटेंट परोसा जाए। जब कोई कंपनी पैसे लेकर कंटेंट के प्रमोशन और विजिबिलिटी को तय करती है, तो वह निष्पक्ष मध्यस्थ होने का दावा नहीं कर सकती।

खत्म हो सकता है कानूनी संरक्षण, दर्ज हो सकेंगे केस

मामले से जुड़े एक अन्य अधिकारी ने बेहद कड़ा रुख अपनाते हुए संकेत दिया कि सरकार का यह स्पष्ट मानना है कि मेटा को अब कानूनी संरक्षण (सेफ हार्बर प्रोटेक्शन) हासिल नहीं है। इसका सीधा अर्थ यह है कि यदि इन प्लेटफॉर्मों पर कोई आपत्तिजनक, भ्रामक या आपराधिक कंटेंट साझा या प्रमोट किया जाता है, तो उससे जुड़े किसी भी अपराध के लिए मेटा के खिलाफ सीधे कानूनी कार्रवाई की जा सकती है और मुकदमा चलाया जा सकता है। हालांकि किसी विशिष्ट मामले में मेटा कानूनी रूप से जिम्मेदार है या नहीं, इसका अंतिम फैसला देश की न्यायपालिका ही करेगी। सरकार की ओर से इस नए रुख और जिम्मेदारियों को लेकर टेक कंपनी को अवगत करा दिया गया है और बहुत जल्द इस विषय पर अंतिम आधिकारिक फैसला लिया जा सकता है।

ऑनलाइन सुरक्षा, महिलाओं और बच्चों के लिए कड़े कदम

सरकार का यह कड़ा कदम ऐसे समय में सामने आया है जब सोशल मीडिया और डिजिटल स्पेस को आम नागरिकों, विशेषकर महिलाओं और बच्चों के लिए पूरी तरह सुरक्षित बनाने की दिशा में व्यापक प्रयास किए जा रहे हैं। इंटरनेट प्लेटफॉर्म्स पर बाल यौन शोषण सामग्री (CSAM) के प्रसार को रोकने, बच्चों में सोशल मीडिया की लत लगाने वाले एल्गोरिदम पर लगाम कसने और आत्महत्या या खुद को नुकसान पहुंचाने वाले विचारों को बढ़ावा देने वाली तस्वीरों, वीडियो व गेम्स पर सरकार ने बेहद सख्त रुख अपनाया है। जब मेटा खुद को सेवा प्रदाता के रूप में स्वीकार करेगी, तो उसे इन सभी सुरक्षा मानकों और जवाबदेहियों का पूरी कड़ाई से पालन करना होगा। इस पूरे मामले पर सरकार के आधिकारिक बयान के बाद मेटा का पक्ष जानने के लिए उन्हें ईमेल भेजा गया था, लेकिन खबर प्रकाशित होने तक कंपनी की तरफ से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया या जवाब हासिल नहीं हुआ है।

 

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