पाकिस्तान और तुर्किये को हूती विद्रोहियों की खुली धमकी! सऊदी का साथ देने पर दी गंभीर अंजाम भुगतने की चेतावनी

यमन के हूती विद्रोहियों (अंसार अल्लाह) ने पाकिस्तान और तुर्किये को एक सीधी और गंभीर सैन्य चेतावनी जारी की है. हूतियों ने स्पष्ट किया है कि यदि इन दोनों देशों ने सऊदी अरब के साथ मिलकर यमन में किसी भी तरह का सैन्य हस्तक्षेप किया, तो उन्हें इसका बेहद कड़ा और विनाशकारी जवाब मिलेगा. यह आक्रामक बयान सऊदी अरब के रणनीतिक व तेल ठिकानों पर हूतियों द्वारा किए गए ताजा मिसाइल व ड्रोन हमलों के बीच सामने आया है. हूती राजनीतिक ब्यूरो के सदस्य और धमार के गवर्नर मोहम्मद अल-बुखैती ने इराकी टीवी शो ‘अनदर रीडिंग’ में कहा कि यदि पाकिस्तान और तुर्किये इस युद्ध में सीधे शामिल होते हैं, तो उन पर पूरी ताकत से वार किया जाएगा और ऐसा सबक सिखाया जाएगा जिसे वे हमेशा याद रखेंगे.

‘मक्का संयुक्त रक्षा समझौता’ और देशों की प्रतिक्रियाएं

  • जनता से नहीं, सरकारों से है आपत्ति: अल-बुखैती ने कहा कि पाकिस्तान और तुर्किये की आवाम के दिलों में यमन के प्रति गहरी हमदर्दी है. उनकी यह चेतावनी वहां के आम नागरिकों के लिए नहीं, बल्कि उन सरकारों के लिए है जो सऊदी अरब को सैन्य समर्थन देने की योजना बना रही हैं.

  • तुर्किये का कड़ा रुख और एकजुटता: हूतियों की धमकियों के बाद तुर्किये, पाकिस्तान और सऊदी अरब के बीच 7 अगस्त को हस्ताक्षरित ‘मक्का संयुक्त रक्षा समझौते’ की चर्चाएं तेज हो गई हैं, जिसके तहत एक देश पर हमला सभी पर हमला माना जाएगा. तुर्किये के विदेश मंत्री हाकान फिदान ने मक्का के पास तेल ठिकानों पर हमलों की निंदा करते हुए कहा कि सऊदी अरब को सुरक्षा के लिए सैन्य व तकनीकी सहायता उपलब्ध कराने के लिए वे पाकिस्तान से बातचीत कर रहे हैं.

  • पाकिस्तान का ‘शाश्वत समझौता’ और बिना शर्त समर्थन: पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने कहा कि मक्का और मदीना की सुरक्षा करना उनके लिए किसी भी कागजी समझौते से बढ़कर एक ‘शाश्वत धार्मिक फर्ज’ है. वहीं, पाकिस्तानी सेना (ISPR) के महानिदेशक लेफ्टिनेंट जनरल अहमद शरीफ चौधरी ने सऊदी अरब की सुरक्षा के लिए ‘बिना शर्त’ समर्थन दोहराते हुए कहा कि पवित्र स्थलों की रक्षा के लिए पाकिस्तान किसी भी हद तक जाने को तैयार है.

2014 से जारी संघर्ष और लाल सागर का संकट यमन में यह भीषण गृहयुद्ध 2014 से जारी है, जब हूतियों ने राजधानी सना पर नियंत्रण कर लिया था. इसके बाद 2015 में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त यमन सरकार को बचाने के लिए सऊदी नीत गठबंधन ने हस्तक्षेप किया था. इस साल जुलाई से हूतियों ने सऊदी अरब पर समुद्री नाकेबंदी का ऐलान करते हुए लाल सागर और बाब अल-मंडेब जलडमरूमध्य में हमले तेज कर दिए हैं. सऊदी अरामको व अन्य तेल सुविधाओं पर लगातार हो रहे इन हमलों ने वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों और आपूर्ति श्रृंखला पर गहरा संकट खड़ा कर दिया है.

 

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