
उत्तर प्रदेश के बलिया जिले से एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है. रसड़ा कोतवाली क्षेत्र के मुस्तफाबाद गांव में हुए मां-बेटी के चर्चित दोहरे हत्याकांड की गुत्थी को पुलिस ने महज 72 घंटे के भीतर सुलझा लिया है. पुलिस जांच में सामने आया कि परिवार की सामाजिक प्रतिष्ठा और पारिवारिक हालातों से परेशान होकर 70 वर्षीय रामचीज गुप्ता ने ही अपनी मानसिक रूप से अस्वस्थ पत्नी मान्ती देवी और दृष्टिबाधित बेटी गौरी की हत्या की पूरी साजिश रची थी. इस वारदात में उसने गांव के ही दो युवकों, चंदन यादव और दिनेश गुप्ता को भी शामिल किया था. पुलिस ने तीनों आरोपियों को गिरफ्तार कर उनकी निशानदेही पर आलाकत्ल (लोहे का दाव) और खून से सने कपड़े बरामद कर लिए हैं.
17 सितंबर की रात दोहरे हत्याकांड से फैली थी सनसनी मुस्तफाबाद गांव में 17 सितंबर की रात रामचीज के घर के भीतर 65 वर्षीया मान्ती देवी और घर से करीब 30 मीटर दूर धान के खेत में उनकी 24 वर्षीया दृष्टिबाधित बेटी गौरी का शव मिलने से इलाके में हड़कंप मच गया था. दोनों की हत्या धारदार हथियार से काटकर की गई थी. शुरुआती जांच में जब पुलिस मौके पर पहुंची, तो घर के अंदर फैले खून को पानी से धोए जाने के सबूत मिले. इस पर पुलिस को परिवार के ही किसी व्यक्ति पर गहरा शक हुआ और पूरे मामले को संदिग्ध मानकर तफ्तीश तेज कर दी गई.
मानसिक परेशानी और लोक-लाज बनी हत्या की मुख्य वजह एएसपी (उत्तरी) दिनेश शुक्ल ने मामले का खुलासा करते हुए बताया कि मृतका मान्ती देवी की मानसिक स्थिति लंबे समय से खराब थी और वह बिना बताए कई दिनों तक घर से गायब हो जाती थीं. मां के चले जाने पर दृष्टिबाधित बेटी गौरी को दूसरों के घरों से मांगकर खाना पड़ता था. इन सब बातों से रामचीज बेहद शर्मिंदगी और मानसिक तनाव महसूस कर रहा था. उसने गांव की चट्टी पर कई बार पत्नी और बेटी को मार डालने या खुद जान देने की बात कही थी. 16 सितंबर की शाम उसने गांव के चंदन यादव और दिनेश गुप्ता को पैसे या अन्य प्रलोभन देकर अपनी साजिश में शामिल कर लिया.
खेत में फेंका शव, सबूत मिटाने के लिए धोया खून 17 सितंबर की रात तीनों ने मिलकर मान्ती देवी और गौरी की नृशंस हत्या कर दी. इसके बाद हत्या को बाहरी हमलावरों का काम दिखाने की नीयत से आरोपियों ने गौरी के शव को उठाकर बाहर धान के खेत में फेंक दिया. घर के अंदर फर्श पर फैले खून के निशानों को धो दिया गया. हालांकि, घटना के बावजूद रामचीज द्वारा पुलिस को सूचना न देना, किसी को खबर किए बिना सीधे दाह-संस्कार की तैयारी करना और अकेले शव को खेत तक ले जाने में असमर्थता जैसे बिंदुओं ने पुलिस का शक पुख्ता कर दिया.
सिधागरघाट से तीनों आरोपी गिरफ्तार, भेजे गए जेल मामले की गंभीरता को देखते हुए डीआईजी सुनील कुमार सिंह और एसपी ओमवीर सिंह ने खुद घटनास्थल का मुआयना किया था. स्वाट (SWAT), सर्विलांस और फोरेंसिक टीमों को जांच में लगाया गया. 19 सितंबर की सुबह मुखबिर की सटीक सूचना पर सिधागरघाट के पास से संयुक्त पुलिस टीम ने मुख्य आरोपी रामचीज गुप्ता, चंदन यादव और दिनेश गुप्ता को धर दबोचा. आरोपियों की निशानदेही पर हत्या में इस्तेमाल किया गया लोहे का दाव, रामचीज का खून लगा कुर्ता और चंदन की टी-शर्ट बरामद की गई है. पुलिस ने मुकदमे में हत्या और आर्म्स एक्ट की धाराएं बढ़ाकर तीनों को अदालत में पेश कर जेल भेज दिया है.










