
गुरुग्राम के चर्चित 31 वर्षीय युवराज मनचंदा हत्याकांड की मुख्य आरोपी अन्या वत्सा की मुश्किलें लगातार बढ़ती जा रही हैं. अब उसके खिलाफ दिल्ली के संसद मार्ग थाने में 1.25 करोड़ रुपये की एक बड़ी धोखाधड़ी और फर्जीवाड़े का मामला दर्ज किया गया है. शिकायतकर्ता अखिलेश गोयल का आरोप है कि अन्या वत्सा, उसके साथी संयम सचदेवा और अन्य सहयोगियों ने प्रवर्तन निदेशालय (ED), गृह मंत्रालय (MHA), रॉ (R&AW) और एनआईए (NIA) जैसी शीर्ष सरकारी एजेंसियों के नाम पर डरा-धमकाकर करोड़ों रुपये ऐंठ लिए.
ED के फर्जी नोटिस और पूर्व RAW प्रमुख का नाम देकर बनाया दबाव शिकायत के अनुसार, सितंबर 2024 में शिकायतकर्ता को व्हाट्सएप पर ED का एक कथित नोटिस भेजा गया, जिसमें उन्हें और उनकी पत्नी को पेश होने का निर्देश था. इसके बाद आरोपी अन्या वत्सा और संयम सचदेवा ने अपनी ऊंची पहुंच का दावा किया. अन्या ने खुद को पूर्व रॉ प्रमुख सामंत गोयल की भांजी और रॉ के जॉइंट सेक्रेटरी अनिल गुप्ता की रिश्तेदार बताकर पीड़ितों को PMLA, NDPS और UAPA जैसे कड़े कानूनों के तहत फंसाने और जेल भेजने का डर दिखाया.
अलग-अलग किस्तों में ऐंठे 1.25 करोड़ रुपये शिकायतकर्ता का आरोप है कि अक्टूबर 2024 से अगस्त 2025 के बीच आरोपियों ने सरकारी सेटलमेंट और केस बंद कराने के नाम पर उनसे लगभग 1.25 करोड़ रुपये अपने HDFC बैंक खाते में ट्रांसफर करवा लिए. पीड़ित ने यह रकम अपनी जमापूंजी, रिश्तेदारों से उधार और बैंक लोन लेकर जुटाई थी. यही नहीं, आरोपियों ने केस खत्म होने की झूठी ईमेल भेजकर आगे चलकर 13.85 करोड़ रुपये जमा कराने और 26 करोड़ रुपये बकाया होने का भी फर्जी दावा किया.
30 करोड़ की रंगदारी और दिवाली से पहले दी जान से मारने की धमकी फर्जीवाड़ा यहीं नहीं रुका, आरोपियों ने शिकायतकर्ता को लगातार अलग-अलग नंबरों से फोन करके मानसिक रूप से प्रताड़ित किया. व्हाट्सएप मैसेज के जरिए पीड़ित परिवार को दिवाली से पहले 30 करोड़ रुपये चुकाने की धमकी दी गई और तुरंत 15 लाख रुपये देने का दबाव बनाया गया. पीड़ितों को डराने के लिए उनके करीबियों का भी जिक्र किया गया, जिससे पीड़ित परिवार गंभीर तनाव में आ गया.
संसद मार्ग थाने में FIR दर्ज, जांच में जुटी पुलिस अखिलेश गोयल की शिकायत पर दिल्ली के संसद मार्ग पुलिस स्टेशन में 15 अगस्त 2026 को भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 318(4) और 61(2) के तहत मामला दर्ज कर लिया गया है. पुलिस को सौंपे गए सबूतों में बैंक ट्रांजैक्शन की रसीदें, व्हाट्सएप चैट, फर्जी नोटिस के स्क्रीनशॉट और ईमेल्स शामिल हैं. दिल्ली पुलिस अब आरोपियों के बैंक खातों, फर्जी दस्तावेजों और इसमें शामिल अन्य नेटवर्क की सघन जांच कर रही है.










