
दिल्ली में चल रही वोटर लिस्ट की विशेष जांच (SIR) प्रक्रिया के दौरान चुनाव आयोग ने लगभग 32 लाख मतदाताओं को नोटिस जारी किए हैं. इन नोटिस पाने वालों में दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता और पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल का परिवार भी शामिल है. आम आदमी पार्टी (AAP) द्वारा वोटर लिस्ट से नाम हटाए जाने के आरोपों के बाद चुनाव आयोग और चुनाव पंजीकरण अधिकारी (ERO) कार्यालय ने दोनों मामलों पर अलग-अलग स्पष्टीकरण जारी किया है.
CM रेखा गुप्ता का फॉर्म क्यों आया जांच के घेरे में? मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता को भेजे गए नोटिस पर सफाई देते हुए मुख्य चुनाव अधिकारी ने बताया कि उनके एन्यूमरेशन फॉर्म में दर्ज आयु (Age) और उनके माता-पिता की आयु के बीच लॉजिकल डिस्क्रिपेंसी (Logical Discrepancy) दर्ज हुई थी. हालांकि, चुनाव अधिकारी ने स्पष्ट किया है कि कागजातों की भौतिक जांच के बाद उनके सभी दस्तावेजों को सही पाकर वैलिडेट (Validated) कर दिया गया है और उनका नाम फाइनल वोटर लिस्ट में बरकरार रहेगा.
केजरीवाल परिवार का नाम ‘नो-मैपिंग’ लिस्ट में क्यों आया? ‘आप’ (AAP) ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर दावा किया था कि दिल्ली की ड्राफ्ट वोटर लिस्ट से अरविंद केजरीवाल का नाम गायब है. इस पर पलटवार करते हुए ERO ऑफिस ने बयान जारी कर बताया कि केजरीवाल और उनके परिवार का नाम विधानसभा क्षेत्र 40 के तहत पंजीकृत है. केजरीवाल परिवार द्वारा जमा कराए गए एन्यूमरेशन फॉर्म-3 में पिछले गहन संशोधन (SIR) की जानकारियां पूरी नहीं थीं, जिसके कारण उनका नाम स्वचलित रूप से ‘नो-मैपिंग’ (No-Mapping) वाली श्रेणी में आ गया. ERO ने स्पष्ट किया कि जानकारी अधूरी होने के कारण नियमानुसार नोटिस जारी किए गए हैं, नाम हटाया नहीं गया है.
चुनाव आयोग (ECI) की गाइडलाइंस और नोटिस की वजह चुनाव पंजीकरण अधिकारी (ERO) ने स्पष्ट किया कि भारत निर्वाचन आयोग के दिशा-निर्देशों के अनुसार ड्राफ्ट वोटर लिस्ट में दो मुख्य श्रेणियों के तहत नाम वर्गीकृत किए जाते हैं:
-
मैप्ड वोटर्स (Mapped Voters): ऐसे मतदाता जिन्होंने गहन संशोधन के दौरान वोटर लिस्ट में अपनी या अपने परिजनों की जानकारी को सफलतापूर्वक लिंक/मैप कर लिया है.
-
अनमैप्ड/नो-मैपिंग वोटर्स (Unmapped Voters): ऐसे मतदाता जिन्होंने पिछली संशोधन प्रक्रिया की वोटर लिस्ट से अपनी जानकारी को लिंक नहीं किया है या जिनके फॉर्म में पुराना विवरण अधूरा जमा हुआ है.
ERO के अनुसार, केजरीवाल और उनके परिजनों के जमा फॉर्म में पुरानी वोटर लिस्ट से लिंक करने वाली आवश्यक जानकारियां मौजूद नहीं थीं, इसलिए नोटिस जारी कर सत्यापन की प्रक्रिया पूरी की जा रही है.












