अयोध्या: राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में चार्जशीट से बड़ा खुलासा, 67 लड़कों के शामिल होने का दावा; CCTV फुटेज में 85 बार नोट छिपाते दिखा आरोपी

अयोध्या। अयोध्या के प्रसिद्ध राम मंदिर में चढ़ावे की दान राशि की गिनती के दौरान हुई चोरी का मामला अब एक बेहद बड़े और संगठित नेटवर्क की ओर इशारा कर रहा है। मामले में दाखिल पुलिस की चार्जशीट में दर्ज बयानों के अनुसार, यह चोरी किसी एक दिन की घटना नहीं थी बल्कि गणना कक्ष में पिछले कई दिनों से लगातार पैसों का घपला किया जा रहा था। चार्जशीट के बयानों में इस पूरे मामले में करीब 67 लड़कों की संलिप्तता की बात सामने आई है, जिससे हड़कंप मच गया है।

दिल्ली से अयोध्या लौटते समय चंपत राय को मिली थी पहली सूचना

चार्जशीट में दर्ज बयानों के मुताबिक, चढ़ावा चोरी की पहली आधिकारिक सूचना श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय को 4 जून को मिली थी। उस समय वे दिल्ली से अयोध्या लौट रहे थे, तभी आनंद कुमार चौधरी ने उन्हें व्हाट्सएप पर गणना कक्ष के बाथरूम से बरामद 2.25 लाख रुपये का वीडियो और लिखित मैसेज भेजा।

इसके बाद 5 जून को अयोध्या पहुंचने पर चंपत राय के आवास पर ट्रस्ट से जुड़े सदस्यों ने लैपटॉप पर CCTV फुटेज दिखाए, जिसमें गणना कर्मी नोटों की गड्डियों को मेज के नीचे और कपड़ों में छिपाते हुए साफ दिखाई दिए।

चेकिंग शुरू होते ही बाथरूम में छिपाए 2.25 लाख रुपये

इस बड़े नेटवर्क का पर्दाफाश 3 जून को हुआ, जब एक गणना कर्मी मदन गोपाल निगम को चार कर्मचारियों—करुणेश पांडेय, लवकुश मिश्रा, अविनाश शुक्ला उर्फ शनि और अनुकल्प मिश्रा पर शक हुआ। मदन ने आरोप लगाया कि ये लोग चढ़ावे की नोटों की गड्डियां उठाकर अपनी कमर या मेज के नीचे छिपा रहे थे।

अगले दिन 4 जून को जब इन पर कड़ी निगरानी रखी गई, तो अविनाश शुक्ला को नोट उठाते पकड़ा गया। ट्रस्ट प्रतिनिधियों और बैंक अधिकारियों को सूचना देकर जैसे ही चेकिंग शुरू कराई गई, घबराए आरोपियों ने रुपयों की गड्डी बाथरूम में छिपा दी। बाद में तलाशी के दौरान बाथरूम से 2.25 लाख रुपये बरामद किए गए।

CCTV में कैद हुई करतूत: 85 बार चोरी करते दिखा अविनाश

पुलिस द्वारा चार्जशीट में शामिल किए गए CCTV फुटेज के विश्लेषण से आरोपियों की हरकतों का कच्चा चिट्ठा सामने आ गया है:

  • अविनाश शुक्ला उर्फ शनि: CCTV फुटेज में अकेले 85 बार चढ़ावे की रकम चोरी करते और 4 बार अन्य साथियों की मदद करते दिखा।

  • करुणेश पांडेय: 2 बार सीधे चोरी करते और 68 बार साथी आरोपियों को सहयोग करते पाया गया।

  • मनीष यादव: 16 बार रकम अपने पास रखते और 19 बार अन्य अभियुक्तों की मदद करते दिखा।

  • अनुकल्प मिश्रा व लवकुश मिश्रा: अनुकल्प 56 बार और लवकुश 52 बार अन्य सह-अभियुक्तों को चोरी में मदद करते दिखे।

इसके अलावा, पुलिस को आरोपियों के मोबाइल चैट से कैश के बंडलों के लेन-देन और बंटवारे से जुड़े कई अहम सबूत भी मिले हैं।

700 बैंक खाते खंगाले गए, चंपत राय का नहीं मिला कोई निजी खाता

मामले की गहराई से जांच करते हुए पुलिस और जांच एजेंसियों ने ट्रस्टियों, आरोपियों, संदिग्धों, गणना कर्मियों और कर्मचारियों से जुड़े करीब 700 बैंक खातों के लेन-देन की गहन पड़ताल की। इस दौरान ट्रस्ट के सभी आधिकारिक खातों की भी जांच की गई। जांच रिपोर्ट में एक बात विशेष रूप से सामने आई कि ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय के नाम पर कोई भी निजी बैंक खाता दर्ज नहीं मिला।

 

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