
‘द वान’ ने पहले दिन ₹9.6 करोड़ की ग्रॉस ओपनिंग दर्ज की और दूसरे दिन यानी शनिवार को बढ़कर ₹13.5 करोड़ तक पहुंच गई। यह 40 प्रतिशत से ज्यादा की बढ़त है, जिसके साथ भारत में फिल्म का दो दिनों का कुल कलेक्शन ₹23.1 करोड़ ग्रॉस हो गया है। ट्रेड एनालिस्ट तरण आदर्श के मुताबिक, फिल्म का वीकेंड कलेक्शन करीब ₹33 करोड़ तक पहुंच सकता है।
फिल्म के पीछे न तो किसी फ्रेंचाइज़ी का सहारा है, न कोई हॉलिडे वीकेंड और न ही किसी स्थापित फ्रेंचाइज़ी या बड़े ग्रुप की ब्रांड वैल्यू। सितंबर के एक सामान्य शुक्रवार को सिद्धार्थ मल्होत्रा फिल्म को अपने दम पर सिनेमाघरों तक लेकर आए हैं, जहां इसका मुकाबला लौट रही ‘एवेंजर्स: एंडगेम’ से भी है। ऐसे में पहले दिन के आंकड़े के पीछे छिपा ज्यादा दिलचस्प पहलू यह है कि दर्शक वास्तव में कहां से आ रहे हैं और अब फिल्म की पहुंच किन क्षेत्रों तक बढ़ रही है।

ट्रेड ट्रैकिंग के मुताबिक, ‘द वान’ 2026 की उन मास एंटरटेनर फिल्मों की सूची में शामिल हो रही है, जिन्हें टियर-2 और टियर-3 शहरों के साथ-साथ नॉन-नेशनल चेन और सिंगल स्क्रीन सिनेमाघरों में भी हाउसफुल रिस्पॉन्स मिल रहा है। इस सूची में ‘धुरंधर 2’, ‘बॉर्डर 2’, ‘धमाल 4’ और ‘मिर्जापुर’ फिल्म जैसी फिल्में शामिल हैं।

हालांकि, सिद्धार्थ मल्होत्रा की फिल्म को इस सूची की बाकी फिल्मों से अलग करने वाली बात यह है कि ‘द वान’ बिना किसी फ्रेंचाइज़ी, सीक्वल नंबर या पहले से स्थापित कलाकारों की टीम के दर्शकों तक पहुंच रही है। बाकी फिल्मों के साथ एक ऐसी ऑडियंस पहले से जुड़ी हुई है, जो उस फ्रेंचाइज़ी या कहानी से परिचित होकर सिनेमाघरों तक आती है। इसके उलट, ‘द वान’ एक स्टैंडअलोन और सोलो-लीड फिल्म होने के बावजूद उसी तरह के आंकड़े हासिल कर रही है। यही इस सफलता को और खास बनाता है।
शनिवार को एक और महत्वपूर्ण संकेत देखने को मिला। हार्टलैंड के साथ-साथ शहरी केंद्रों में भी ऑक्यूपेंसी में सुधार हुआ। यानी फिल्म की पकड़ सिर्फ छोटे शहरों और मास सेंटर्स तक सीमित नहीं रही। दूसरे दिन किसी सोलो हीरो फिल्म का मास और मेट्रो—दोनों तरह के बाजारों में एक साथ आगे बढ़ना, उसके मजबूत दर्शक जुड़ाव का संकेत देता है।
फिल्म का हार्टलैंड कनेक्ट कुछ हद तक इसकी कहानी में ही दिखाई देता है। ‘द वान’ की कहानी छठ पूजा की पृष्ठभूमि से जुड़ी है, जो भोजपुरी बेल्ट के सबसे बड़े त्योहारों में से एक है। फिल्म की लोककथा उसी तरह की क्षेत्रीय और पीढ़ियों से चली आ रही मान्यताओं से जुड़ती है, जिन्हें दर्शक आसानी से पहचान सकते हैं—जंगल के देवी-देवता, पीढ़ियों से चली आ रही परंपराएं और ऐसा नायक, जिसे किसी परंपरा को बदलने के बजाय पहले उसमें अपनी जगह और पहचान अर्जित करनी है।
यही सांस्कृतिक जुड़ाव फिल्म की कहानी में स्वाभाविक रूप से बुना गया है और इसका असर बॉक्स ऑफिस पर भी दिखाई दे रहा है। फिल्म से जुड़ी कमाई और दर्शकों की मौजूदगी यह संकेत दे रही है कि ‘द वान’ की कहानी ने हार्टलैंड के दर्शकों के साथ एक सीधा और मजबूत कनेक्शन बनाया है।














