एसजीपीजीआई में खून का काला कारोबार: 8 हजार में एक यूनिट ब्लड बेचने वाले 5 आरोपियों पर केस दर्ज, शौक पूरा करने के लिए रचते थे साजिश

 राजधानी लखनऊ स्थित संजय गांधी स्नातकोत्तर आयुर्विज्ञान संस्थान (SGPGI) में मरीजों के तीमारदारों से खून का सौदा करने वाले गिरोह का भंडाफोड़ हुआ है। एसजीपीजीआई में भर्ती मरीजों के परिजनों को मजबूरी का फायदा उठाकर 8-8 हजार रुपये में एक यूनिट खून बेचने के मामले में पुलिस ने सोमवार देर रात पांचों आरोपियों के खिलाफ गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया है।

जांच में खुलासा हुआ है कि पकड़े गए आरोपियों में बीबीडी (BBD) के इंजीनियरिंग छात्र भी शामिल हैं, जो अपने महंगे शौक पूरा करने के लिए खून का काला कारोबार करते थे।

एडवांस पेमेंट के विवाद में खुला खूनी सौदे का राज

प्राप्त जानकारी के अनुसार, एसजीपीजीआई में शाहबाज अली और यश कुमार के मरीज भर्ती थे, जिन्हें अति-आवश्यक रूप से खून की जरूरत थी। शनिवार को उन्होंने संस्थान के बाहर स्थित एक मेडिकल स्टोर संचालक के माध्यम से रायबरेली (खीरों) निवासी हिमांशु सिंह से संपर्क किया।

हिमांशु ने बीबीडी कॉलेज के इंजीनियरिंग छात्र पवन, अमन और भावेश तथा प्राइवेट नौकरी करने वाले प्रदीप को फोन करके तुरंत एसजीपीजीआई बुलाया। यहां तीमारदारों और आरोपियों के बीच एडवांस पेमेंट (अग्रिम राशि) को लेकर विवाद शुरू हो गया। हंगामा बढ़ता देख एसजीपीजीआई के सुरक्षा अधिकारी डीके सिंह और चौकी प्रभारी परवेज ने मौके पर पहुंचकर पांचों को धर दबोचा।

पहले शांति भंग में चालान, मीडिया के खुलासे के बाद दर्ज हुई FIR

शुरुआत में एसजीपीजीआई प्रशासन या पीड़ित तीमारदारों की ओर से कोई लिखित शिकायत दर्ज नहीं कराई गई थी। इसके चलते पुलिस ने पांचों का महज शांति भंग में चालान कर दिया, जिससे उन्हें आसानी से जमानत मिल गई।

हालांकि, मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रमुखता से खबर प्रकाशित होने और सच सामने आने के बाद सोमवार को एसजीपीजीआई के सुरक्षा अधिकारी राकेश मंडल ने पीजीआई थाने में आरोपियों के खिलाफ लिखित तहरीर दी। पीजीआई थाना प्रभारी इंस्पेक्टर सुनील सिंह ने बताया कि शिकायत के आधार पर पांचों आरोपियों के खिलाफ नियमानुसार मुकदमा दर्ज कर लिया गया है।

मेडिकल स्टोर संचालक का भाई है मुख्य आरोपी हिमांशु

पुलिस जांच में सामने आया है कि मुख्य आरोपी हिमांशु सिंह एसजीपीजीआई के बाहर स्थित मेडिकल स्टोर संचालक का भाई है और वह अक्सर दुकान पर बैठता था। वहीं से वह अस्पताल में आने वाले जरूरतमंद तीमारदारों को चिह्नित कर अपने जाल में फंसाता था। पुलिस अब इस बात की भी जांच कर रही है कि इस गिरोह में अस्पताल या ब्लड बैंक का कोई अंदरूनी कर्मचारी तो शामिल नहीं है।

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