यूपी में सरकारी नौकरी के लिए कड़े हुए नियम, कैरेक्टर वेरिफिकेशन पर योगी सरकार की नई नीति जारी

उत्तर प्रदेश में सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे युवाओं के लिए यह खबर बेहद अहम है। योगी आदित्यनाथ सरकार ने राज्य की सरकारी सेवाओं में सीधी भर्ती के तहत चयनित अभ्यर्थियों के कैरेक्टर वेरिफिकेशन यानी चरित्र सत्यापन को लेकर एक नई और व्यापक समेकित नीति जारी कर दी है। इस नीति के तहत यह पूरी तरह साफ कर दिया गया है कि किन गंभीर आपराधिक मामलों में आरोप तय होने पर अभ्यर्थी सरकारी नौकरी के लिए अयोग्य माने जाएंगे, किन मामलों में दोषसिद्धि जरूरी होगी और किन परिस्थितियों में युवाओं को राहत दी जाएगी।

किन संस्थानों और विभागों पर लागू होगी नई नीति?

यह नई नीति सिर्फ राज्य सरकार के मुख्य विभागों तक ही सीमित नहीं है, बल्कि इसका दायरा काफी बड़ा है। यह व्यवस्था राज्य सरकार के अधीन आने वाले सभी निगमों, परिषदों, शैक्षणिक संस्थानों, स्वायत्तशासी निकायों, उपक्रमों, पंचायती राज संस्थाओं और नगर क्षेत्रों के स्थानीय निकायों में सीधी भर्ती के तहत होने वाली नियुक्तियों पर भी सख्ती से लागू होगी। अपर मुख्य सचिव एम. देवराज की ओर से जारी शासनादेश के मुताबिक, इलाहाबाद हाईकोर्ट के निर्देशों का पालन करते हुए पहले जारी किए गए अलग-अलग शासनादेशों को एक साथ समेकित करके यह नई व्यवस्था बनाई गई है।

अपराधों का वर्गीकरण और कैटेगरी-ए के गंभीर मामले

नई नीति का सबसे अहम हिस्सा अपराधों का स्पष्ट वर्गीकरण है। सरकार ने आपराधिक मामलों और प्रतिबंधात्मक कार्रवाइयों को कुल पांच अलग-अलग श्रेणियों में बांटा है। पहली श्रेणी यानी कैटेगरी-A में बेहद गंभीर, जघन्य और नैतिक अधमता से जुड़े अपराध रखे गए हैं। इनमें राज्य के खिलाफ अपराध, सेना से जुड़े मामले, हत्या, आपराधिक मानव वध, दहेज मृत्यु, आत्महत्या के लिए उकसाना, गंभीर शारीरिक हमला, तेजाब हमला, फिरौती के लिए अपहरण, मानव तस्करी और बलात्कार जैसे गंभीर यौन अपराध शामिल हैं।

इस श्रेणी में लूट, डकैती, रंगदारी, संगठित अपराध, आतंकवादी गतिविधियां, भीड़ द्वारा हत्या यानी मॉब लिंचिंग, गंभीर साइबर अपराध, डिजिटल अरेस्ट, ओटीपी और यूपीआई धोखाधड़ी, डीपफेक, परीक्षा या चयन प्रणाली में हैकिंग, डमी अभ्यर्थी बैठाना, फर्जी जाति, आय, दिव्यांगता या खेल प्रमाण पत्र बनवाना, पेपर लीक, सॉल्वर गैंग और कूटरचना जैसे आधुनिक अपराध भी शामिल हैं। इसके अलावा लोक सेवक द्वारा आपराधिक न्यासभंग, आगजनी और गंभीर मामलों में झूठे साक्ष्य गढ़ने जैसे कृत्य भी इसी दायरे में आते हैं। इन मामलों में अदालत द्वारा आरोप तय होने या दोषसिद्धि होने पर निर्धारित नियमों के तहत अयोग्यता लागू हो सकती है।

विशेष कानूनों और अधिनियमों के तहत आने वाले दायरे

दूसरी श्रेणी यानी कैटेगरी-B में विशेष और कड़े केंद्रीय व प्रांतीय कानूनों के तहत आने वाले गंभीर अपराधों को रखा गया है। इनमें एनडीपीएस अधिनियम, आयुध अधिनियम की निर्दिष्ट धाराएं, सरकारी गोपनीयता कानून, विस्फोटक पदार्थ अधिनियम, गैरकानूनी गतिविधियां रोकथाम अधिनियम यानी UAPA और आतंकवाद से जुड़े अन्य कानून शामिल हैं। इसके अलावा राष्ट्रीय जांच एजेंसी अधिनियम की अनुसूची के अपराध, अनैतिक व्यापार निवारण अधिनियम, पॉक्सो अधिनियम, आईटी एक्ट की निर्दिष्ट धाराएं, भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम और धनशोधन निवारण अधिनियम के कुछ मामले भी इसमें शामिल हैं।

सार्वजनिक परीक्षाओं में अनुचित साधनों की रोकथाम से जुड़े कानून, गैंगस्टर एक्ट, गैरकानूनी धर्म परिवर्तन निषेध कानून, गोवध निवारण कानून की धाराएं तथा जहरीली या मिलावटी शराब से मौत अथवा चोट के मामलों से जुड़े आबकारी प्रावधान भी इसी श्रेणी का हिस्सा हैं।

प्रिवेंटिव कार्रवाई, दोषसिद्धि और बार-बार के अपराध

तीसरी श्रेणी यानी कैटेगरी-C में राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम यानी NSA, COFEPOSA और राष्ट्रीय सुरक्षा तथा आतंकवाद से जुड़े कुछ कानूनों के तहत की गई प्रतिबंधात्मक कार्रवाइयों को रखा गया है, बशर्ते सलाहकार बोर्ड से उसकी पुष्टि हुई हो और आदेश सक्षम न्यायालय द्वारा निरस्त न किया गया हो। चौथी श्रेणी यानी कैटेगरी-D में ऐसे अपराध शामिल हैं जिनमें सामान्यतः अदालत से दोषसिद्धि होने पर ही अयोग्यता लागू होगी, जैसे आपराधिक षड्यंत्र, समाज में वैमनस्य फैलाना, आर्थिक धोखाधड़ी और दस्तावेजों की कूटरचना। वहीं, पांचवीं श्रेणी यानी कैटेगरी-E में बार-बार अपराध करने वाले वे अभ्यर्थी शामिल हैं जिनके खिलाफ पिछले तीन या पांच वर्षों में कई मामलों में आरोप पत्र दाखिल हो चुके हैं या अदालत ने आरोप तय किए हैं।

हर FIR पर नहीं जाएगी नौकरी, छोटे मामलों में मिलेगी राहत

इस नीति का सबसे सकारात्मक पहलू यह है कि सरकार ने स्पष्ट किया है कि केवल एफआईआर दर्ज होने, मामला विवेचनाधीन रहने या आरोप पत्र दाखिल होने भर से, जब तक सक्षम अदालत आरोप तय न कर दे, अभ्यर्थी को स्वतः अयोग्य नहीं माना जाएगा। अदालत से दोषमुक्त होने, आपसी समझौते से मामला निस्तारित होने या छोटे-मोटे शमनीय अपराधों जिनमें केवल जुर्माना या एक साल तक की सजा का प्रावधान हो, राहत का स्पष्ट प्रावधान किया गया है। इसके अलावा राजनीतिक विचारधारा के आधार पर किसी भी युवा को सरकारी नौकरी से वंचित नहीं किया जाएगा, बशर्ते वह किसी ऐसे हिंसक संगठन से जुड़ा न हो जिसका उद्देश्य समाज की व्यवस्था को बलपूर्वक बदलना हो।

जानकारी छिपाना पड़ेगा भारी और 30 दिन में पूरी होगी रिपोर्ट प्रक्रिया

नई नीति के तहत आवेदन पत्र, सत्यापन पत्र और स्वघोषणा पत्र में अपने आपराधिक इतिहास की पूरी जानकारी देना अनिवार्य कर दिया गया है। यदि कोई अभ्यर्थी अपने खिलाफ दर्ज मुकदमे, गिरफ्तारी या इतिहास की जानकारी छिपाता है या गलत तथ्य देता है, तो उसकी नियुक्ति तुरंत रद्द कर दी जाएगी और कानूनी कार्रवाई की जाएगी। चरित्र सत्यापन की प्रक्रिया के तहत जिला प्रशासन और पुलिस को 30 दिन के भीतर अपनी रिपोर्ट सौंपनी होगी। हालांकि, सामान्य मामलों में सत्यापन के इंतजार में नियुक्ति प्रक्रिया रोकी नहीं जाएगी और चयनित युवाओं को प्रोविजनल नियुक्ति पत्र जारी किया जा सकेगा।

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