मेरठ। उत्तर प्रदेश के मेरठ स्थित चौधरी चरण सिंह जिला कारागार (जिला जेल) से एक बेहद चौंकाने वाला और भावुक कर देने वाला मामला सामने आया है। जेल की सलाखों के पीछे अपने ही पतियों की निर्मम हत्या के संगीन जुर्म में बंद और फांसी की सजा काट रहीं दो महिला कैदियों समेत तीन महिलाओं के दिलों में अचानक ‘संतान प्रेम’ जाग उठा है। बहुचर्चित ‘नीला ड्रम कांड’ में पति की हत्या कर मौत की सजा पाने वाली मुस्कान रस्तोगी, पति को सांप से कटवाने के जुर्म में फांसी की सजा पा चुकी रविता, और हस्तिनापुर के चर्चित मर्डर केस में बंद दामिनी ने आगामी 1 नवंबर को अपनी संतानों की लंबी उम्र के लिए ‘अहोई अष्टमी’ का निर्जला व्रत रखने की इच्छा जताई है।
जेल प्रशासन से की पूजा सामग्री की मांग, संस्था ने बढ़ाई मदद
इन तीनों महिला बंदियों ने जेल अधीक्षक वीरेश राज शर्मा से औपचारिक अनुमति मांगते हुए व्रत के लिए आवश्यक पूजा सामग्री उपलब्ध कराने का आग्रह किया है। जेल में सामाजिक और धार्मिक कार्यों से जुड़ी संस्थाओं के माध्यम से इन कैदियों की मांग पूरी की जा रही है।
हाल ही में ‘संजीवनी महिला संस्था’ की प्रतिनिधि निशी जैन अपनी टीम के साथ जिला जेल पहुँची थीं, जहाँ उन्होंने महिला बंदियों को करवाचौथ के लिए शृंगार सामग्री और मिट्टी के करवे बांटे थे। इसी बातचीत के दौरान मुस्कान, रविता और दामिनी (जिसका इकलौता बेटा है) ने अपनी-अपनी संतानों की दीर्घाआयु के लिए अहोई अष्टमी का व्रत रखने और विशेष पूजन सामग्री जुटाने की गुहार लगाई। संस्था द्वारा उनकी जरूरत के मुताबिक सारी सामग्री जेल के अंदर भिजवाई जा रही है।
फांसी की सजा के बाद छोड़ दिया था पूजा-पाठ, अब बेटियों के लिए पलटा मन
जेल सूत्रों के मुताबिक, अदालत द्वारा मृत्युदंड (फांसी) की सजा सुनाए जाने के बाद मुस्कान रस्तोगी गहरे मानसिक तनाव में चली गई थी। सजा मिलने के बाद उसने भगवान और पूजा-पाठ से पूरी तरह नाता तोड़ लिया था और हाल ही में आए शारदीय नवरात्र का व्रत भी उसने नहीं रखा था।
हालांकि, अब अपनी दोनों बेटियों के भविष्य और ममता के खातिर उसने एक बार फिर से व्रत रखने और ईश्वर से प्रार्थना करने का मन बनाया है। गौरतलब है कि मेरठ की अदालत से फांसी की सजा मिलने के बाद मुस्कान के वकीलों ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में अपील दाखिल की थी, जिसे हाईकोर्ट ने सुनवाई के लिए स्वीकार कर लिया है।
जेल मैनुअल के नियमों के तहत की जाती है व्यवस्था
मेरठ जिला जेल के अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि जेल मैनुअल के नियमों के दायरे में रहकर किसी भी बंदी को अपनी धार्मिक आस्था का पालन करने, व्रत रखने और पूजा-पाठ करने की पूरी स्वतंत्रता होती है। पर्वों के अवसर पर नियमानुसार फलाहार और पूजन सामग्री मुहैया कराई जाती है। इसके अलावा, यदि जेल में बंद कैदियों के परिवारजन बाहर से मिलना चाहें या नियमों के तहत विशेष मुलाकात की बात हो, तो जेल प्रशासन कानून सम्मत पूरी मदद करता है।
क्या हैं इन तीनों महिला बंदियों के खौफनाक मामले?
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मुस्कान रस्तोगी (नीला ड्रम कांड): मुस्कान ने अपने प्रेमी साहिल शुक्ला के साथ मिलकर पति सौरभ राजपूत की बेरहमी से चाकू घोंपकर हत्या कर दी थी। इसके बाद शव के टुकड़े कर एक बड़े नीले प्लास्टिक के ड्रम में भरे और पहचान छिपाने के लिए ऊपर से सीमेंट का घोल डाल दिया था। इस सनसनीखेज मामले में फास्ट ट्रैक कोर्ट ने मुस्कान और उसके प्रेमी को फांसी की सजा सुनाई है।
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रविता (सांप से कटवाकर हत्या): बहसूमा क्षेत्र की रहने वाली रविता ने अपने पति अमित कश्यप की गला दबाकर हत्या की थी। इस कत्ल को एक प्राकृतिक हादसा दिखाने के लिए उसने मृतक के बिस्तर पर एक जहरीला सांप छोड़ दिया था। अदालत ने इस शातिरता को देखते हुए उसे भी मृत्युदंड की सजा सुनाई है।
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दामिनी (हस्तिनापुर मर्डर): हस्तिनापुर इलाके में अपने पति अतुल पंवार की गला दबाकर हत्या करने के आरोप में दामिनी पिछले काफी समय से जिला जेल में बंद है और कानूनी प्रक्रिया का सामना कर रही है।















