
देश की राजधानी दिल्ली के मुस्तफाबाद विधानसभा क्षेत्र से मतदाता सूची (Voter List) की समीक्षा/विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया को लेकर एक बेहद चौंकाने वाला और विवादित मामला सामने आया है। अंग्रेजी समाचार पत्र ‘द हिंदू’ की एक विस्तृत रिपोर्ट के अनुसार, मुस्तफाबाद के दयालपुर इलाके में सालों से रह रहे वैध मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से कटवाने के लिए सामूहिक रूप से फॉर्म-7 (Form-7) दाखिल किए जा रहे हैं।
सबसे गंभीर और हैरान करने वाली बात यह है कि जिन नागरिकों के नाम काटने के लिए आपत्तियां दर्ज कराई गई हैं, वे सभी अपने तय पते पर ही निवास कर रहे हैं। इसके बावजूद न तो उन्हें प्रशासन की तरफ से कोई सूचना दी गई और न ही चुनाव पंजीकरण अधिकारी (ERO) स्तर से कोई कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है।
दर्जी साजिद हुसैन का परिवार हैरान: BLA ने दर्ज कराई आपत्तियां
रिपोर्ट के मुताबिक, मुस्तफाबाद के दयालपुर में पिछले 20 वर्षों से एक ही मकान में रहकर सिलाई का काम करने वाले साजिद हुसैन उस वक्त दंग रह गए, जब उन्हें पता चला कि उनकी पत्नी अफसाना खातून और बेटे असद रजा जैदी का नाम वोटर लिस्ट से हटाने की अर्जी दी गई है।
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आवेदक का नाम अनजान: साजिद हुसैन का कहना है कि जिस व्यक्ति ने उनके परिवार के खिलाफ फॉर्म-7 भरा है, उसका नाम उन्होंने जीवन में कभी नहीं सुना।
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मृत या अनुपस्थित बताने का दावा: इस इलाके के करीब 28 मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से विलोपित करने की मांग की गई है, जिसमें कारण बताया गया है कि संबंधित व्यक्ति पते से अनुपस्थित हैं, स्थायी रूप से कहीं और स्थानांतरित हो चुके हैं या फिर उनकी मृत्यु हो चुकी है।
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बीजेपी बीएलए का नाम आया सामने: चुनाव आयोग (ECI) के आधिकारिक रिकॉर्ड के अनुसार, ये सभी आपत्तियां भारतीय जनता पार्टी (BJP) के बूथ-स्तरीय एजेंट-2 (BLA-2) चंद्र शेखर नैनवाल की ओर से दाखिल की गई थीं।
द हिंदू की पड़ताल: सभी मतदाता पते पर मौजूद, पहचान पत्र भी दुरुस्त
‘द हिंदू’ की टीम ने जब पोलिंग बूथ नंबर 129 के अंतर्गत आने वाले इन 28 में से 19 प्रभावित मतदाताओं या उनके परिजनों से जमीनी स्तर पर बातचीत की, तो सच्चाई बिल्कुल उलट निकली।
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सभी मतदाता अपने-अपने घरों में ही रहते हुए पाए गए।
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सभी के पास निर्वाचन आयोग द्वारा जारी वैध मतदाता पहचान पत्र (Voter ID) और अन्य आवश्यक दस्तावेज मौजूद थे।
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इन सभी ने 31 अगस्त को जारी हुई ड्राफ्ट वोटर लिस्ट में अपना नाम भी सत्यापित किया था।
बिना नोटिस के फॉर्म-10 में दर्ज हुए नाम
आंकड़ों के अनुसार, पोलिंग बूथ नंबर 129 पर दाखिल फॉर्म-7 आवेदनों में से 18 नाम 25 अक्टूबर को, 9 नाम 21 अक्टूबर को और 1 नाम 19 अक्टूबर को दिल्ली के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO Delhi) की दैनिक आपत्ति सूची यानी फॉर्म-10 (Form-10) में शामिल किए गए।
नियमानुसार, जब भी ईआरओ को किसी नाम पर आपत्ति प्राप्त होती है और वह फॉर्म-10 में दर्ज होती है, तो संबंधित नागरिक को अपना पक्ष रखने के लिए नोटिस भेजा जाना अनिवार्य है। हालांकि, मुस्तफाबाद के इन मतदाताओं को अब तक किसी प्रकार का नोटिस प्राप्त नहीं हुआ है।
पूरे मुस्तफाबाद में 843 आपत्तियां: एक विशेष समुदाय को निशाना बनाने का आरोप
रिपोर्ट में दावा किया गया है कि यह समस्या केवल एक बूथ तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे मुस्तफाबाद निर्वाचन क्षेत्र में फैली हुई है:
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कुल आपत्तियां: मुस्तफाबाद में कुल 843 आपत्तियां दर्ज की गई हैं।
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तृतीय पक्ष (Third Party) आपत्तियां: कुल 597 थर्ड-पार्टी फॉर्म में से बहुसंख्यक फॉर्म बीजेपी के BLA द्वारा भरे गए हैं।
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572 फॉर्म-7 का आंकड़ा: अकेले बीजेपी बीएलए द्वारा कुल 572 फॉर्म-7 दाखिल किए गए हैं, जो क्षेत्र के 24 अलग-अलग हिस्सों में मुख्य रूप से मुस्लिम बहुल क्षेत्रों के मतदाताओं के खिलाफ दर्ज कराए गए हैं।
इस खुलासे के बाद दिल्ली की चुनावी राजनीति में मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) और चुनाव आयोग की कार्यशैली तथा निष्पक्षता को लेकर एक बार फिर राजनीतिक सरगर्मी और सवाल तेज हो गए हैं।


















