नई दिल्ली। हर साल 2 नवंबर को जब मुंबई में अभिनेता शाहरुख खान के घर ‘मन्नत’ के बाहर हजारों चाहने वालों का हुजूम उमड़ता है, तो वे सिर्फ बॉलीवुड के ‘किंग’ का जन्मदिन नहीं मना रहे होते, बल्कि उस अदम्य जज्बे को सलाम कर रहे होते हैं जिसने पिछले तीन दशकों में भारतीय सिनेमा के मायने बदलकर रख दिए।
भले ही इस बार अपनी आगामी फिल्म ‘किंग’ के शूटिंग शेड्यूल में व्यस्त होने के कारण शाहरुख मन्नत की बालकनी से फैंस को अपनी एक झलक न दिखा पाए हों, लेकिन उनके चाहने वालों के उत्साह और दीवानगी में कोई कमी नहीं आई है। आज उनके जन्मदिन के इस खास मौके पर हम सिर्फ उनके फैले हुए हाथों वाले आइकॉनिक रोमांटिक पोज की बात नहीं करेंगे, बल्कि उस 30 साल पुरानी टीस और जिद की चर्चा करेंगे, जिसने 57 की उम्र पार करने के बाद दुनिया को बॉलीवुड का सबसे बड़ा ‘एक्शन स्टार’ दिया।
जब रोमांटिक हीरो के सांचे में ढलने को मजबूर हुए थे शाहरुख
खुद शाहरुख खान ने एक इंटरव्यू में हंसते हुए यह किस्सा साझा किया था कि जब वह फिल्म इंडस्ट्री में नए-नए आए थे, तब उनका एकमात्र सपना हाथ में गन लेकर हॉलीवुड स्टाइल का एक्शन हीरो बनना था। वह ऐसी ही एक धांसू एक्शन स्क्रिप्ट की तलाश में निर्देशक आदित्य चोपड़ा के पास भी गए थे।
लेकिन आदित्य चोपड़ा ने उन्हें ‘दिलवाले दुल्हनिया ले जाएंगे’ (DDLJ) की पटकथा थमा दी और मुस्कुराते हुए कहा, “तुझसे पूरा देश प्यार करेगा!” इसके बाद ऐसा ताना-बुना गया कि शाहरुख ‘किंग ऑफ रोमांस’ के ऐसे अचूक सांचे में ढल गए, जिससे बाहर निकलना किसी भी अभिनेता के लिए लगभग असंभव माना जाने लगा। मगर शाहरुख तो शाहरुख हैं; वह लीक पर चलने के लिए नहीं, बल्कि नए रास्ते बनाने के लिए आए थे।
ना कोई माई-बाप, ना गॉडफादर: आउटसाइडर से सुपरस्टार का सफर
90 के दशक की शुरुआत में जब दिल्ली का एक साधारण लड़का आंखों में बड़े-बड़े सपने लेकर मायानगरी मुंबई आया, तो उसके पास न तो किसी फिल्मी खानदान का रसूख था और न ही अपनी पसंद के रोल चुनने की लग्जरी। ‘फौजी’ और ‘सर्कस’ जैसे लोकप्रिय टीवी धारावाहिकों से अपनी पहचान बनाने वाले इस कलाकार ने वही रास्ते चुने, जिनसे उस दौर के स्थापित हीरो कतराते थे।
जब पर्दे पर सिर्फ पारंपरिक रोमांटिक हीरो बनने की होड़ मची थी, तब उन्होंने ‘बाजीगर’, ‘डर’ और ‘अंजाम’ जैसी फिल्मों में डार्क और एंटी-हीरो (विलेन) के किरदार निभाए। काम की तलाश और मजबूरी में उठाए गए इन साहसिक कदमों ने शुरुआत में ही यह साबित कर दिया कि उनकी अभिनय क्षमता की कोई तय सीमा नहीं है।
‘किंग ऑफ रोमांस’ का ताज और रूढ़ियों को तोड़ते किरदार
‘राज’ और ‘राहुल’ बनकर उन्होंने पूरी दुनिया को प्यार के मायने सिखाए। ‘दिलवाले दुल्हनिया ले जाएंगे’, ‘कुछ कुछ होता है’ और ‘दिल तो पागल है’ जैसी फिल्मों ने उन्हें सफलता के ऐसे शिखर पर पहुंचा दिया जहां से नीचे देखना भी असंभव था।
लेकिन शाहरुख कभी एक ही छवि में बंधकर रहने वाले कलाकारों में नहीं थे। जब उनका रोमांटिक करियर अपनी चरम सीमा पर था, तब उन्होंने ‘दिल से..’, ‘अशोका’, ‘स्वदेश’ और ‘चक दे! इंडिया’ जैसी अनूठी फिल्में करके अपनी ही स्थापित छवि को कड़ी चुनौती दी। ‘स्वदेश’ के मोहन भार्गव और ‘चक दे! इंडिया’ के कोच कबीर खान बनकर उन्होंने यह साबित कर दिया कि वह सिर्फ बाहें फैलाकर रोमांस करने वाले हीरो नहीं, बल्कि एक बेहद संजीदा और मंजे हुए अभिनेता भी हैं।
असफलताओं का दौर और चार साल का लंबा वनवास
हर महान कलाकार के जीवन में एक ऐसा दौर आता है जब उनके नए प्रयोगों को दर्शक तुरंत स्वीकार नहीं कर पाते। शाहरुख ने ‘रा.वन’ में सुपरहीरो बनने की कोशिश की, ‘फैन’ में एक सनकी प्रशंसक का किरदार निभाया और ‘जीरो’ में बउआ सिंह बनकर कुछ अलग करने की पुरजोर कोशिश की।
लेकिन बॉक्स ऑफिस पर ये फिल्में उम्मीदों पर खरी नहीं उतर पाईं। इसके बाद साल 2018 के आसपास वो दौर आया जब लगातार असफलता के बाद शाहरुख ने फिल्मों से चार साल का लंबा और खामोश ब्रेक ले लिया। उस समय फिल्मी गलियारों में आलोचकों ने उनके करियर को लगभग समाप्त मान लिया था और ट्रेड एनालिस्ट्स यह कहने लगे थे कि अब ‘खान्स’ का दौर ढल चुका है। मगर वे इस बात से अनजान थे कि परदे के पीछे ‘किंग खान’ अपने सबसे बड़े कमबैक की पटकथा लिख रहे हैं।
57 की उम्र में एक्शन का धमाकेदार विस्फोट और ऐतिहासिक कमबैक
चार साल के लंबे सन्नाटे को चीरकर जब जनवरी 2023 में फिल्म ‘पठान’ का टीज़र और ट्रेलर रिलीज हुआ, तो पूरी दुनिया देखती रह गई। लंबे बाल, गठीले सिक्स-पैक एब्स और हाथ में भारी-भरकम मशीन गन थामे जब 57 साल के इस सुपरस्टार ने बड़े पर्दे पर कदम रखा, तो सिनेमाघरों की छतें सीढ़ियों और सीटियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठीं।
इसके बाद ‘जवान’ में उन्होंने विक्रम राठौर और आजाद का डबल रोल निभाकर पर्दे पर जो एक्शन का तांडव मचाया, उसने बॉक्स ऑफिस के सारे पुराने रिकॉर्ड ध्वस्त कर दिए। इन दोनों फिल्मों ने अकेले 2000 करोड़ रुपये से अधिक का कारोबार कर हिंदी सिनेमा का इतिहास बदल डाला।
जो अधूरा सपना वह अपने करियर के शुरुआती 20-25 सालों में पूरा नहीं कर पाए थे, उसे उन्होंने अपनी उम्र के उस पड़ाव पर पूरा करके दिखाया, जहां लोग रिटायरमेंट की सोचते हैं। उन्होंने आलोचकों के मुंह पर करारा तमाचा जड़ते हुए यह साबित कर दिया कि एक्शन स्टार बनने के लिए केवल जवानी नहीं, बल्कि कलेजे में वो आग चाहिए जो उनके सीने में पिछले तीन दशकों से लगातार सुलग रही थी।
सिनेमा के असली ‘किंग’ का अनथक सफर
अब शाहरुख खान अपनी आगामी बहुचर्चित फिल्म ‘किंग’ के साथ एक बार फिर बड़े पर्दे पर खूंखार एक्शन अवतार में लौटने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। यह कहानी है अपनी शर्तों पर जीने वाले उस शख्स की, जिसने हर बदलते दौर के साथ खुद को नए सिरे से री-इन्वेंट (पुनर्परिभाषित) किया है।
रोमांस के बेताज बादशाह से लेकर बॉक्स ऑफिस के सबसे बड़े एक्शन वॉरियर बनने का यह प्रेरणादायक सफर हमें यह सिखाता है कि यदि आपके इरादों में सच्चाई और मेहनत में ईमानदारी है, तो तीन दशकों का लंबा इंतजार भी इतिहास के पन्नों में एक नए स्वर्णिम अध्याय की शुरुआत बन सकता है।
















