मुख्य बिंदु:
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आपदा में जान गंवाने वाले परिवारों को मिलने वाली आर्थिक सहायता 4 लाख से बढ़ाकर हुई 8 लाख रुपये।
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फसलों के नुकसान पर मुआवजा राशि में 25 से 30 फीसदी का इजाफा, 10 लाख से ज्यादा किसानों को होगा सीधा फायदा।
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1 अप्रैल 2026 से हुए नुकसान पर भी लागू होंगे नए मानक, मकान, पशुधन और स्कूलों की मरम्मत के लिए भी बढ़े फंड।
उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने प्राकृतिक आपदा की मार झेलने वाले राज्य के किसानों, पशुपालकों और आम नागरिकों के लिए बड़ी राहत का ऐलान किया है। राज्य सरकार ने बाढ़, सूखा, अतिवृष्टि और अन्य प्राकृतिक आपदाओं से होने वाले नुकसान के मुआवजे की दरों में ऐतिहासिक बढ़ोतरी की है। अब फसल बर्बाद होने पर किसानों को पहले की तुलना में कहीं अधिक आर्थिक सहायता प्रदान की जाएगी। इसके साथ ही, प्राकृतिक आपदा के कारण किसी व्यक्ति की अकाल मृत्यु होने पर उनके आश्रित परिजनों को दी जाने वाली अनुग्रह राशि को सीधा दोगुना कर दिया गया है—यह सहायता राशि पहले 4 लाख रुपये थी, जिसे अब बढ़ाकर 8 लाख रुपये कर दिया गया है। सरकार के इस जनहितैषी फैसले से प्रदेश के 10 लाख से अधिक किसानों और प्रभावित परिवारों को सीधा लाभ मिलेगा।
फसलों के मुआवजे में 25 से 30 फीसदी तक का इजाफा
योगी सरकार ने आपदा राहत के तहत फसलों को हुए नुकसान की भरपाई के लिए सहायता राशि में 25 से 30 फीसदी तक की बढ़ोतरी की है। पंचांग और नए शासकीय मानकों के अनुसार—
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सिंचित क्षेत्र: फसल का नुकसान होने पर अब 17,000 रुपये की जगह 22,000 रुपये प्रति हेक्टेयर की सहायता दी जाएगी।
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असिंचित (वर्षा आधारित) क्षेत्र: सहायता राशि 8,500 रुपये से बढ़ाकर 11,000 रुपये प्रति हेक्टेयर कर दी गई है।
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बारहमासी फसलें व कृषि वानिकी: नुकसान होने पर अब 22,500 रुपये के स्थान पर 30,000 रुपये प्रति हेक्टेयर का मुआवजा मिलेगा।
रेशम उत्पादन, कृषि भूमि व भूस्खलन राहत दरें भी बढ़ीं
रेशम की खेती करने वाले किसानों और भूमि क्षति से जूझ रहे लोगों के लिए भी राहत के मानक संशोधित किए गए हैं—
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एरी, शहतूत व टसर रेशम: नुकसान पर अब 6,000 रुपये की जगह 7,800 रुपये प्रति हेक्टेयर मिलेंगे।
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मूगा रेशम: सहायता 7,500 रुपये से बढ़ाकर 9,800 रुपये प्रति हेक्टेयर कर दी गई है।
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गाद (सिल्ट) हटाना: कृषि भूमि से गाद साफ करने की मदद 18,000 से बढ़ाकर 23,000 रुपये प्रति हेक्टेयर की गई।
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भूस्खलन व हिमस्खलन: जमीन को क्षति पहुंचने पर मुआवजा 47,000 रुपये से बढ़ाकर 60,000 रुपये प्रति हेक्टेयर तय किया गया है।
गाय-भैंस से लेकर बकरी व मुर्गीपालन तक बढ़ा मुआवजा
आपदा में पशुधन के नुकसान की भरपाई के लिए भी नए दर तय किए गए हैं—
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बड़े पशु (गाय, भैंस आदि): मृत्यु पर अब 40,000 की जगह 50,000 रुपये मिलेंगे।
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छोटे पशु (बकरी, भेड़, सूअर): सहायता 4,000 से बढ़ाकर 5,500 रुपये प्रति पशु की गई है।
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घोड़े व खच्चर: मृत्यु पर 20,000 की जगह 25,400 रुपये दिए जाएंगे।
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कुक्कुट (मुर्गीपालन): आपदा में नुकसान होने पर 100 रुपये के स्थान पर 130 रुपये प्रति मुर्गी की दर से सहायता मिलेगी।
मकान क्षतिग्रस्त होने पर 2.06 लाख तक की मदद, राहत शिविर 30 दिनों तक
मकानों के नुकसान के लिए भी सहायता राशि के नए मानक लागू किए गए हैं—
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मैदानी क्षेत्र: मकान पूरी तरह नष्ट होने पर 1.85 लाख रुपये और आंशिक नुकसान पर 93 हजार रुपये मिलेंगे।
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पहाड़ी क्षेत्र: पूर्ण क्षतिग्रस्त मकानों के लिए 2.06 लाख रुपये की राशि निर्धारित की गई है।
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राहत शिविर व पेयजल: आपदा प्रभावित परिवारों को राहत शिविरों में अब 30 दिनों तक सहायता मिलेगी। वहीं, सूखे की स्थिति में 90 दिनों तक पेयजल व्यवस्था का प्रावधान किया गया है।
स्कूलों की मरम्मत के लिए 26 लाख तक का फंड, 1 अप्रैल 2026 से लागू होंगे नियम
आपदा में क्षतिग्रस्त हुए शैक्षणिक संस्थानों के बुनियादी ढांचे के लिए भी भारी सहायता राशि तय की गई है। प्राथमिक विद्यालयों की मरम्मत के लिए 15.50 लाख रुपये तक तथा माध्यमिक विद्यालयों, इंटर कॉलेजों और पॉलिटेक्निक संस्थानों के लिए 26 लाख रुपये तक की सहायता का प्रावधान है।
इस निर्णय की सबसे खास बात यह है कि ये सभी बढ़े हुए मानक 1 अप्रैल 2026 से 4 नवंबर 2026 तक हुए किसी भी नुकसान की भरपाई पर लागू होंगे। भुगतान राज्य आपदा मोचन निधि (SDRF) और राष्ट्रीय आपदा मोचन निधि (NDRF) के दिशा-निर्देशों के अनुसार पारदर्शी तरीके से किया जाएगा।



















