लखनऊ. उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने प्रदेश की आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं को दिवाली से पहले एक बड़ा ऐतिहासिक तोहफा दिया है। राज्य सरकार ने आंगनबाड़ी मानदेय में सीधी 50 प्रतिशत की बढ़ोतरी का ऐलान किया है। इस फैसले से प्रदेश की लाखों महिला कर्मियों और उनके परिवारों में खुशी की लहर दौड़ गई है। इसके साथ ही मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदेशवासियों के नाम अपनी 49वीं पाती जारी कर अयोध्या में आयोजित होने वाले भव्य दीपोत्सव में शामिल होने का सादर निमंत्रण दिया है।
12,000 रुपये हुआ आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं का मानदेय, 2.91 लाख महिलाओं को लाभ
योगी सरकार द्वारा दी गई सौगात के अनुसार, आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं का मासिक मानदेय अब 8,000 रुपये से बढ़ाकर सीधे 12,000 रुपये कर दिया गया है। वहीं, आंगनबाड़ी सहायिकाओं के मानदेय में भी भारी वृद्धि करते हुए इसे 4,000 रुपये से बढ़ाकर 6,000 रुपये प्रति माह कर दिया गया है।
यह बढ़ा हुआ मानदेय सितंबर 2026 से प्रभावी लागू माना जाएगा, जिसका भुगतान अक्टूबर के वेतन के साथ किया जाएगा। प्रदेश सरकार के इस बड़े फैसले से उत्तर प्रदेश की लगभग 2.91 लाख आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं को प्रत्यक्ष रूप से लाभ मिलेगा।
5 लाख रुपये तक का मिलेगा कैशलेस इलाज
मानदेय में बढ़ोतरी के साथ-साथ राज्य सरकार ने आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के स्वास्थ्य की चिंता करते हुए एक और बड़ा फैसला लिया है। अब आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और उनके परिवारों को 5 लाख रुपये तक के मुफ्त और कैशलेस इलाज की सुविधा प्रदान की जाएगी। इस कदम से स्वास्थ्य संबंधी आर्थिक परेशानियों से जूझने वाली कार्यकर्ताओं को बड़ी राहत मिलेगी।
सीएम योगी ने लिखी 49वीं पाती: अयोध्या दीपोत्सव में आने का दिया न्योता
एक तरफ जहां आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को मानदेय का तोहफा मिला, वहीं दूसरी ओर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदेशवासियों को अपनी 49वीं पाती लिखी है। दीपोत्सव के पावन अवसर पर लिखी गई इस पाती के जरिए सीएम योगी ने सभी उत्तर प्रदेशवासियों से अपील की है कि वे अपने परिवार और मित्रों के साथ अयोध्या धाम पधारें।
उन्होंने लिखा कि प्रभु श्रीराम की पावन नगरी श्री अयोध्या धाम अपने दसवें भव्य और दिव्य दीपोत्सव के स्वागत के लिए पूरी तरह पुलकित है। दीपोत्सव सनातन चेतना के पुनर्जागरण और हमारी सांस्कृतिक विरासत के गौरव का महापर्व है।
भरत जी के त्याग से सीखें: ‘सत्ता का अर्थ अधिकार नहीं, दायित्व है’
अपनी पाती में दीपोत्सव के आध्यात्मिक और नैतिक महत्व को रेखांकित करते हुए सीएम योगी ने कहा कि दीपोत्सव त्याग, मर्यादा और समर्पण की भावना को विश्व पटल पर प्रतिष्ठित करता है। 14 वर्षों तक भरत जी ने राजसुख का त्याग कर प्रभु श्रीराम की चरण पादुकाओं को सिंहासन पर रखकर शासन चलाया। भरत जी का यह त्याग सिखाता है कि सत्ता का वास्तविक अर्थ केवल अधिकार पाना नहीं, बल्कि अपनी जिम्मेदारियों और दायित्वों का ईमानदारी से निर्वहन करना है।
उन्होंने आगे कहा कि मां सरयू के तट और राम की पैड़ी पर जब लाखों दिए एक साथ जगमगाएंगे, तो ऐसा दृश्य उत्पन्न होगा मानो पूरी आकाशगंगा ही अयोध्या की धरती पर उतर आई हो।
उत्सव प्रदेश बना यूपी: सुरक्षा से बढ़ा निवेश और रोजगार
सीएम योगी ने यह भी स्पष्ट किया कि दीपोत्सव केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं है, बल्कि यह स्थानीय अर्थव्यवस्था को संबल देने का माध्यम भी है। दीपोत्सव से कुम्हारों, फूल विक्रेताओं, हस्तशिल्पियों, होटल व्यवसायियों और स्थानीय व्यापारियों के लिए रोजगार व आय के नए अवसर पैदा होते हैं।
उत्तर प्रदेश ने आस्था और जनभागीदारी को विकास की शक्ति बनाकर अपनी पहचान एक ‘उत्सव प्रदेश’ के रूप में स्थापित की है। जहां प्रकाश और सुरक्षा का माहौल होता है, वहीं निवेश और तरक्की के नए द्वार खुलते हैं।


















