महिला आरक्षण पर ‘आर-पार’ के मूड में कांग्रेस: पीएम मोदी को चिट्ठी लिखकर पुराना बिल लागू करने की मांग, विपक्ष ने चला मास्टरस्ट्रोक

नई दिल्ली। देश की राजनीति में महिला आरक्षण का मुद्दा एक बार फिर गरमा गया है। केंद्र की मोदी सरकार द्वारा महिला आरक्षण बिल (नारी शक्ति वंदन अधिनियम) लाए जाने के बाद अब कांग्रेस और विपक्षी गठबंधन ने जवाबी दांव चल दिया है। शनिवार को हुई विपक्षी दिग्गजों की एक अहम बैठक में निर्णय लिया गया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर पुराने महिला आरक्षण बिल को बिना किसी शर्त के तत्काल लागू करने की मांग की जाएगी।

विपक्ष का आरोप है कि सरकार ‘परिसीमन’ और ‘जनगणना’ जैसी शर्तों की आड़ में इस कानून को लंबे समय तक टालना चाहती है।

सोनिया और प्रियंका गांधी ने संभाली कमान

महिला आरक्षण के मुद्दे पर भावी रणनीति बनाने के लिए शनिवार को विपक्षी गठबंधन के प्रमुख नेताओं की बैठक हुई। इस बैठक में कांग्रेस की वरिष्ठ नेता सोनिया गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा समेत गठबंधन के तमाम बड़े चेहरे शामिल हुए। बैठक का मुख्य एजेंडा सरकार की घेराबंदी करना था। सूत्रों के अनुसार, विपक्षी नेताओं ने सर्वसम्मति से तय किया है कि वे प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर मांग करेंगे कि 2010 वाले पुराने प्रावधानों के आधार पर ही आरक्षण को प्रभावी बनाया जाए, ताकि महिलाओं को इसका लाभ मिलने में वर्षों का इंतजार न करना पड़े।

‘परिसीमन’ को बताया राजनीतिक पैंतरा

विपक्ष का सीधा आरोप है कि सरकार इस विधेयक की आड़ में ‘परिसीमन’ जैसे पैंतरे अपनाकर देश के राजनीतिक संतुलन को अपने पक्ष में मोड़ने की कोशिश कर रही है। बैठक में चर्चा हुई कि सीटों की संख्या बढ़ाकर 850 करने और परिसीमन के जरिए राज्यों के प्रतिनिधित्व के साथ छेड़छाड़ करने की योजना बनाई जा रही है, जो लोकतांत्रिक ढांचे के लिए घातक साबित हो सकती है। विपक्ष ने साफ किया कि वह आरक्षण के पक्ष में तो है, लेकिन इसके पीछे छिपे किसी भी गुप्त राजनीतिक एजेंडे का कड़ा विरोध करेगा।

ओबीसी आरक्षण और जातीय जनगणना पर प्रहार

इससे पहले सदन में चर्चा के दौरान प्रियंका गांधी ने सरकार पर तीखा हमला बोला था। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार महिला आरक्षण के नाम पर ओबीसी समाज के साथ धोखाधड़ी कर रही है। प्रियंका गांधी ने सवाल उठाया कि जब 2010 में कांग्रेस के नेतृत्व में राज्यसभा से यह बिल पारित हो चुका था, तो अब 2011 की जनगणना के आधार पर परिसीमन की शर्त क्यों थोपी जा रही है? उन्होंने कहा कि सरकार नई जातीय जनगणना से घबरा रही है क्योंकि इससे पिछड़े वर्गों की वास्तविक संख्या सामने आ जाएगी।

देशभर में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर जनता को बताएगा विपक्ष

बैठक में यह भी रणनीति बनी कि गठबंधन के नेता अब देशभर में प्रेस कॉन्फ्रेंस करेंगे। इसके जरिए जनता को यह बताया जाएगा कि सरकार का वर्तमान बिल केवल चुनावी स्टंट है और इसमें ओबीसी वर्ग के हितों की अनदेखी की गई है। विपक्ष का कहना है कि जब तक सभी वर्गों (OBC, SC, ST) को उचित प्रतिनिधित्व नहीं मिलता, तब तक उनका यह संघर्ष जारी रहेगा। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर सियासी घमासान और तेज होने के आसार हैं।

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