कानपुर : कपड़ा कारोबारी के बेटे का अपहरण के बाद हत्या, ट्यूशन टीचर और बॉयफ्रेंड गिरफ्तार

[ फ़ाइल फ़ोटो ]

दैनिक भास्कर ब्यूरो ,

कानपुर। शहर के एक बड़े कपड़ा कारोबारी के हाई स्कूल में पढ़ने वाले बेटे को उसकी टयूशन टीचर ने अपने प्रेमी के साथ मिलकर मार डाला। 12 घंटे तक शव को प्रेमी के घर में छिपा कर रखा गया। छात्र के घर में पत्थर में लपेट कर फेंके गये फिरौती के पत्र के बाद परिजनों ने पुलिस को सूचना दी तो आला अफसरों समेत क्राइम ब्रांच व सर्विलांस टीम एक्टिव हो गयी। आठ घंटे की मशक्कत के बाद आखिरकार पुलिस हत्यारोपियों तक पहुंची पर छात्र को नहीं बचा सकी। इस पूरे हत्याकांड में लव, सेक्स, धोखा और साजिश की कड्यिां एक दूसरे से जुड़ रही है।

पुलिस ने लगभग पूरे मामले से पर्दा उठा लिया हे लेकिन कई ऐसे सवाल है जिनके जवाब अभी भी परिजन मांग रहे है। रायपुरवा थाने से महज आधा किलोमीटर की दूरी पर आचार्य नगर में रहने मनीष कनोड़िया का इकलौता पुत्र कुशाग्र कनोड़िया जयपुरिया स्कूल में हाई स्कूल का छात्र था। परिवार में एक बहन और मां रितू समेत दादा संजय कनोड़िया व अन्य परिवार के लोग है। सोमवार की शाम चार बजे स्कूटी से छात्र कुशाग्र फजलगंज में रहने वाली टीचर रचिता वत्स के यहां पढ़ने गया था। लेकिन वापस नहीं लौटा। रात साढ़े सात बजे परिजनों ने बेटे का फोन मिलाया तो फोन स्विच आफ था जिसके  बाद मां को अनहोनी की अंदेशा हो गया। परिजनों ने दोस्तों, रिश्तेदारों के यहां खोजबीन शुरू कर दी।

इस बीच रात 8.50 पर स्कूटी से हेलमेट लगाये एक युवक ने पत्थर में लपेट कर एक पत्र घर में फेंका। जिसमें तीस लाख की फिरौती मांगी गयी थी। साथ धमकाया गया कि पुलिस को सूचना न दे पैसा रात दो बजे कोकाकोला चौराहे पर लेकर आ जाये और एक घंटे में बेटा सही सलामत मिल जायेगा। फिरौती का फोन आने के बाद घबराये परिजनों ने पुलिस को सूचना दी। मौके पर ज्वाइंट सीपी आनंद प्रकाश तिवारी, डीसीपी प्रमोद कुमार समेत एसीपी, एसएचओ अर्चना सिंह समेत क्राइम ब्रांच के अफसर पहुंच गये। आसपास लगे सीसीटीवी कैमरे खंगाले गये तो जींस टी शर्ट पहले एक युवक पत्र फेंकता दिखा। 

पुलिस को गार्ड राजेन्द्र ने कुछ क्लू दिये। परिजनों ने पुलिस को बताया कि जैसी स्कूटी दिख रही है वैसी बेटे की टीचर के पास भी है। बस यहीं से पुलिस को अपहरण कांड का क्लू मिल गया। पुलिस ने देरा रात ही टीचर रचिता वत्स उसकी बहन को उठा लिया। टीचर के फोन कॉल चेक किये गये तो उसमें प्रभात नाम के युवक से कई बार बात होने की जानकारी मिली। पुलिस ने प्रभात के घर में दबिश दी तो एक स्कूटी दिखी जो कैमरे में कैद हुई थी। पुलिस ने स्कूटी जब्त कर प्रभात को दबोच कर थाने पहुंची। यहां कई घंटे तक पुलिस को दोनों आरोपी बरगलाते रहे। पुलिस ने सख्त की तो दोनों टूट गये।

पुलिस को दोनों आरोपी पनकी, फजलगंज, बर्रा तक घुमाते रहे। लेकिन जब पुलिस ने सीसीटीवी फूटेज दिखाये तब जाकर हत्या की बात कबूल की। छात्र की हत्या किये जाने की जानकारी मिलते ही पुलिस के हाथ पांव फूल गये। मौके पर पुलिस आयुक्त डॉ आरके स्वर्णकार भी पहुंच गये। सुबह चार बजे मुख्य आरोपी टीचर के प्रेमी प्रभात के घर में बने स्टोर रूम से छात्र का शव बरामद कर लिया गया। जैसे ही परिजनों को बेटे की मौत की जानकारी मिली घर में कोहराम मच गया। रात में ही पंचनामा करके शव को पीएम के लिये भेजा। इस बीच फॉरेन्सिक टीम ने आरोपी के घर और जिस कमरे में हत्या की गयी वहां से कई साक्ष्र एकत्र किये।

जिस रस्सी से गला घोंटा गया था वह भी बरामद कर ली। दोनों हत्यारोपियों ने पुलिस को बताया कि पत्र फेंकने छात्र का दोस्त अकिंत उर्फ आर्यन गया था उसे भी पूरी साजिस का पता था। पुलिस ने उसे भी गिरफ्तार कर लिया। ज्वाइंट सीपी आनंद प्रकाश तिवारी ने बताया कि अभी तक की जांच में यही सामने आया कि पैसों के लिये छात्र को बहाने से बुलाकर हत्या कर दी गयी थी उसके बाद फिरौती मांगी गयी थी। जब तक पुलिस को सूचना दी गयी तब तक हत्या हो चुकी थी।

कहीं आश्नाई के चक्कर में तो नहीं हुई हत्या –

छात्र कुशाग्र की हत्या के पीछे भले ही हत्यारोपियों ने पैसों को वजह बतायी हो पर कई ऐसे सवाल थे जिसके जवाब या तो सिर्फ पुलिस के पास थे या हत्यारोपियों के पास।  टीचर रचिता और उसका प्रेमी अगल बगल रहते थे। टीचर दो बार कुशाग्र के घर गयी थी। पिछले माह उसके जन्मदिन पर भी अपने प्रेमी के साथ गयी थी। रचिता और प्रभात बहुत जल्द शादी करने वाले थे दोनों की सगाई भी हो गयी थी।

पुलिस सूत्र के माने तो छात्र ने एक दिन दोनों को अपित्तजनक हालत में देख लिया था तब से उसका नजरिया टीचर को लेकर कुछ बदला बदला था जिसे रचिता महसूस कर रही थी। इस बीच प्रभात को भी ऐसा लगने लगा था उसकी प्रेमिका को छात्र इंम्प्रेस करने की कोशिश कर रहा है क्योकि  दो बार छात्र ने टीचर को महंगे गिफ्ट दिये थे जिसकी जानकारी उसके दोस्त अंकित ने प्रभात को दी थी। आशंका यह भी कि टीचर खुद छात्र को प्रेम जाल में फंसा रही थी ताकि उससे पैसे ऐंठ कर प्रभात के साथ शादी कर ले। पर उससे पहले ऐसा क्या हुआ कि अचानक किडनैपिंग और हत्या का प्लान बन गया। दोनों अच्छी तरह जानते थे कि कुशाग्र का अपहरण करने के बाद उनका बचना मुशिकल है फिर इतना बड़ा जोखिम क्यों लिया यह सवाल मुह उठाये खड़े है। हालाकिं पुलिस अफसरों ने कहा कि आरोपियों को रिमांड पर लेकर हत्याकांड की पूरी कहानी निकाली जायेगी। 

एक तरफ टीचर रचिता, उसका प्रेमी प्रभात और दोस्त अंकित था तो एक तरफ छात्र कुशाग्र और उसका रईसी ठाठबाट था। तीनों को पता था कि कुशाग्र के पिता बड़ा कारोबारी है इनके यहां दस बीस लाख रूपये बड़ी बात नहीं है। सीसीटीवी कैमरों देखा जा सकता है कि चार बजे कोचिंग पढ़ने निकला कुशाग्र दर्शनपुरवा के ओमनगर जब पहुंचा तो टीचर के किराये के कमरे की तरफ नहीं गया बलिक उसे प्रभात अपने घर में ले जा रहा था। करीब बीस मिनट बाद टीचर भी वहां जाती दिख रही है उसके बाद दोनों बाहर आ जाते लेकिन कुशाग्र आता नहीं दिख रहा है। तभी कुशाग्र के दोस्त अंकित की इंट्री होती है। उसके बाद कुशाग्र की स्कूटी लेकर अंकित चला जाता है। करीब पौने नौ बजे कपड़ा कारोबारी के यहां अकिंत ही फिरौती का पत्र फें कने जाता है। इस बीच स्कूटी में आगे की नम्बर प्लेट को ब्लैक कलर से पोत दिया था तो पीछे की नम्बर प्लेट में रूमाल बांध दिया था साथ ही एक अंक में छेड़छाड़ की गयी थी। 

जिस समय परिजन बेटे का फोन मिलाकर उसे खोज रहे थे उसी समय फिरौती का पत्र फेंकने अंकित पहुंचा था कुछ दूरी पर प्रभात भी खड़ा था। मुंह पर रूमाल और हेलमेट लगाये आरोपी ने गार्ड को पत्र दियालेकिन शक होने पर गार्ड राजेन्द्र ने खुद जाकर देने को कहा तो स्कूटी खड़ी करके अकित अंदर चला गया इस बीच गार्ड ने गाड़ी का नम्बर नोट लिया था जो खुलासे में काफी मददगार बना। बाकी का काम सीसीटीवी कैमरों ने कर दिया। 

कोई मेरा बेटा ला दो… जितना पैसा चाहिये ले लो.. मेरे कलेजे के टुकड़े को क्यों मार दिया… यह दर्दभरी चीख कभी सिसकियों में बदलती तो कभी आंसूओं के सैलाब के साथ बाहर आ रही थी बार बार बेटे को याद करके कुशाग्र की मां चीख पड़ रही थी कई बार बेहोश हुई, वहीं दादा संजय कनोड़िया को साथी व्यपारी और घर पहुंचे कई नेता दिलासा दे रहे थे, संजय ने कहा कि मेरे पोते को बेरहमी से मार दिया वो इतना मासूम था किसी से कुछ नहीं कहता था पैसा चाहिया था ले लेते मार क्यों दिया। कितना तड़पा होगा मेरा बच्चा.. इधर सूरत में कारोबार संभाहल रहे छात्र के पिता मनीष फ्लाइट से करीब तीन बजे कानपुर पहुंचे। डीसीपी पूर्वी उन्हें लेने एयरपोर्ट गये थे। जैसे ही शव घर पहुंचा पूरे घर में कोहराम मच गया। बेटे की लाश देखकर पिता फफक फफक कर रो पड़ा। इधर हत्याकांड से व्यपारियों में खास रोष है। हालाकिं फिरौती मांगने से पहले और पुलिस को सूचना देने से पहले हत्या किये जाने की जानकारी के बाद परिजनों का आक्रोश पुलिस को लेकर कम था। 

गुमराह करते रहे आरोपी, पुलिसिया अंदाज में कर्रवाही पर टूटे –

रायपुरवा थाने में रात एक बजे पकड़ कर लाये गये आरोपी प्रभात और टीचर रचिता ने कई बार पुलिस को गुमराह किया। पुलिस कमिश्नर ने प्रभात से पूंछा कि स्कूटी किसकी है तो पहले उसने मना किया। लेकिन जैसे ही पुलिस अफसरों ने पुलिसिया अंदाज दिखाया आरोपियों ने सच कबूल कर दिया।

उसके बाद कमिश्नर बंगले लौट गये। सुबह तक पुलिस हत्या की बात को मीडिया से छुपाती रही। पुलिस अफसरों से घटना की जनकारी के लिये फोन किये गये तो किसी ने भी फोन नहीं उठाया। जब पुलिस आयुक्त से फोन पर घटना को लेकर अपडेट मांगी गयी तो उन्होेंने बेहद लापरवाह अंदाज में कह दिया कि मीडिया सेल ने प्रेस नोट जारी कर दिया लेकिन मीडिया सेल की तरफ से घटना को लेकर कोई भी प्रेस नोट जारी नहीं किया गया था यह बात खुद मीडिया सेल  इंचार्ज ने कही।

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