बेंगलुरु। कर्नाटक विधान परिषद (MLC) की चार सीटों पर हुए चुनाव के नतीजों में सत्तारूढ़ कांग्रेस पार्टी को करारी हार का सामना करना पड़ा है। विपक्षी भारतीय जनता पार्टी (BJP) और जनता दल सेक्युलर (JDS) के एनडीए (NDA) गठबंधन ने चारों सीटों पर एकतरफा परचम फहराते हुए ‘क्लीन स्वीप’ कर दिया है। भाजपा ने जहां अपनी तीनों सीटों पर कब्जा बरकरार रखा, वहीं जेडीएस ने बेंगलुरु शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र कांग्रेस के कब्जे से छीनकर बड़ा उलटफेर कर दिया।
इन नतीजों को राज्य में भाजपा और जेडीएस के बीच बेहतरीन चुनावी तालमेल और वोट ट्रांसफर के सफल मॉडल के रूप में देखा जा रहा है। हालांकि, इन परिणामों से मुख्यमंत्री सिद्धारमैया के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार की स्थिरता पर कोई खतरा नहीं है, लेकिन विपक्षी गठबंधन को सरकार पर हमलावर होने का बड़ा सियासी हथियार मिल गया है।
बेंगलुरु शिक्षक सीट पर जेडीएस का कब्जा, कांग्रेस के पुट्टन्ना हारे
बेंगलुरु शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में भाजपा के समर्थन से चुनावी मैदान में उतरे जेडीएस उम्मीदवार एपी रंगनाथ ने कांग्रेस के निवर्तमान एमएलसी पुट्टन्ना को 908 वोटों के अंतर से हरा दिया। रंगनाथ को कुल 10,810 वोट मिले, जबकि पुट्टन्ना 9,902 मतों पर ही सिमट गए। गौरतलब है कि पुट्टन्ना ने 2023 के विधानसभा चुनाव से ठीक पहले जेडीएस छोड़कर कांग्रेस का हाथ थामा था। इस हाई-प्रोफाइल सीट पर दोनों ही प्रमुख उम्मीदवार वोक्कालिगा समुदाय से आते हैं।
मल्लिकार्जुन खरगे के गढ़ में लहराया भाजपा का परचम
भाजपा ने अपने प्रभाव वाली तीनों सीटों पर शानदार जीत हासिल की है:
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उत्तर-पूर्व शिक्षक सीट: भाजपा के निवर्तमान एमएलसी शशिल जी नामोशी ने कांग्रेस उम्मीदवार शरणप्पा मत्तूर को 3,297 वोटों के अंतर से पराजित किया। नामोशी को 15,596 और मत्तूर को 12,299 वोट मिले। इस सीट से नामोशी की यह लगातार 5वीं जीत है। यह निर्वाचन क्षेत्र कलबुर्गी (गुलबर्गा) और कल्याण कर्नाटक क्षेत्र को कवर करता है, जो कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे का गृह क्षेत्र माना जाता है।
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दक्षिण-पूर्व स्नातक सीट: भाजपा उम्मीदवार केएम सुरेश ने कांग्रेस के शशि हुलिकुंटे मठ को 23,098 वोटों के भारी अंतर से करारी शिकस्त दी।
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पश्चिम स्नातक सीट: भाजपा के निवर्तमान एमएलसी एसवी संकनूर ने कांग्रेस प्रत्याशी मोहन लिम्बिकाई को 9,323 वोटों से हराया। संकनूर को 33,711 मत मिले, जबकि लिम्बिकाई को 24,388 वोट हासिल हुए।
23 अक्तूबर को बैलेट पेपर से हुआ था मतदान
उल्लेखनीय है कि विधान परिषद की इन चार सीटों के लिए 23 अक्तूबर को मतदान हुआ था, जिसमें परंपरा के अनुसार ईवीएम (EVM) की जगह बैलेट पेपर का इस्तेमाल किया गया था। मंगलवार को बेंगलुरु और उत्तर-पूर्व शिक्षक सीट के नतीजे आ गए थे, जबकि अन्य दो स्नातक सीटों पर मतगणना देर रात तक जारी रही। इन चुनावों को भाजपा-जेडीएस गठबंधन की जमीनी एकजुटता की बड़ी परीक्षा के तौर पर देखा जा रहा था, जिसमें दोनों दल पूरी तरह खरे उतरे।
विधान परिषद का गणित: संख्या बल पर नहीं पड़ेगा बड़ा असर
75 सदस्यों वाली कर्नाटक विधान परिषद में फिलहाल कांग्रेस के 38, भाजपा के 24 और जेडीएस के 6 सदस्य हैं। इसके अलावा एक निर्दलीय सदस्य और सभापति सलीम अहमद सदन में शामिल हैं। वर्तमान में राज्य सरकार द्वारा मनोनीत की जाने वाली 5 सीटें खाली चल रही हैं। मनोनीत सीटों पर प्रक्रिया पूरी होने के बाद कांग्रेस की संख्या और बढ़ जाएगी, इसलिए इन चुनावी नतीजों से विधान परिषद में सत्ता के कुल गणित पर कोई बड़ा संकट नहीं आएगा। हालांकि, यह जीत विपक्षी गठबंधन को कांग्रेस सरकार के खिलाफ अपने राजनीतिक हमलों को धार देने का मौका जरूर देगी।


















