मोहनलालगंज (लखनऊ): उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ की मोहनलालगंज थाना पुलिस ने मानव तस्करी (Human Trafficking) करने वाले एक ऐसे अंतरराज्यीय गिरोह का भंडाफोड़ किया है, जो अनाथ और गरीब नाबालिग बच्चियों को बहला-फुसलाकर राजस्थान ले जाता था और वहां शादी के नाम पर लाखों रुपये में बेच देता था। पुलिस ने इस सनसनीखेज मामले में तत्परता दिखाते हुए दो सगी मासूम बहनों को सकुशल बरामद कर लिया है। गिरोह के चार सदस्यों को पहले ही जेल भेजा जा चुका था, जबकि शनिवार को पुलिस ने राजस्थान से संचालित इस नेटवर्क की मुख्य सूत्रधार पति-पत्नी (दंपति) को भी दबोच लिया है।
मां से मिलाने और अच्छे कपड़ों का दिया लालच, फिर गायब कर दीं दो मासूम बहनें
दिल दहला देने वाले इस मामले की शुरुआत बीते 12 मई 2026 को हुई थी। मोहनलालगंज के गनियार इलाके की रहने वाली कमलेशा नामक महिला ने पुलिस को तहरीर दी कि उनकी मृत बेटी की दो नाबालिग बेटियां (उम्र 16 वर्ष और 12 वर्ष), जो उनके पास रहती थीं, अचानक लापता हो गई हैं। नानी ने आरोप लगाया कि उनके ही एक बाल अपचारी (नाबालिग) रिश्तेदार और उसकी सहयोगी प्रिया पटेल ने बच्चियों को गायब किया है। बच्चियों के माता-पिता नहीं थे, इसी का फायदा उठाकर आरोपियों ने उन्हें मां से मिलाने, नए कपड़े दिलाने और घुमाने का लालच दिया और अपने साथ ले गए।
100 सीसीटीवी कैमरे और बंद मोबाइल; डीसीपी अमित कुमार आनंद ने ऐसे बिछाया जाल
मामला नाबालिग बच्चियों की तस्करी से जुड़ा होने के कारण डीसीपी (दक्षिणी) अमित कुमार आनंद ने तत्काल संज्ञान लेते हुए पुलिस की चार विशेष टीमों का गठन किया। बच्चियों के मोबाइल फोन बंद थे, जिससे सर्विलांस टीम के सामने बड़ी चुनौती थी। पुलिस टीमों ने मोहनलालगंज से लेकर संभावित रास्तों के करीब 100 सीसीटीवी कैमरों की फुटेज को खंगाला। कड़े तकनीकी और मानवीय प्रयासों के बाद पुलिस ने बीते 18 मई को दोनों सगी बहनों को तस्करों के चंगुल से सकुशल बरामद कर लिया।
व्हाट्सएप पर भेजी जाती थीं तस्वीरें, राजस्थान के कोटा में होता था डेढ़ से दो लाख का सौदा
बच्चियों की बरामदगी के बाद जब आरोपियों से पूछताछ हुई और कोर्ट में बयान दर्ज कराए गए, तो मानव तस्करी के एक बहुत बड़े सिंडिकेट का खुलासा हुआ। यह गैंग अनाथ, असहाय और गरीब परिवारों की सुंदर लड़कियों को टारगेट करता था। लड़कियां हाथ आते ही उनकी तस्वीरें व्हाट्सएप के जरिए राजस्थान भेजी जाती थीं। वहां से खरीदार तय होने के बाद लड़कियों को राजस्थान के कोटा क्षेत्र में ले जाकर जबरन अधेड़ उम्र के पुरुषों से शादी करा दी जाती थी। इस घिनौने काम के एवज में मुख्य आरोपी प्रिया पटेल को प्रति लड़की ₹1.5 लाख से ₹2 लाख रुपये मिलते थे। जांच में यह भी सामने आया कि इस गैंग ने रायबरेली की भी एक नाबालिग लड़की को राजस्थान में बेच दिया था, जो किसी तरह तीन दिन बाद तस्करों के चंगुल से भागकर वापस लौटी।
शादी समारोह में हुई थी मुलाकात, ऐसे शुरू हुआ लड़कियों की खरीद-फरोख्त का धंधा
पुलिस जांच में सामने आया है कि इस गिरोह की स्थानीय सरगना प्रिया पटेल की मुलाकात साल 2020 में एक शादी समारोह के दौरान राजस्थान की रहने वाली सोनम से हुई थी। सोनम ने ही प्रिया को उत्तर प्रदेश से गरीब लड़कियां लाने और राजस्थान में उनकी जबरन शादी कराकर मोटी रकम कमाने का लालच दिया था। इसके बाद प्रिया ने अपने साथ अनुराग यादव, मोहम्मद अख्तर और एक बाल अपचारी को जोड़कर नेटवर्क तैयार किया। पुलिस ने पहले ही प्रिया, अनुराग और अख्तर को जेल भेज दिया था, वहीं शनिवार को राजस्थान के कोटा से मुख्य खरीदार भूपेंद्र चौहान और उसकी पत्नी सोनम को भी गिरफ्तार कर न्यायिक कस्टडी में जेल भेज दिया गया है।
डीसीपी अमित कुमार आनंद ने बताया कि महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा लखनऊ पुलिस की सर्वोच्च प्राथमिकता है। इस सराहनीय ऑपरेशन को अंजाम देने वाली टीम में उपनिरीक्षक सौरभ सिंह, अरुण कुमार दिवाकर और महिला कांस्टेबल शीतल चौहान शामिल रहीं। गिरोह के पूरे नेटवर्क और अन्य संभावित पीड़ितों की तलाश में जांच अभी भी जारी है।












