
उत्तर प्रदेश में सीमा पार से संचालित होने वाले आतंकी नेटवर्क को ध्वस्त करने के लिए आतंकवाद निरोधी दस्ता (UP ATS) एक्शन मोड में आ गया है। पाकिस्तानी आतंकी संगठन शहजाद भट्टी नेटवर्क (SBN) से जुड़े संदिग्धों की तलाश में ATS की कई टीमों ने शुक्रवार देर रात राजधानी लखनऊ समेत प्रदेश के 10 प्रमुख जिलों में एक साथ बड़े पैमाने पर छापेमारी अभियान चलाया। इस पूरी कार्रवाई के दौरान ATS ने करीब 10 से 15 संदिग्धों को हिरासत में लिया है, जिनसे गुप्त ठिकानों पर पूछताछ की जा रही है।
सीतापुर से मेरठ तक ताबड़तोड़ दबिश: जंक्शन बने जिलों में बढ़ी हलचल
एटीएस की इस अचानक हुई कार्रवाई से संदिग्धों के नेटवर्क में हड़कंप मच गया है। अधिकारियों के मुताबिक छापेमारी की मुख्य कार्रवाई सीतापुर, बहराइच, श्रावस्ती, अलीगढ़ और मेरठ जैसे संवेदनशील जिलों में केंद्रित रही। सीमावर्ती और रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण इन इलाकों में पहले से मिले इनपुट्स के आधार पर संदिग्धों के ठिकानों की घेराबंदी की गई। हिरासत में लिए गए लोगों की भूमिका, उनके बैंक खातों और लॉजिस्टिक्स सपोर्ट को लेकर गहन जांच-पड़ताल की जा रही है।
150 से अधिक संदिग्ध रडार पर, पूछताछ से खुले कई गहरे राज
जांच एजेंसियों का मुख्य उद्देश्य पाकिस्तान से चलाए जा रहे इस सिंडिकेट की गहराई तक पहुंचकर बाकी सदस्यों का पर्दाफाश करना है। एटीएस अधिकारियों के अनुसार, हाल ही में पकड़े गए आरोपियों से लगातार की गई पूछताछ में 150 से अधिक ऐसे व्यक्तियों के नाम और संपर्क सामने आए हैं जो प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से इस नेटवर्क के संपर्क में थे। इन सभी संदिग्धों की गतिविधियों, यात्राओं और डिजिटल फुटप्रिंट्स की चौबीसों घंटे निगरानी की जा रही है।
4 महीने में 52 गिरफ्तारियां: सोशल मीडिया के जरिए रची जा रही थी साजिश
यह नेटवर्क भारतीय युवाओं का ब्रेनवॉश करने और उन्हें देश विरोधी गतिविधियों में धकेलने के लिए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स का इस्तेमाल कर रहा था। यूपी एटीएस पिछले चार महीनों के दौरान शहजाद भट्टी गिरोह से जुड़े 52 संदिग्धों को जेल की सलाखों के पीछे भेज चुकी है। जांच में सामने आया है कि टेलीग्राम, व्हाट्सएप और एन्क्रिप्टेड चैट एप्स के माध्यम से युवाओं को लालच और बरगलाने का खेल चल रहा था।
मोबाइल, चैट और डिजिटल सबूत खंगाल रही ATS
एटीएस अब छापेमारी के दायरे को और बढ़ाते हुए संदिग्धों के आवासों और संभावित छिपने के स्थानों की तलाशी ले रही है। हिरासत में लिए गए लोगों के पास से मिले मोबाइल फोन, हार्ड ड्राइव, सोशल मीडिया चैट और कॉल डिटेल्स रिकॉर्ड्स (CDR) को फोरेंसिक जांच के लिए भेजा गया है। अधिकारियों का दावा है कि जल्द ही इस नेटवर्क की बची हुई कड़ियों को जोड़कर कुछ और बड़ी गिरफ्तारियां की जा सकती हैं।












