संगठनात्मक मोर्चे को पूरी तरह दुरुस्त करने के बाद भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने अब आगामी उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 के लिए प्रत्याशी चयन की प्रक्रिया तेज कर दी है। सत्ता की राह को आसान बनाने के लिए पार्टी इस बार पूरी तरह से ‘परफॉर्मेंस और विनिंग फॉर्मूला’ पर काम कर रही है। इसके तहत मौजूदा विधायकों के कामकाज, क्षेत्र में उनकी सक्रियता, जनता के बीच स्वीकार्यता और एंटीइंकम्बेंसी (सत्ता विरोधी रुझान) का बारीकी से आकलन किया जा रहा है। जिन विधायकों के खिलाफ जनता में नाराजगी या कमजोर जनसंपर्क के संकेत मिलेंगे, उनके टिकट पर तलवार लटक सकती है। वहीं, जिन सीटों पर पिछले चुनाव में पार्टी को हार का सामना करना पड़ा था, वहां नए और जिताऊ चेहरों की तलाश शुरू कर दी गई है।
विधायकों के कार्य-व्यवहार और जनता से जुड़ाव का होगा आकलन
भाजपा का शीर्ष नेतृत्व और चुनाव प्रबंधन से जुड़े लोग जल्द ही जमीनी स्तर पर प्रत्याशियों के चयन को लेकर फीडबैक जुटाएंगे। टिकट वितरण से पहले पार्टी यह देखेगी कि संबंधित विधायक अपने क्षेत्र में सरकारी योजनाओं का लाभ पात्र लोगों तक पहुंचाने और पार्टी कार्यकर्ताओं को एकजुट रखकर साथ चलने में कितने सफल रहे हैं। यदि किसी विधायक के खिलाफ स्थानीय स्तर पर असंतोष या जनता के बीच पकड़ कमजोर होने की बात सामने आती है, तो पार्टी अन्य विकल्पों पर विचार करने से पीछे नहीं हटेगी। यह पूरी प्रक्रिया चुनावी जोखिम को कम करने और केवल जिताऊ चेहरों को मैदान में उतारने के उद्देश्य से की जा रही है।
स्थानीय संगठन से विमर्श और पैनल तैयार करने की कवायद
प्रत्याशियों के चयन में जिला और क्षेत्रीय संगठन के पदाधिकारियों की भूमिका अहम होगी। उनके साथ बैठकर संभावित दावेदारों की स्थिति, संगठन के साथ उनके तालमेल और चुनावी संभावनाओं पर मंथन किया जाएगा। इसका मुख्य मकसद केवल नामों का पैनल तैयार करना नहीं है, बल्कि यह सुनिश्चित करना है कि मैदान में उतारा जाने वाला चेहरा सीट जिताने की क्षमता रखता हो। स्थानीय संगठन का यह फीडबैक मौजूदा विधायकों के दावों और नए दावेदारों की संभावनाओं के बीच की तस्वीर को पूरी तरह साफ कर देगा।
हारी हुई सीटों पर नए और मजबूत चेहरों की तलाश
पिछले विधानसभा चुनाव में जिन सीटों पर पार्टी को हार मिली थी, वहां के लिए विशेष रणनीति बनाई जा रही है। इन सीटों पर जातीय समीकरण, सामाजिक स्वीकार्यता और स्थानीय राजनीतिक परिस्थितियों को ध्यान में रखकर मजबूत और जिताऊ चेहरों की तलाश की जा रही है। ऐसे दावेदारों को प्राथमिकता मिलने की उम्मीद है जिनकी क्षेत्र में गहरी पकड़ हो और जो स्थानीय संगठन को पूरी तरह एकजुट कर सकें।


















