NEET UG 2026 पुनर्चंद्ध जांच: EOU की पूछताछ में हुआ बड़ा खुलासा, दो दर्जन से अधिक संदिग्धों की पहचान

बिहार में NEET UG 2026 की पुनर्परीक्षा में कथित धांधली और फर्जीवाड़े के मामलों को लेकर जांच एजेंसियों का शिकंजा लगातार कसता जा रहा है। इस हाई-प्रोफाइल मामले की जांच कर रही बिहार पुलिस की आर्थिक अपराध इकाई (EOU) को पूछताछ के दौरान कई चौंकाने वाली और अहम जानकारियां हाथ लगी हैं। रिमांड पर लिए गए पावापुरी मेडिकल कॉलेज के छात्र डॉ. रविशंकर उर्फ सम्राट और उसके भाई अश्विनी कुमार से लंबी पूछताछ के बाद फर्जीवाड़े के बड़े नेटवर्क का पर्दाफाश होने की संभावना जताई जा रही है।

‘स्कॉलर’ बनकर बैठे थे मेडिकल छात्र, दो दर्जन से अधिक की पहचान

जांच एजेंसी EOU के मुताबिक, रिमांड पर पूछताछ के दौरान मुख्य आरोपी डॉ. रविशंकर ने कथित फर्जीवाड़े से जुड़े दो दर्जन से अधिक संदिग्ध लोगों की पहचान की है। इनमें करीब एक दर्जन अन्य मेडिकल छात्र भी शामिल हैं। एजेंसी का आरोप है कि इन मेडिकल छात्रों को अलग-अलग राज्यों के जाने-माने मेडिकल कॉलेजों से बुलाया गया था, जिन्हें परीक्षा केंद्रों पर असली परीक्षार्थियों (मूल अभ्यर्थियों) की जगह ‘स्कॉलर’ के रूप में बैठाया गया था। इसके अलावा इस पूरे सिंडिकेट में कुछ मूल अभ्यर्थी और बायोमीट्रिक मिलान से जुड़े कर्मचारी भी शामिल बताए जा रहे हैं। EOU अब इन सभी की भूमिका की गहराई से जांच कर रही है और जल्द ही इनकी गिरफ्तारी के लिए बड़ी कार्रवाई की तैयारी में जुटी है।

तस्वीरें दिखाकर हुई पहचान, बेऊर जेल भेजे गए आरोपी

पूछताछ के दौरान EOU की विशेष टीम ने डॉक्टर रविशंकर को कई संदिग्धों की तस्वीरें दिखाई थीं। इन तस्वीरों में असली परीक्षार्थी, स्कॉलर बने मेडिकल छात्र और बायोमीट्रिक प्रक्रिया संभालने वाले कर्मचारी शामिल थे। रविशंकर ने इन तस्वीरों को देखकर कई प्रमुख चेहरों की पहचान की है, जिसे अब पुलिस अपनी जांच का मुख्य आधार बना रही है। पूछताछ की प्रक्रिया पूरी होने के बाद डॉ. रविशंकर और उसके भाई अश्विनी कुमार को कड़ी सुरक्षा के बीच दोबारा न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है, और फिलहाल दोनों पटना की बेऊर जेल में बंद हैं।

साल 2022 से चल रहा था फर्जीवाड़े का खेल

जांच के दौरान यह भी खुलासा हुआ है कि आरोपी डॉ. रविशंकर साल 2022 से ही NEET और अन्य बड़ी प्रतियोगी परीक्षाओं में फर्जीवाड़ा करने वाले रैकेट से जुड़ा हुआ है। शुरुआती जांच में सामने आया है कि एमबीबीएस परीक्षा से जुड़े एक पुराने मामले में गिरफ्तारी से बचने के लिए उसे अदालत से राहत मिल चुकी है। इसी दौरान उस पर बायोमीट्रिक वेंडरों की मिलीभगत से बिहार पुलिस अवर सेवा आयोग की ‘हवलदार अनुदेशक’ परीक्षा में भी बड़ी गड़बड़ी करने की कोशिश करने का गंभीर आरोप है।

फ्लैट से मिले दस्तावेज और ऑनलाइन परीक्षा का अनुबंध

छापेमारी के दौरान आरोपी अश्विनी कुमार के फ्लैट से कई अभ्यर्थियों के मूल प्रमाण पत्र (Original Certificates) बरामद किए गए थे। इसके अलावा, वहां से कथित तौर पर फर्जी आय, जाति और दिव्यांगता प्रमाण पत्र से जुड़े कई महत्वपूर्ण दस्तावेज भी मिले थे। EOU की टीम ने इन दस्तावेजों और उनसे जुड़े अभ्यर्थियों के बारे में भी पूछताछ में गहरी जानकारी हासिल की है। पूछताछ में अश्विनी कुमार ने कथित तौर पर यह भी स्वीकार किया कि आगामी NEET परीक्षा को सीबीटी (Computer Based Test) यानी ऑनलाइन माध्यम से कराए जाने की संभावना को देखते हुए उसने एक ऑनलाइन सेंटर के साथ खास अनुबंध (Agreement) किया था। अब EOU इस सेंटर और इसके संचालन से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका की भी बारीकी से जांच कर रही है।

आने वाले दिनों में हो सकती है ताबड़तोड़ छापेमारी

डॉ. रविशंकर और उसके भाई से मिली पुख्ता जानकारियों के आधार पर EOU आने वाले दिनों में अपनी कार्रवाई को और तेज करने वाली है। जांच एजेंसी की विशेष टीमें फर्जीवाड़े में शामिल मूल अभ्यर्थियों, उनकी जगह परीक्षा देने वाले बाहर के मेडिकल छात्रों और संदिग्ध बायोमीट्रिक वेंडरों की धरपकड़ के लिए लगातार सुराग तलाश रही हैं। पहचान की पुष्टि होते ही राज्य और देश के अलग-अलग ठिकानों पर ताबड़तोड़ छापेमारी कर गिरफ्तारियों का सिलसिला शुरू किया जा सकता है।

 

खबरें और भी हैं...

Leave a Comment

Are you human? Please solve:Captcha