चार दशक पूर्व स्थापित दुग्ध डेयरी रखरखाव के अभाव में ध्वस्त होने की कगार पर…

ऑपरेशन फ्लड के तहत स्थापित किया गया था भवन
अमित शुक्ला 

बांगरमऊ उन्नाव। प्रादेशिक कोऑपरेटिव डेयरी फेडरेशन से  करीब चार दशक पूर्व स्थापित दुग्ध डेयरी रखरखाव के अभाव में ध्वस्त होने की कगार पर है। करीब एक हेक्टेयर भूमि पर  स्थापित इस संस्था की बेशकीमती जमीन पर भू माफियाओं की नजरें अरसे से गड़ी हुई है। ऑपरेशन फ्लड के तहत स्थापित भवन में सरकार द्वारा यदि अन्य कोई उपक्रम स्थापित ना किया गया तो क्षेत्र के दुधारू पशुपालकों के लिए श्वेत क्रांति का सपना अधूरा रह जाएगा। क्षेत्र के ग्राम भिखारीपुर रूल  निवासी प्रमुख दुग्ध उत्पादक किसान लक्ष्मण प्रसाद के अनुसार पशुपालकों की पुरजोर मांग पर वर्ष 1980 में तत्कालीन लोकप्रिय मंत्री स्वर्गीय गोपीनाथ दीक्षित ने नगर के ब्लॉक रोड पर स्थित करीब चार बीघा भूमि पर जिले स्तर का दुग्ध बॉयलर केंद्र स्थापित कराया गया था।

इस महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट के स्थापित हो जाने से क्षेत्र के हजारों पशुपालकों को दूध की बिक्री के लिए समुचित साधन मुहैया हो सका था। इस केंद्र के भवन निर्माण में उस समय करीब बीस लाख  रुपए की लागत आई थी। लेकिन करीब आधा दशक तक कार्य करने के बाद सरकारी उपेक्षा के चलते यह प्रोजेक्ट बंद कर दिया गया। तब से इसका भारी भरकम भवन सहकारिता क्षेत्र की पराग दुग्ध डेयरी के अधीन चल रहा है। मरम्मत ना हो पाने के चलते भवन की छत और दीवारें जीर्णशीर्ण स्थिति में जा पहुंची हैं ।

जबकि मौजूदा समय में भवन और उनकी भूमि की बाजारी कीमत करीब दस करोड़ रुपया है। क्षेत्र की सहकारी दुग्ध समितियों के सचिवों के अनुसार यदि को ऑपरेटिव सेक्टर की पराग दुग्ध डेयरी भवन में पराग पशु आहार और मिल्क प्रोडक्ट की फैक्ट्री स्थापित कर दी जाए तो जहां क्षेत्र के पशुपालकों को सस्ते दर पर पशु आहार मुहैया हो सकता है, वही नगर एवं क्षेत्र के आम नागरिकों को ताजा और गुणवत्तापूर्ण घी, दूध, दही, छाछ तथा दूध से निर्मित विभिन्न प्रकार के मिष्ठान आदि सर्व सुलभ हो सकते हैं। दुग्ध उत्पादक लक्ष्मण प्रसाद, नाहर सिंह, नरेश यादव, परशुराम पाल, जगत यादव व राजेश यादव आदि किसानो ने आशंका जताई है कि यदि शीघ्र ही इस भूमि पर कोई नया उपक्रम नहीं स्थापित किया जाता है तो यह कीमती जमीन अवश्य भूमाफियाओं की भेंट चढ़ जाएगी।

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