कौशाम्बी। उत्तर प्रदेश के कौशाम्बी जिले में गुरुवार रात आए भीषण आंधी-तूफान और मूसलाधार बारिश ने भारी तबाही मचाई है। कुदरत के इस कहर ने एक हंसते-खेलते परिवार को पल भर में उजाड़ दिया। जिले के अलग-अलग इलाकों में आंधी-पानी के कारण भारी नुकसान हुआ है, लेकिन सबसे दिल दहला देने वाला हादसा पश्चिम शरीरा थाना क्षेत्र में सामने आया है। यहां तेज रफ्तार चक्रवाती हवाओं के कारण एक कच्चे मकान पर विशालकाय नीम का पेड़ भरभराकर गिर गया। इस दर्दनाक हादसे में घर के अंदर सो रही मां और उसके दो मासूम बच्चों की मलबे में दबकर मौके पर ही मौत हो गई, जबकि एक अन्य बच्चा गंभीर रूप से घायल है। इस घटना के बाद से पूरे इलाके में कोहराम मचा हुआ है।
गहरी नींद में सो रहा था परिवार, आंधी के झोंके ने ढाया नीम का पेड़
दिल को झकझोर देने वाली यह घटना पश्चिम शरीरा थाना क्षेत्र के एक गांव की है। बताया जा रहा है कि गुरुवार रात अचानक मौसम का मिजाज बदला और धूल भरी तेज आंधी के साथ मूसलाधार बारिश शुरू हो गई। इस दौरान 26 वर्षीय माया देवी अपने तीन मासूम बच्चों के साथ घर के अंदर सो रही थीं। तभी अचानक आंधी के एक तेज झोंके ने घर के पास खड़े एक बेहद पुराने और विशालकाय नीम के पेड़ को जड़ से उखाड़ दिया। पेड़ सीधे माया देवी के कच्चे मकान पर जा गिरा। पेड़ का वजन इतना ज्यादा था कि कच्चा मकान ताश के पत्तों की तरह ढह गया और पूरा परिवार मलबे के नीचे दफन हो गया।
चीख-पुकार सुनकर दौड़े ग्रामीण, जब तक हटाया मलबा तब तक थम चुकी थीं सांसें
मकान गिरने की जोरदार आवाज और मलबे के नीचे से आ रही चीख-पुकार सुनकर आसपास के ग्रामीण सहम गए। भारी बारिश और कड़कती बिजली के बीच ग्रामीण तुरंत लाठी-डंडे और फावड़े लेकर मौके पर दौड़े और राहत कार्य शुरू किया। ग्रामीणों ने इस भयानक हादसे की सूचना तुरंत स्थानीय पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों को दी। जब तक ग्रामीणों और रेस्क्यू टीम ने भारी-भरकम पेड़ और मलबे को हटाकर नीचे दबे लोगों को बाहर निकाला, तब तक बहुत देर हो चुकी थी। मलबे से 26 वर्षीय मां माया देवी, उनके 3 साल के बेटे अनुभव और 5 साल की बेटी श्वेता के शव बाहर निकले। इन तीनों मासूम जिंदगियों की मौके पर ही दम घुटने और चोट लगने से मौत हो चुकी थी।
अस्पताल में जिंदगी की जंग लड़ रहा 7 साल का मासूम, रो-रोकर बेहाल हुआ पिता
इस खौफनाक हादसे में माया देवी का 7 साल का बड़ा बेटा अंकुश मलबे के नीचे दबा होने के कारण गंभीर रूप से जख्मी हो गया। उसे तुरंत एम्बुलेंस की मदद से नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां डॉक्टरों की देखरेख में उसका इलाज चल रहा है और उसकी हालत नाजुक बनी हुई है। इस पूरी घटना का सबसे दुखद पहलू यह रहा कि मृतका के पति मंगर सरोज हादसे के वक्त घर पर मौजूद नहीं थे। वे रोजी-रोटी कमाने के लिए एक ईंट-भट्ठे पर काम करने गए हुए थे। जैसे ही उन्हें गांव वालों से फोन पर इस कयामत की सूचना मिली, वे बदहवास हालत में घर पहुंचे। पत्नी और दो बच्चों के शवों को देखकर मंगर सरोज फूट-फूटकर रो पड़े, उन्हें संभालना मुश्किल हो रहा है।
प्रशासन ने शुरू किया राहत कार्य, पूरे गांव में पसरा सन्नाटा
सूचना मिलते ही पुलिस और तहसील प्रशासन की टीम मौके पर पहुंच गई। पुलिस ने तीनों शवों को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। प्रशासनिक अधिकारियों ने पीड़ित परिवार को ढांढस बंधाया और दैवीय आपदा कोष के तहत सरकारी सहायता और मुआवजा दिलाने का आश्वासन दिया है। गुरुवार रात आई इस आसमानी आफत ने पूरे गांव को गहरे सदमे में डाल दिया है। गांव के हर शख्स की आंखें नम हैं और पीड़ित मंगर सरोज के घर पर ढांढस बंधाने वालों का तांता लगा हुआ है।








