माँ-बाप ही बचा सकते हैं नोनिहालों को कोरोना की तीसरी लहर के कहर से : डॉ. सुरेंद्र आनंद

फ़ोटो:डॉ सुरेंद्र


गाजियाबाद । कोविड-19 की गिरफ्त में अब देश के नौनिहाल भी आने लगे है। दिल्ली व उत्तराखण्ड समेत देश के कई हिस्सों में बच्चों में कोरोना के लक्षण मिल चुके हैं। जिसको लेकर सरकार से लेकर स्वास्थ्य विभाग तक चिंतित नजर आ रहे हैं। विशेषज्ञों की माने तो कोरोना की तीसरी लहर में बच्चे और महिलाएं ज्यादा प्रभावित होंगे। तीसरी लहर की तैयारी के लिए जहां सरकार ने अपने तरीके से तैयारी शुरू कर दी है वहीं अब अभिभावकों को भी अपने नौनिहालों का जीवन बचाने के लिए और ज्यादा सक्रिय होना होगा । तीसरी लहर के जोर पकड़ने की स्थिति में क्या करना होगा? इसको लेकर जिला महिला चिकित्सालय के बाल रोग विशेषज्ञ डॉ सुरेंद्र आनंद से बात की गयी। उनका कहना है कि कोरोना की तीसरी लहर में बच्चों का प्रभावित होना सबसे ज्यादा संभावित है । ऐसे में बापू -मां बाप की जिम्मेदारी बढ़ जाती है कि वह अपने नौनिहालों को बीमार होने से बचाए है। इसके लिए उन्हें खुद भी कुछ बातों पर अमल करना होगा ।


डॉ. सुरेंद्र आनंद कहते हैं कि पहली दो लहरों में कोरोना ने देश में जिस तरह कहर बरपाया है उस जैसी स्थिति से निपटने के लिए हम सबको विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा बताए गए उपायों पर शत प्रतिशत अमल करना होगा। सबसे खास बात यह है कि तीसरी लहर में बच्चों को हमें किसी भी तरह कोरोना से बचाना है। केवल और केवल बचाव ही इसका सबसे कारगर इलाज है । यदि हम पहले ही विश्व स्वास्थ संगठन के बताए हुए कोराना नियमों पर अमल करेंगे तो हम ना केवल खुद बल्कि अपने नौनिहालों को भी कोरोना जैसे महामारी से सुरक्षित बचा सकते हैं ।


सुरेंद्र आनंद ने कहा कि बच्चे कभी भी घर से नहीं जाते बाहर नहीं जाते जबकि उनके माता-पिता व परिवार के अन्य लोग बाहर आते जाते हैं । यानि बच्चे तो इस बीमारी को बाहर से लाएंगे नहीं मगर इतना जरूर है कि यदि मां -बाप या परिवार के अन्य सदस्यों ने सावधानी नहीं बरती तो निश्चित तौर पर वह अपने घर में कोरोना जैसी बीमारी को लाएंगे। जिसका शिकार उनके लखते जिगर हो सकते हैं । ऐसे में अभिभावकों व परिवार के अन्य सदस्यों की जिम्मेदारी बनती है कि वह किसी भी सूरत में बीमारी को घर ना लाएं और बचाव के लिए कोरोना नियमों का शत प्रतिशत अमल करें । बिना मास्क के घर से ना निकले, सोशल डिस्टेंसिंग का पूरा पालन करें और घर आने पर साबुन से अच्छी तरह हाथों को जरूर धोएं।


सुरेंद्र आनंद कहते हैं कि यदि इसके बाद भी किसी बच्चे को कोरोना के लक्षण दिखाई दे तो बिना किसी देरी के तत्काल उसे चिकित्सा के चिकित्सक के पास ले जाएं। बच्चों को बुखार,बदन दर्द ,गले में खराश, गीली या सूखी खांसी ,डायरिया, उल्टी दस्त,पेट में दर्द कोरोना के लक्षण हो सकते हैं। साथ ही बच्चों को झटके लगना या बेहोश होना भी इसका एक लक्षण हो सकता है। यदि बच्चे में इस तरह का कोई लक्षण दिखाई दे तो तत्काल चिकित्सक के पास उसको ले जाना है। चिकित्सक उसके स्वास्थ्य जांच करके यह तय करेगा के कोरोना परीक्षण कराना है या नहीं । डॉ सुरेंद्र को सलाह है कि महामारी के इस दौर में घर में हमेशा कुछ दवाइयों कर रखना जरूरी है ताकि समय पड़ने पर उनका इस्तेमाल किया जा सके। इसमें बच्चों के लिहाज से पेरासिटामोल सिरप,मल्टीविटामिंस की गोलियां रखी जानी चाहिए । साथ ही बच्चों को ज्यादा से ज्यादा नॉर्मल पानी पिलाया जाना चाहिए। हाई प्रोटीन व सन्तुलित डाइट बच्चों को खिलाएं ।उनका कहना है कि हमें इस बीमारी से बचने के लिए खुद भी और बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बेहतर बनाए रखना है तभी हम खुद और बच्चों को अपने बच्चों को इस जानलेवा बीमारी से बचा सकते हैं।

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