हिन्द प्रशांत में स्थिरता व संतुन का आधार है क्वाड


डॉ. सुरेन्द्र कुमार मिश्र

सामयिक व सामरिक दृष्टि से अत्यन्त महत्वपूण्र हिन्द प्रशांत क्षेत्र में आस्ट्रेलिया भारत, जापान और अमेरिका का अनौपचारिक ‘क्वाडÓ (चतुर्भुज सुरक्षा ढांचा) समूह समकालीन समय में उपजे ‘बेहद महत्वपूर्ण अंतरÓ को पाटता है। वास्तव में क्वाड का लक्ष्य हिन्द प्रशांत क्षेत्र में चीन को आक्रामक गतिविधियों के बीच सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण क्षेत्र में निचयम आधारित व्यवस्था को मजबूत बनाना है। भारत ने इसकी सदस्यता लेकर अपनी स्पष्ट सेाच रखता है। यह सर्वविदित है कि समकालीन समय में जहां क्षेत्रीय एवं वैश्विक जरूरतें हैं, जिन्हें एक देश के द्वारा पूरा नहीं किया जा सकता है, वहां इस ओर उभरी एक बेहद महत्वपूर्ण दूरी को आज कम करने का प्रयास क्वाड कर रहा है। यह भी समझना जरूरी है कि हिन्द-प्रशांत क्षेत्र में उभरे अंतर को किसी एक द्विपक्षीय संबंधों द्वारा भी दूर नहीं किय ाजा सकता और न ही इसका बहुपक्षीय स्तर पर भी इसका समाधान किया जाना संभव हो सकता है। भारतीय विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा कि हम क्वाड के सदस्य हैं। हम जब किसी भी संगठन या समूह के सदस्य होते हैं, तो हम उसे लेकर बहुत उत्सुक होते हैं नहीं तो हम उसकी सदस्यता ही नहीं स्वीकार करते। क्वाड हिन्द-प्रशांत क्षेत्र में स्थिरता लाने व संतुलन स्थापित करने में एक महत्वपूर्ण भूमिका अदा करेगा।

वास्तव में क्वाड (क्वाड्रिलेटरल सिक्योरिटी डायलॉग) अर्थात् चतुर्भुज सुरक्षा संवाद की परिकल्पना सर्वप्रथम वर्ष 2004 में सुनामी आपदा के बाद खुलकर सामने आई थी। वर्ष 2007 में जापान द्वारा इस परिकल्पना का आधार स्थापित करने की पहल की गई। भारत जैसे देश चीन के विरुद्ध खुलकर सामने आने से भय, संकोच एवं अनिश्चतता का अनुभव कर रहे थे क्योंकि चीन के कोप व कुचक्र का शिकार न बनना पड़े। क्वाड देशों में जापान, आस्ट्रेलिया, अमेरिका तथा भारत ने मिलकर अपनी एक व्यापक रणनीति को अमलीजामा पहुंचाने का एक बड़ा काम किया।

वर्ष 2019 में पहली बार क्वाड देशों केविदेश मंत्रियों की एक संयुक्त बैठक आयोजित की गई। यह कटु सच्चाई यह है कि हिन्द-प्रशांत का ताना-बाना एक वृहद समसामयिक दुनिया कको प्रदर्शित करता है। यह संगठन यह भी दर्शाता है कि अब दुनिया शीतयुद्ध की स्थिति से पूरी तरह बाहर आ गई है। क्वाड पूर्व में भी और अभी की हाल के वर्षों में नौवहन सुरक्षा एवं सम्पर्क कर संवाद करता रहता है। इस संगठन में हाल ही में अपनी प्रोद्योगिकी, आपूर्ति श्रृंखला और कोविड-19 वायरस के विरुद्ध वैकसीन उत्पादन के मुद्दों पर भी अब परिचर्चा शुरू कर दी गई है। इसके अलावा नौवहन सुरक्षा को भल लेकर कुछ मामले खुलकर सामने आये हैं। विदेश मंत्री एस जयशंकर ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि इसमें बहुत चिंताएं है जिन्हें किसी न किसी को देखना होगा। देशों के समूह मिलकर साझा हितों एवं अिस्थतियों को लेकर चर्चा करें तो अधिकांश मुद्दों को लेकर संतुलित तथा समन्वित स्थिति स्थापित की जा सकती है। संक्षेप में हम कह सकते है कि क्वाड अनेक देशों के हितों के सम्मिलन की अभिव्यक्त् िहै। यह कई अर्यों में संसार की समकालीन प्रकृति का प्रतिबिंब है, जहां यह एक समुच्चय नहीं है। अब शीत युद्ध कोविराम देने का समय आ गया है। सिर्फ वे लोग जो अभी भी शीत युद्ध में उलझे हुए हैं व क्वाड को सही अर्थों में समझ नहीं सकते ।

चीन हिन्द प्रशांत क्षेत्र और अपने चारों तरफ भी अपनी सैन्य शक्ति का निरंतर रौब जमाता रहता है। यह भी विशेष रूप से उल्लेखनीय है कि दक्षिण चीन सागर व पूर्वी चीन सागर दोनों इलाकों में उसक बनेक देशों के साथ क्षेत्रीय विवाद बने हुए हैं। चीन दक्षिण चीन सागर के लगभग सम्पणर््ूा 13 लाख  वर्ग मील क्षेत्र को अपना संप्रभु क्षेत्र बताते हुए उस पर अपना दावा करता हे। चीन के इस क्षेत्र के अनेक द्वीपों और चट्टानों पर सैनय ठिकाने बनाकर इनका सैन्यीकरण कर लिया है।

यूरोपी संघ परिषद (ई.यू.सी.) के अध्यक्ष चाल्र्स मिशेल ने बताया कि कई अर्थों में भविष्य की वैश्विक व्यवस्था का रास्ता हिन्द प्रशांत क्षेत्र में तय होगा क्योंकि यह वैश्विक आर्थिक एवं राजनीति का एक बड़ा केन्द्र बन गया है। मिशेल ने कहा कि भारत के साथ यूरोपीय संघा का गठजोड़ क्षेत्र की भू-राजनीतिक रणनीति का मील का पत्थर है और वह इन संबंधों को और अधिक प्रगतिशील बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंन यह भी स्पष्ट किया कि अनेक अर्थों में भविष्य की वैश्विक व्यवस्था का रास्ता हिन्द-प्रशांत क्षेत्र में तय होगा। यह क्षेत्र वैश्विक आर्थिक एवं राजनीति का केन्द्र बन गया है और यूरोपीय संघ इससे व्यापार, निवेश और आवागमन के माध्यम से बड़ी निकटता के साथ जुड़ा हुआ है। यह हमारे साझा हित में है कि दुनिया की चुनौतियों से निपटने में लोकतांत्रिक एवं मुक्त् मॉडल सबसे अधिक शक्तिशाली है। इसके साथ ही महत्वपूर्ण भू-राजनीतिक घटनाक्रम का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि यूरोपीय संघ की विशेष रूप से हिन्द-प्रशांत क्षेत्र में स्वतंत्रता, खुलेपन और स्थिरता को लेकर एक बड़ी हिस्सोदारी है और यह क्षेत्र के लिए रणनीतिक रूख अपनाने की ओर अग्रसर होता जा रहा है।

फ्रांस के विदेश मंत्री जे वाई एल द्रां और आस्ट्रेलिया के विदेश मंत्री मैरिक पेन ने हिन्द प्रशांत के संदर्भ में डिजिटल वार्ता में भाग लिया। इसमें हिन्द-प्रशांत क्षेत्र में सहयोग तथा कोरोना वायरस के प्रतिकूल प्रभावों से निपटने के लिए चर्चा हुई। भारत और आस्ट्रेलिया ििहन्द प्रशांत क्षेत्र में चतुर्भुज क्वाड का हिस्सा हे। इसमें अमेरिका व जापान भी शामिल है। मेरिस पेन ने कोरोना महमारी के विरुद्ध प्रतिक्रिया और सुधार के प्रयासों के संदर्भ में चर्चा की। उन्होंने कहा कि हिन्द प्रशांत क्षेत्र में विकासशील देश इस महामारी के मद्देनजर अर्थिक मोर्चे सहित अन्य अनेक चुनौतियों का सामना कर रहे हैं। इसके साथ ही नियम आधारित वैश्विक व्यवस्था, समुद्री क्षेत्र में टिकाऊ व्यवस्था, जलवायु परिवर्तन, समसामयिक तथा सामरिक प्रतिस्पर्धा जैसे विषयों की मीमान्सा की। फ्रांस के विदेश मंत्री जेवाई एल द्रां ने हिन्द प्रशांत क्षेत्र में तीनों देशों के बीच निकटतम व प्रगाढ़ सहयोग स्थापित करने के लिए विशेष रूप से व्यवहारिक दृष्टिकोण अपनाने की महती आवश्यकता है।

अमेरिका के रक्षा मंत्री लॉयड ऑस्टिन ने कहा कि चीन वर्तमान में और भविष्य में अमेकिरा के लिए चुनौती बना रहेगा। उन्होंने कहा कि बाइडन प्रशासन ने चीन कार्यबल  स्थापित किया है जो अपना कार्य लगभग पूरा करने वाला है और वह इस पनर अपने प्रयासों को लेकर अवगत कराएगा ताकि तालमेल स्थापित करने, दोहराव कोख् ात्म करने और ीचन की चुनौती पर अधिक कुशलता से ध्यान केन्द्रित करने में मदद मिलेगी। उन्होंने बताया कि इस समय चीन का कोई सहयोगी नहीं जबकि हमारे पास दुनियाभ्र में अनेक सहयोगी हैं। यह स्थिति हमे अधिक क्षमतावान और सामर्थवान बनाती है। अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन के इण्डो पैसिफिक पॉलिसी के कोऑर्डिनेटर कर्अ कैंपबेल ने कहा कि एक अवधि जिसे मुख्य तौर पर इंगेजमेंट के रूप में वर्णित किया गया था अब समाप्त हो गई है। विज्ञान व प्रोद्योगिकी नीति संबंधी मुख्य अमेरिकी थिंक टैंक का कहना है कि अमेरिका उभरते चीन को रोकना चाहता है और ऐसी स्थिति में उसके लिए भारत से महत्वपूर्ण कोई अन्य देश नहीं है।

अन्तत: यह समझना जरूरी है कि क्वाड कोई एशियाई नाटो नहीं है यही इसकी सबसे बड़ी शक्ति, सामथ्र्य, स्थिरता व संतुलन का आधार है। हिन्द प्रशांत क्षेत्र में अपने आक्रामक गतिविधियों के विरुद्ध चीन को एक स्पष्ट संदेश क्वाड द्वारा दिया जाना एक सामयिक व सामरिक आवश्यकता हैद्ध
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