पुरानी दिल्ली के कायाकल्प का रोडमैप तैयार, चांदनी चौक से शुरू होगा पुनर्विकास

 

 

  • शाहजहानाबाद रिडेवलपमेंट कॉरपोरेशन का नाम बदलकर ‘इंद्रप्रस्थ विरासत पुनर्विकास निगम’ किया गया, टाउन हॉल, जामा मस्जिद और यमुना बाजार क्षेत्र के विकास का भी खाका तैयार होगा।
New Delhi : दिल्ली सरकार ने पुरानी दिल्ली की ऐतिहासिक पहचान को संजोते हुए उसे आधुनिक सुविधाओं से जोड़ने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। सरकार ने शाहजहानाबाद रिडेवलपमेंट कॉरपोरेशन का नाम बदलकर इंद्रप्रस्थ विरासत पुनर्विकास निगम (आईवीपीएन) कर दिया है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता की अध्यक्षता में हुई निगम की वार्षिक बैठक में पुरानी दिल्ली के पुनर्विकास से जुड़े कई अहम फैसलों पर मुहर लगी।

बैठक में सबसे ज्यादा फोकस ऐतिहासिक चांदनी चौक पर रहा। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि बाजार का विकास इस तरह किया जाए कि उसकी पुरानी पहचान, सांस्कृतिक विरासत और ऐतिहासिक स्वरूप बरकरार रहे। साथ ही यहां आने वाले लाखों लोगों को बेहतर सुविधाएं मिलें। इसके लिए आधुनिक सार्वजनिक शौचालय, बेहतर पार्किंग व्यवस्था और पर्यटकों की मदद के लिए एक समर्पित कंट्रोल रूम बनाने की योजना तैयार करने के निर्देश दिए गए।

मुख्यमंत्री ने ऐतिहासिक टाउन हॉल के पुनर्विकास की भी समीक्षा की और निर्देश दिए कि इसका एक प्रमुख प्रवेश और निकास चांदनी चौक की ओर से विकसित किया जाए, ताकि यह इमारत एक प्रमुख पर्यटन केंद्र के रूप में उभर सके। उन्होंने कहा कि चांदनी चौक की पहचान यहां के व्यापार और बाजारों से जुड़ी रही है, इसलिए विकास योजनाओं में स्थानीय व्यापारियों और दुकानदारों के हितों का पूरा ध्यान रखा जाएगा।

बैठक में यमुना बाजार स्थित हनुमान मंदिर और उसके आसपास के क्षेत्र के समग्र विकास का ब्लूप्रिंट तैयार करने के निर्देश भी दिए गए। इसके अलावा जामा मस्जिद क्षेत्र और पुरानी दिल्ली रेलवे स्टेशन के सामने स्थित श्यामा प्रसाद मुखर्जी मार्ग के सौंदर्यीकरण और पुनर्विकास की कार्ययोजना तैयार करने का फैसला लिया गया।

सरकार का कहना है कि पुरानी दिल्ली का विकास केवल सड़कों, भवनों और सुविधाओं तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि विरासत संरक्षण, पर्यटन, यातायात प्रबंधन, ठोस अपशिष्ट प्रबंधन और पर्यावरणीय संतुलन को भी साथ लेकर आगे बढ़ाया जाएगा। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि दिल्ली की ऐतिहासिक धरोहर आने वाली पीढ़ियों की अमानत है और विकास ऐसा होना चाहिए, जिससे इसकी पहचान और खूबसूरती सुरक्षित रहे।

शहरी विकास मंत्री आशीष सूद ने कहा कि पुनर्विकास योजनाओं को तैयार करने में इतिहासकारों, विरासत संरक्षण विशेषज्ञों और स्थापत्य विशेषज्ञों की राय ली जाएगी, ताकि पुरानी दिल्ली का मूल स्वरूप कायम रखते हुए आधुनिक सुविधाएं विकसित की जा सकें।

अधिकारियों के मुताबिक, करीब 7.12 वर्ग किलोमीटर में फैली 350 वर्ष से अधिक पुरानी दिल्ली में एक विश्व धरोहर स्थल, 10 राष्ट्रीय संरक्षित स्मारक, 10 राज्य संरक्षित स्मारक और 700 से अधिक स्थानीय विरासत स्थल मौजूद हैं। हर दिन यहां लाखों लोग व्यापार, खरीदारी और पर्यटन के लिए पहुंचते हैं। ऐसे में सरकार का मानना है कि सुनियोजित पुनर्विकास से न केवल विरासत सुरक्षित रहेगी, बल्कि व्यापार और पर्यटन को भी नई रफ्तार मिलेगी।

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