नई दिल्ली। पितृपक्ष के समापन के साथ ही सनातन धर्म में मां शक्ति की उपासना का सबसे पावन पर्व ‘शारदीय नवरात्रि’ शुरू होने जा रहा है। हर वर्ष आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से नवरात्रि की शुरुआत होती है। इस वर्ष नवरात्रि की सही तारीख को लेकर श्रद्धालुओं के बीच बनी असमंजस की स्थिति को पंचांग एवं ज्योतिषियों ने दूर कर दिया है। यद्यपि प्रतिपदा तिथि 10 अक्टूबर की रात से लग रही है, लेकिन शास्त्र सम्मत उदया तिथि के नियमानुसार इस बार पहला नवरात्र 11 अक्टूबर को मनाया जाएगा।
पंचांगीय गणना के अनुसार, आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि 10 अक्टूबर को रात 9 बजकर 19 मिनट पर प्रारंभ होगी और 11 अक्टूबर की रात 9 बजकर 30 मिनट तक रहेगी। सूर्योदयकालीन उदया तिथि को मान्यता दिए जाने के कारण 11 अक्टूबर को ही पहला नवरात्र माना जाएगा और इसी दिन विधि-विधान से कलश (घट) स्थापना की जाएगी।
11 अक्टूबर को कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त और अभिजीत काल
नवरात्रि के प्रथम दिन पूजा स्थल पर कलश स्थापना का विशेष महत्व होता है। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, 11 अक्टूबर को घटस्थापना के लिए सुबह का समय अत्यंत फलदायी रहेगा:
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प्रातःकाल शुभ मुहूर्त: सुबह 06:32 बजे से 10:26 बजे तक।
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अभिजीत मुहूर्त (वैकल्पिक): जो श्रद्धालु सुबह के मुहूर्त में घटस्थापना न कर पाएं, वे दोपहर 12:02 बजे से 12:48 बजे के बीच अभिजीत मुहूर्त में कलश स्थापित कर सकते हैं।
नौ दिनों की तिथियां और किस दिन होगी किस देवी की पूजा?
इस बार शारदीय नवरात्रि में तिथियों के योग के कारण एक विशेष स्थिति बन रही है, जहां सप्तमी तिथि दो दिन रहेगी तथा अष्टमी और नवमी पूजन एक ही दिन संपन्न होगा:
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11 अक्टूबर (पहला नवरात्र): मां शैलपुत्री पूजन व घटस्थापना
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12 अक्टूबर (दूसरा नवरात्र): मां ब्रह्मचारिणी पूजन
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13 अक्टूबर (तीसरा नवरात्र): मां चंद्रघंटा पूजन
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14 अक्टूबर (चौथा नवरात्र): मां कूष्मांडा पूजन
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15 अक्टूबर (पांचवां नवरात्र): मां स्कंदमाता पूजन
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16 अक्टूबर (छठा नवरात्र): मां कात्यायनी पूजन
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17 एवं 18 अक्टूबर (सातवां नवरात्र): मां कालरात्रि पूजन (सप्तमी तिथि का विस्तार दो दिन)
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19 अक्टूबर (अष्टमी व नवमी तिथि): मां महागौरी व मां सिद्धिदात्री पूजन, कन्या पूजन तथा व्रत का पारण
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20 अक्टूबर: विजयादशमी (दशहरा) पर्व
हाथी पर सवार होकर आएंगी मां दुर्गा, देश में बढ़ेगी सुख-समृद्धि
धार्मिक मान्यताओं और ज्योतिषीय गणना के अनुसार, नवरात्रि का पहला दिन रविवार होने के कारण इस बार मां दुर्गा का वाहन हाथी (गज) रहेगा। शास्त्रों में जगदम्बा का हाथी पर सवार होकर आगमन अत्यंत शुभ और मंगलकारी माना जाता है। ज्योतिषाचार्य प्रवीण मिश्र के अनुसार, देवी का गज पर आगमन प्रचुर वर्षा, धन-धान्य की वृद्धि, सुख, समृद्धि और वैश्विक शांति का प्रतीक है।



















