रोज एक पैर से 2 KM चलकर स्कूल जाता है ये लड़का, रुला देगी 14 साल के परवेज की कहानी

ऐसा सच कहा जाता है कि जब आपके हौसले बुलंद हों, तो कामयाबी पाने से कोई भी आपको रोक नहीं सकता है। अक्सर देखा गया है कि लोग अपने जीवन में कुछ कर दिखाने का हर संभव प्रयास करते हैं परंतु वह अपने जीवन की विपरीत परिस्थितियों के आगे हार मान जाते हैं। वहीं कुछ लोग ऐसे होते हैं, जो अपने जीवन में आने वाले सभी परिस्थितियों का डटकर मुकाबला करते रहते हैं, जिसका नतीजा यह होता है कि उन्हें अपनी मंजिल आखिर में मिल ही जाती है।

वैसे मंजिल आपसे ज्यादा दूर नहीं और किस्मत बहुत दिनों तक रूठी नहीं रह सकती। चाहे हालात कैसे भी हों, आप विपरीत परिस्थितियों में भी निखरते हैं। आज हम आपको एक ऐसे विकलांग छात्र के बारे में बताने वाले हैं, जिसका एक पैर नहीं हैं, लेकिन वह हर दिन 2 किलोमीटर पैदल चलकर स्कूल पढ़ाई करने के लिए जाता है। न्यूज़ एजेंसी एएनआई ने इस लड़के का दिल दहला देने वाला वीडियो शेयर किया है।

इस वीडियो में देखा जा सकता है कि लड़का अपने गांव की जर्जर सड़क की स्थिति के बावजूद एक पैर पर स्कूल जाता है। लड़के के इस वीडियो ने सोशल मीडिया का ध्यान अपनी तरफ खींचा है। इस वीडियो में सफेद शर्ट और नीले रंग की पैंट पहने वह कन्धों पर बैग लटकाए स्कूल जा रहा है। इस लड़के का जज्बा वीडियो को खास बनाता है।

एक पैर पर रोजाना स्कूल जाते हैं परवेज

दरअसल, आज हम आपके जिस लड़के के बारे में बता रहे हैं वह जम्मू के हंदवाड़ा जिले के परवेज अहमद हाजम हैं। नौगाम मावर गांव के निवासी परवेज अपनी विकलांगता के बावजूद अपने सपनों को पूरा करने के लिए कुछ भी कर गुजरने को तैयार हैं। परवेज की उम्र 14 साल की है और यह रोजाना 2 किलोमीटर दूर एक पैर से स्कूल पढ़ाई करने के लिए जाते हैं। परवेज रोजाना एक पैर पर संतुलन बनाकर स्कूल जाने के लिए 2 किलोमीटर से ज्यादा की दूरी तय करते हैं।

दुर्घटना के दौरान कम उम्र में गंवा दिया पैर

आपको बता दें कि परवेज जन्म से विकलांग नहीं हैं, बल्कि एक दुर्घटना के दौरान कम उम्र में उन्होंने अपने बाएं पैर गंवा दिए, लेकिन कुछ कर गुजरने की चाह नहीं गंवाई। परवेज वर्तमान में सरकारी माध्यमिक विद्यालय नौगाम में नौवीं कक्षा में पढ़ाई कर रहे हैं। ऐसा बताया जा रहा है कि जब परवेज की उम्र 2 वर्ष की थी, तब एक भीषण आग के हादसे में के बाद उन्होंने अपना एक पैर हमेशा के लिए खो दिया। हालांकि, सरकार ने उन्हें व्हीलचेयर प्रदान की है। लेकिन दुर्भाग्य यह है कि उनके गांव की सड़कें इतनी खराब है कि वह उस व्हीलचेयर का उपयोग नहीं कर सकते हैं।

परवेज ने बताया “मैं अपने स्कूल तक पहुंचने के लिए प्रतिदिन 2 किलोमीटर पैदल चलता हूं। मेरे स्कूल पहुंचने का रास्ता क्षतिग्रस्त है। स्कूल पहुंचने के बाद मुझे बहुत पसीना आता है क्योंकि मेरे लिए चलना मुश्किल है। मैं स्कूल पहुंचने के बाद प्रार्थना करता हूँ। मुझे क्रिकेट, वॉलीबॉल और कबड्डी पसंद है। मुझे उम्मीद है कि सरकार मेरे भविष्य को आकार देने में मेरी मदद करेगी। मेरे अंदर अपने सपनों को हासिल करने का जूनून है।”

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