UP विजिलेंस का महा-एक्शन: रिटायर्ड ARTO ललित कुमार के घर कुबेर का खजाना, 1.62 करोड़ कैश और 22 किलो सोना बरामद, कुल 35 करोड़ की काली कमाई

लखनऊ: उत्तर प्रदेश में भ्रष्टाचार के खिलाफ चल रहे जीरो टॉलरेंस अभियान के तहत विजिलेंस टीम ने एक बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया है। आय से अधिक संपत्ति के मामले में सेवानिवृत्त सहायक संभागीय परिवहन अधिकारी (ARTO) ललित कुमार के लखनऊ के वीआईपी इलाके अलीगंज स्थित चंद्रलोक कॉलोनी आवास पर विजिलेंस ने तड़के तक छापेमारी की। इस छापेमारी में जो काली कमाई का खुलासा हुआ है, उसने जांच अधिकारियों के भी होश उड़ा दिए हैं। ललित कुमार के घर से नोटों की गड्डियों के साथ-साथ सोने-चांदी की ईंटें और अकूत बेनामी संपत्तियों के दस्तावेज बरामद हुए हैं।

तिजोरियों में भरा था 22 किलो सोना, 35 करोड़ की संपत्ति का आकलन

आईजी विजिलेंस मंजिल सैनी ने बताया कि अदालत से सर्च वारंट लेने के बाद मंगलवार को भारी पुलिस बल की मौजूदगी में यह छानबीन शुरू की गई थी, जो बुधवार सुबह जाकर पूरी हुई। ललित कुमार के आलीशान बंगले में ज्वैलर्स द्वारा इस्तेमाल की जाने वाली दो बड़ी-बड़ी तिजोरियां और कई गुप्त लॉकर मिले।

विजिलेंस की इस छापेमारी में अब तक निम्नलिखित बरामदगी हुई है:

  • पैकेटों में छिपाकर रखे गए 1.62 करोड़ रुपये नगद (कैश)।

  • करीब 20 करोड़ रुपये मूल्य के 22 किलो सोने-चांदी के बिस्कुट और कीमती आभूषण।

  • लखनऊ, नोएडा और बाराबंकी में 13 करोड़ रुपये से अधिक की अचल संपत्तियों के मूल दस्तावेज।

  • विभिन्न बैंकों, पोस्ट ऑफिस, फिक्स डिपॉजिट और म्यूचुअल फंड में 1 करोड़ रुपये से अधिक के निवेश के साक्ष्य।

  • इसके अलावा घर से एक टोयोटा इनोवा, एक हुंडई आई-20 कार और एक प्रतिबंधित रिवॉल्वर भी बरामद की गई है। शुरुआती आकलन के अनुसार बरामद की गई कुल संपत्तियों की कीमत लगभग 35 करोड़ रुपये आंकी गई है।

परिवहन विभाग में हड़कंप, भ्रष्ट अफसरों में मची खलबली

मूल रूप से रायबरेली के नूर मार्केट के रहने वाले और आगरा के तत्कालीन एआरटीओ रहे ललित कुमार वर्तमान में लखनऊ में ऐश-ओ-आराम की जिंदगी जी रहे थे। बुधवार को विजिलेंस की इस बड़ी मछली पर हुई कार्रवाई के बाद परिवहन विभाग के गलियारों में हड़कंप मच गया है। विभागीय सूत्रों के मुताबिक, ललित कुमार के कार्यकाल के दौरान वाहन फिटनेस, ड्राइविंग लाइसेंस और विभागीय टेंडरों में बड़े पैमाने पर मनमानी वसूली और वित्तीय अनियमितताओं की शिकायतें लगातार मिल रही थीं। इस कार्रवाई के बाद विभाग के कई अन्य रसूखदार और भ्रष्ट अधिकारी भी अपनी बेनामी संपत्तियों और गुप्त लेन-देन को लेकर भूमिगत हो गए हैं।

निरीक्षक से बने थे राजपत्रित अधिकारी, 3 साल पहले दबा दिया गया था मामला

ललित कुमार के करियर का ग्राफ भी बेहद दिलचस्प रहा है। वह शुरुआत में रोडवेज में फोरमैन के पद पर थे। इसके बाद वह संभागीय निरीक्षक (RI- प्राविधिक) बने और वर्ष 2010-11 के दौरान करीब डेढ़ साल तक रायबरेली एआरटीओ कार्यालय में आरआई के पद पर तैनात रहे। प्रमोशन पाकर वह राजपत्रित अधिकारी (ARTO) बने और पिछले वर्ष आगरा से सेवानिवृत्त हुए।

भ्रष्टाचार निवारण संगठन (ACO) के कानपुर सेक्टर ने परिवहन आयुक्त की 2020 की शिकायत पर जब इनकी जांच की, तो सामने आया कि ललित कुमार की सभी वैध स्रोतों से कुल आय मात्र 93 लाख रुपये थी, जबकि उनका खर्च और संपत्तियां 1.62 करोड़ से अधिक की पाई गईं। इसके बाद 11 जून 2024 को कानपुर में एफआईआर दर्ज कर विवेचना विजिलेंस को ट्रांसफर की गई थी। सूत्रों का दावा है कि 3 साल पहले भी इन पर एक छापा पड़ा था, लेकिन तब राजनैतिक और विभागीय साठगांठ के चलते मामले को ठंडे बस्ते में दबा दिया गया था।

मुख्यमंत्री योगी तक पहुंचा था मामला, टीम को 1 लाख का इनाम

ड्राइविंग लाइसेंस और परिवहन सेवाओं से जुड़ी निजी एजेंसियों की मनमानी और अवैध वसूली से तंग आकर हाल ही में पीड़ितों के एक प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मुलाकात कर निष्पक्ष जांच की मांग की थी। मुख्यमंत्री के कड़े रुख के बाद ही इस बार विजिलेंस ने फुलप्रूफ प्लानिंग के साथ धावा बोला। विजिलेंस की इस ऐतिहासिक और बड़ी सफलता पर डीजीपी राजीव कृष्ण ने छापेमारी की टीम में शामिल सभी जांबाज अधिकारियों और कर्मचारियों को 1 लाख रुपये का नकद पुरस्कार देने की घोषणा की है।

विजिलेंस को मिली बेनामी संपत्तियों की पूरी सूची:

जांच एजेंसी को ललित कुमार के घर से लखनऊ और दिल्ली-एनसीआर के पॉश इलाकों में करोड़ों के विला, प्लॉट और कृषि भूमि के दस्तावेज मिले हैं:

  1. सी-143 और सी-145, सेक्टर-ई, अलीगंज, लखनऊ (आवासीय भवन व भूखंड)

  2. 532/491 बनारसी टोला, अलीगंज, लखनऊ (आवासीय भवन)

  3. खसरा संख्या-1321, मोहल्ला भरावन कला, बालकगंज, लखनऊ (प्लॉट)

  4. 1631, कल्ली पश्चिम, मोहनलालगंज, लखनऊ (आवासीय भूखंड)

  5. ग्राम बेगरिया और चौरहिया, मोहनलालगंज, लखनऊ (विशाल कृषि भूमि)

  6. इस्माइलगंज और वृंदावन योजना (10 सी/40) लखनऊ में आवासीय भूखंड

  7. फ्लैट बुकिंग: अंसल एपीआई (लखनऊ), माहेश्वरी इन्फ्राटेक (नोएडा) और आम्रपाली स्प्रिंग मीडो (नोएडा)

  8. ग्राम जीतपुरवा (बाराबंकी) और ग्राम सहगो कोठी (रायबरेली) में कई एकड़ कृषि भूमि।

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