झांसी। भारतीय जनता पार्टी (BJP) की राजनीति में कब, किसकी और कहां से किस्मत चमक जाए और किसका पत्ता कट जाए, यह भांप पाना बड़े-बड़े राजनीतिक पंडितों के बस की बात नहीं है। संगठन का एक इशारा पलभर में किसी नेता को अर्श से फर्श पर ला सकता है, तो किसी गुमनाम चेहरे के सिर पर जीत का सेहरा सजा सकता है। मध्य प्रदेश के दतिया में हुए हालिया उलटफेर ने अब उत्तर प्रदेश के झांसी जिले में भी सियासी हलचल तेज कर दी है। कयास लगाए जा रहे हैं कि झांसी के कई ‘माननीयों’ के टिकट पर इस बार संकट के बादल मंडरा रहे हैं।
नरोत्तम मिश्रा का पत्ता कटने से झांसी के दिग्गजों में खौफ
झांसी के बेहद नजदीक मध्य प्रदेश के दतिया जिले में जो हुआ, उसने बुंदेलखंड के बीजेपी नेताओं की नींद उड़ा दी है। कुछ समय पहले तक मध्य प्रदेश की राजनीति के चाणक्य कहे जाने वाले और ग्वालियर संभाग में टिकट तय करने वाले कद्दावर नेता नरोत्तम मिश्रा अपना ही टिकट नहीं बचा पाए। भाजपा आलाकमान ने दतिया विधानसभा उपचुनाव में नरोत्तम मिश्रा का पत्ता साफ करते हुए मध्य प्रदेश हाउसिंग बोर्ड के पूर्व चेयरमैन और संगठन के समर्पित नए चेहरे आशुतोष तिवारी को चुनावी मैदान में उतार दिया है।
सूत्रों के मुताबिक, पार्टी के आंतरिक सर्वे में नरोत्तम मिश्रा के खिलाफ जनता में भारी नाराजगी और कमजोर स्थिति की रिपोर्ट सामने आई थी। भाजपा किसी भी कीमत पर यह सीट गंवाना नहीं चाहती थी, इसलिए संगठन ने बड़ा जोखिम उठाते हुए चेहरा बदल दिया। अब ठीक यही फॉर्मूला झांसी जनपद की चारों विधानसभा सीटों पर भी लागू होने की चर्चाएं आम हैं।
महामंत्री धर्मपाल सिंह के झांसी दौरे से बढ़ी धड़कनें
झांसी के मौजूदा विधायकों और जनप्रतियनिधियों की कार्यशैली से स्थानीय जनता में काफी शिथिलता देखी जा रही है। जनसमस्याओं के निस्तारण में रुचि न लेने के कारण जनता के बीच पनप रहा आक्रोश संगठन के लिए खतरे की घंटी बन चुका है। इसी जमीनी हकीकत को भांपने और जनप्रतिनिधियों की छवि का आकलन करने के लिए पिछले दिनों भाजपा के संगठन महामंत्री धर्मपाल सिंह दो दिवसीय दौरे पर झांसी आए थे।
उन्होंने बंद कमरे में पार्टी कैडर के जमीनी कार्यकर्ताओं और पदाधिकारियों से वन-टू-वन मुलाकात की। सूत्रों का कहना है कि आलाकमान तक यह गंभीर शिकायत पहुंची है कि वर्तमान माननीय कार्यकर्ताओं की समस्याओं को नजरअंदाज कर रहे हैं। इसके अलावा, माननीयों की सिफारिश पर पदों पर बैठे कुछ करीबियों के अवैध कार्यों में लिप्त होने के वीडियो और सोशल मीडिया पर वायरल हो रही ‘रंगीन मिजाजी’ की खबरों ने पार्टी की छवि को भारी नुकसान पहुंचाया है।
गोपनीय सर्वे की रिपोर्ट तय करेगी माननीयों का भविष्य
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि आलाकमान ने निष्पक्ष और गोपनीय तरीके से झांसी की सीटों पर सर्वे कराया, तो यहां के अधिकांश मौजूदा विधायकों का टिकट कटना लगभग तय है। दतिया में तो फिर भी समर्थकों में नाराजगी दिखी, लेकिन झांसी के कुछ नेताओं की स्थिति यह है कि टिकट कटने पर उनके पक्ष में सड़कों पर उतरने वाला कोई कोर कैडर भी नजर नहीं आएगा।
बुंदेलखंड में पहले भी लग चुके हैं तगड़े झटके
भाजपा के लिए बुंदेलखंड में टिकट काटना या चौंकाने वाले फैसले लेना कोई नई बात नहीं है। इससे पहले जालौन की उरई विधानसभा से कई बार के विधायक और पूर्व मंत्री दादा बाबूराम एम. काम का टिकट पार्टी ने ऐन वक्त पर काट दिया था, जिसके बाद वे मुख्यधारा की राजनीति से ऐसे गायब हुए कि उनका सियासी सफर ही खत्म हो गया।
ऐसा ही कुछ मऊरानीपुर सीट पर भी देखा गया था, जहां भाजपा ने अपने कई दिग्गज दावेदारों को दरकिनार कर सीट सहयोगी दल ‘अपना दल’ के पाले में डाल दी थी। झांसी सदर सीट से कई बार के विधायक और पूर्व मंत्री रवींद्र कुमार शुक्ला का टिकट भी भाजपा ने अचानक काटकर सबको हैरान कर दिया था। नतीजा यह हुआ कि वे धीरे-धीरे सक्रिय राजनीति से दूर हो गए और आज अपनी ही पार्टी में हाशिए पर आ चुके हैं। अब देखना यह है कि दतिया के इस बड़े सियासी सबक के बाद झांसी के माननीयों की कुर्सी बच पाती है या संगठन यहां भी किसी नए चेहरे को मौका देकर सबको चौंकाने वाला है।















