वैशाली/बिहार। बिहार के वैशाली जिले से एक बेहद दर्दनाक और रोंगटे खड़े कर देने वाली खबर सामने आई है। राघोपुर थाना क्षेत्र के रामपुर श्यामचंद गांव के पास मंगलवार शाम गंगा नदी में एक बड़ा नाव हादसा हो गया। इस खौफनाक हादसे में 13 मासूम बच्चों की पानी में डूबने से मौत हो गई, जबकि कई बच्चे गंभीर रूप से घायल हैं। गंगा की लहरों में समाने वाले सभी बच्चों की उम्र 15 साल से कम बताई जा रही है। एक साथ 13 घरों के चिराग बुझने से पूरे इलाके में चीख-पुकार और मातम पसर गया है। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है और गांव के हर कोने से सिर्फ सिसकियों की आवाजें आ रही हैं।
श्राद्ध के भोज में शामिल होने जा रहे थे मासूम
मिली जानकारी के मुताबिक रामपुर श्यामचंद गांव के एक टोले के करीब 20 से 22 बच्चे गंगा नदी पार करके श्राद्ध का भोज खाने जा रहे थे। यह भोज गांव के ही सिंगेश्वर राय के घर आयोजित किया गया था, जिनकी छोटी बच्ची की हाल ही में मौत हो गई थी। बच्चे खुशी-खुशी इस कार्यक्रम में शामिल होने के लिए एक नाव पर सवार हुए थे, लेकिन उन्हें क्या पता था कि जिस गंगा मैया को वे पार कर रहे हैं, वही उनके लिए काल बन जाएगी।
सरकारी नाव की जर्जर हालत और ओवरलोडिंग बनी काल
स्थानीय ग्रामीणों ने बताया कि जिस नाव पर बच्चे सवार थे, वह असल में बाढ़ के समय सरकार द्वारा गांव को मुहैया कराई गई एक सरकारी नाव थी। काफी समय से यह नाव बेहद जर्जर हालत में थी। मरम्मत के नाम पर ग्रामीण जैसे-तैसे इसका इस्तेमाल कर रहे थे। मंगलवार शाम बच्चे जब नाव पर सवार होकर आगे बढ़े, तो अचानक नाव डगमगाने लगी। प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि नाव में दरार आने की वजह से उसमें तेजी से पानी भरने लगा था। वहीं कुछ लोगों का मानना है कि नाव पर क्षमता से अधिक बच्चे सवार थे। पानी भरते ही नाव अनियंत्रित होकर गहरे पानी में समा गई।
13 बच्चों की दर्दनाक मौत, 3 को सुरक्षित निकाला गया
नाव डूबते ही नदी किनारे मौजूद लोगों में अफरा-तफरी मच गई। गांववाले अपनों की जान बचाने के लिए गंगा नदी की ओर दौड़े। इस भयानक हादसे में 13 बच्चों की जान चली गई। मृतकों में मीरा कुमारी, निशु कुमारी, अनिशा कुमारी, सुनीता कुमारी, आर्यन कुमार, मोहन कुमार, अमृता कुमारी, अंकिता कुमारी, पिंकी कुमारी, नमन कुमार, सिकी कुमारी, भोनू कुमारी और सोनम कुमारी शामिल हैं। वहीं कड़ी मशक्कत के बाद अनुष्का कुमारी, कार्तिक और पुटुस कुमार को जीवित बचा लिया गया है।
खाट पर लादकर घायलों को ले जाया गया अस्पताल
हादसे के बाद गांव में स्थिति इतनी खौफनाक हो गई कि घायलों को तुरंत अस्पताल पहुंचाने के लिए एंबुलेंस तक कम पड़ गईं। बदहवास परिजन और ग्रामीण घायल बच्चों को खाट पर लादकर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाते दिखे। लगभग आधा दर्जन बच्चों को नाजुक हालत में पटना रेफर किया गया है। राघोपुर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में शवों को रखा गया, जहां परिजनों के करुण क्रंदन से माहौल गमगीन हो गया।
मौके पर पहुंचे प्रशासनिक अधिकारी, ग्रामीणों में भारी गुस्सा
हादसे की सूचना मिलते ही वैशाली की जिलाधिकारी वर्षा सिंह ने जिला प्रशासन को तुरंत अलर्ट मोड पर डाला। सदर एसडीओ विशाल कुमार, एसडीपीओ सुबोध कुमार और वरीय पुलिस पदाधिकारी शुभांक मिश्रा भारी पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे। एसडीआरएफ (SDRF) की टीमों ने तुरंत नदी में रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया। पुलिस शवों के पोस्टमार्टम की प्रक्रिया में जुट गई है। हालांकि, जर्जर नाव और प्रशासनिक लापरवाही से नाराज ग्रामीणों ने मौके पर पहुंची डीएम वर्षा सिंह और स्थानीय प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी और विरोध प्रदर्शन किया।
बिहार सरकार ने किया 4-4 लाख रुपये के मुआवजे का ऐलान
इस दुखद घटना पर दुख जताते हुए बिहार सरकार ने मृतकों के आश्रितों को 4-4 लाख रुपये की अनुग्रह राशि देने की घोषणा की है। हालांकि, ग्रामीणों का कहना है कि आर्थिक मदद से उन बेबस मां-बाप का दर्द कभी कम नहीं हो सकता, जिन्होंने एक पल में अपने जिगर के टुकड़ों को खो दिया। पूरे गांव में सिर्फ एक ही सवाल गूंज रहा है कि अगर जर्जर नाव को समय रहते हटा दिया जाता और सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम होते, तो शायद आज ये 13 मासूम मुस्कुरा रहे होते।

















