स्वयंसेवकों ने शिवाजी के राज्याभिषेक के दिन को हिंदू साम्राज्य दिवस के रूप में मनाया

शिवाजी महाराज के जीवन का प्रत्येक अंश वर्तमान समय में भी अनुकरणीय: कैलाश

भास्कर ब्यूरो
गाजियाबाद। स्वयं व्यक्तिगत दृष्टि से राजा कैसा हो, हिंदू समाज का व्यक्ति कैसा हो, हिंदू समाज का नेतृत्व करने वाला नेता कैसा हो इसका मूर्तिमंत आदर्श आज भी छत्रपति शिवाजी हैं, जिनके हृदय के आत्मविश्वास और बिजिगीषा ने संपूर्ण समाज के आत्मविश्वास को जागृत किया। संपूर्ण समाज में अपना स्वराज्य स्थापन हो, इस आकांक्षा का संकल्प जगाया और उद्यम के साथ समाज को साथ लेकर जिनके नेतृत्व के कारण यह हिंदवी स्वराज्य का सिंहासन निर्मित हुआ। उन शिवाजी महाराज की विजय वास्तव में हिंदू राष्ट्र की इस लम्बी लडाई की पहली अवस्था में राष्ट्र की निर्णायक विजय थी। अगर संघर्ष की दूसरी अवस्था में भी शिवाजी महाराज की नीति पर चलते तो हम उसी प्रकार की निर्णायक विजय पाते। हम नहीं चले इस लिये हमने पाकिस्तान पाया।
आज की परिस्थिति भी वही है। आज की आवश्यकता भी वही है। आज भी समाज के मन में उसी विजिगीषा को, आत्मविश्वास को उद्यम को जागृत करना चाहिये। आज भी प्रत्येक व्यक्ति को शिवाजी महाराज के चरित्र का, गुणों का अनुकरण कर हिंदू समाज का, हिंदू समाज के साथ रहकर, अपने लिये नहीं, अपने हिंदूराष्ट्र की सर्वांगीण उन्नति के लिये समाज का सक्षम नेतृत्व करने वाला व्यक्ति बनना है, और सारे समाज के आत्मविश्वास को एक नई ऊँचाई देनेवाला ऐसा एक हिंदू अर्थात प्रजाहितदक्ष, सहृदयी, सर्वत्र समभावी, नीतिकठोर ऐसा शासन समाज के द्वारा ही स्थापित करवाना है।
यह बातें राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ गाजियाबाद विभाग के सह विभाग संघचालक कैलाश ने हिंदू साम्राज्य दिवस के कार्यक्रम में रखी।
उन्होंने कहा कि शिवाजी महाराज के द्वारा संपूर्ण राष्ट्र के लिये किये गये प्रयासों की, यह राज्याभिषेक सफल परिणति है और इसलिये इस को हम हिंदू साम्राज्य दिवस के रूप में मनाते हैं। छत्रपति शिवाजी महाराज के जीवन का प्रत्येक अंश हमारे लिये दिग्दर्शक है। उस चरित्र की, उस नीति की, उस कुशलता की, उस उद्देश्य के पवित्रता की आज आवश्यकता है। इसको समझकर ही अपने संघ ने इस ज्येष्ठ शुक्ल त्रयोदशी को, शिवाजी महाराज के राज्याभिषेक के दिन को हिंदू साम्राज्य दिवस निश्चित किया है। इसीलिये आज की जैसी परिस्थिति में उसी को हम सारे भारत में मानते है। शिवाजी महाराज के कर्तृत्व, उनके गुण, उनके चरित्र के द्वारा मिलनेवाला दिग्दर्शन आज की वैसी ही परिस्थिति में मार्गदर्शक है। आज भी अपने लिये अनुकरणीय है।
छत्रपति शिवाजी का राज्याभिषेक ज्येष्ठ शुक्ल त्रयोदशी को हुआ था और उन्होंने इस दिन हिंदूपदपादशाही की स्थापना कर पूर्ण रूपेण हिंदवी स्वराज्य की घोषणा की थी। इस दिन को प्रतिवर्ष राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ हिंदू साम्राज्य दिवस के रूप में मनाता है।
इसी क्रम में गाजियाबाद जिले के 15 से अधिक स्थानों पर हिंदू साम्राज्य दिवस के कार्यक्रम हुए जिसमें 2000 से अधिक स्वयंसेवकों ने सहभागिता की।

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