योगी सरकार का बड़ा एक्शन: आयुष्मान योजना में लापरवाही पर 200 प्राइवेट अस्पतालों पर गिरी गाज, 100 का भुगतान रोका, 100 सस्पेंड

लखनऊ, ब्यूरो। उत्तर प्रदेश की योगी सरकार प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं को पूरी तरह पारदर्शी, हाई-टेक और जवाबदेह बनाने के लिए लगातार कड़े फैसले ले रही है। इसी कड़ी में सरकार ने ‘आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना’ में लापरवाही बरतने और निर्धारित मानकों की अनदेखी करने वाले निजी अस्पतालों के खिलाफ अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई की है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के कड़े रुख के बाद सूबे के करीब 200 प्राइवेट अस्पतालों पर गाज गिरी है। इनमें से 100 अस्पतालों का भुगतान तत्काल प्रभाव से रोक दिया गया है, जबकि अन्य 100 अस्पतालों को आयुष्मान योजना के पैनल से बाहर करते हुए सस्पेंड (निलंबित) कर दिया गया है। सीएम योगी ने साफ किया है कि गरीबों के इलाज में किसी भी तरह की कोताही या फर्जीवाड़ा कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

नए HEM 2.0 पोर्टल पर 35 कड़े मानक पूरे करना अनिवार्य

साचीज (SACHIS) की सीईओ अर्चना वर्मा ने बताया कि आयुष्मान भारत योजना देश के गरीब और वंचित वर्गों को मुफ्त और विश्वस्तरीय इलाज देने वाली एक बेहद संवेदनशील योजना है। इसे पूरी तरह विश्वसनीय और पारदर्शी बनाने के लिए अस्पतालों की सूचीबद्धता (इम्पैनलमेंट) और उनके क्वॉलिटी टेस्ट की प्रक्रिया को पहले से कहीं ज्यादा सख्त कर दिया गया है। सरकार अब अस्पताल इम्पैनलमेंट मॉड्यूल (HEM) पोर्टल के जरिए अस्पतालों का वेरिफिकेशन कर रही है। नई व्यवस्था के तहत अब हर अस्पताल के लिए 35 महत्वपूर्ण मानकों को पूरा करना अनिवार्य है। इनमें अस्पताल का वैध रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट, फायर सेफ्टी एनओसी (Fire Safety NOC), जरूरी मेडिकल इंफ्रास्ट्रक्चर, डॉक्टरों की असली शैक्षणिक योग्यता और एचएफआर (HFR) पंजीकरण जैसे बेहद जरूरी दस्तावेज शामिल हैं।

बार-बार चेतावनी के बाद भी 200 अस्पतालों ने दिखाई लापरवाही

सीईओ अर्चना वर्मा के मुताबिक, नेशनल हेल्थ अथॉरिटी (NHA) और स्टेट हेल्थ एजेंसी ने इन अस्पतालों को नए एचईएम 2.0 (HEM 2.0) पोर्टल पर माइग्रेट करने के लिए हर संभव मदद दी। ईमेल, फोन, मैसेज और वर्चुअल मीटिंग्स के जरिए लगातार संपर्क किया गया, जिसके चलते प्रदेश के 95 फीसदी से ज्यादा अस्पतालों ने सफलतापूर्वक इस प्रक्रिया को पूरा कर लिया। लेकिन कई बार मौका दिए जाने के बावजूद करीब 200 निजी अस्पतालों ने तय समयसीमा के भीतर इन जरूरी मानकों को पूरा नहीं किया।

लापरवाही बरतने वाले इन अस्पतालों में लखनऊ, कानपुर नगर, गौतमबुद्ध नगर (नोएडा), गाजियाबाद, वाराणसी, प्रयागराज, आगरा, गोरखपुर, बरेली, मेरठ, झांसी, मुरादाबाद, सहारनपुर, मथुरा, अलीगढ़, सुल्तानपुर, जौनपुर, देवरिया, गोंडा, हरदोई, मुजफ्फरनगर, रामपुर, और सोनभद्र समेत उत्तर प्रदेश के दर्जनों जिलों के चिकित्सालय शामिल हैं।

इलाज में तकनीक का तड़का, अब EHR और डिजिटल माध्यमों से होगी निगरानी

योगी सरकार आयुष्मान योजना के तहत स्वास्थ्य सेवाओं में टेक्नोलॉजी के इस्तेमाल को सबसे ज्यादा बढ़ावा दे रही है। सभी सूचीबद्ध अस्पतालों को एनएबीएच (NABH) क्वॉलिटी सर्टिफिकेट हासिल करने के निर्देश दिए गए हैं। इसके साथ ही अस्पतालों में मरीजों के बेहतर और पारदर्शी इलाज के लिए ‘एबीडीएम’ सक्षम एचएमआईएस (HMIS) प्रणाली लागू करने को कहा गया है। सरकार अब ‘इलेक्ट्रॉनिक हेल्थ रिकॉर्ड’ (EHR) सिस्टम को भी चरणबद्ध तरीके से लागू कर रही है, जिससे मरीजों का पूरा मेडिकल इतिहास डिजिटल रूप से सुरक्षित रहेगा।

राज्य और जिला स्तर पर अस्पतालों की औचक जांच और ऑडिटिंग भी कराई जा रही है। साचीज की सीईओ ने चेतावनी दी है कि कुछ जगहों से डॉक्टरों की डिग्री या उनके विवरण का अनुचित (फर्जी) इस्तेमाल करने की शिकायतें मिली हैं, जिन पर सरकार की एसटीएफ और जांच एजेंसियां पैनी नजर रख रही हैं। ऐसे मामलों में शामिल अस्पतालों के खिलाफ सीधे एफआईआर दर्ज कर सख्त कानूनी कार्रवाई की जा रही है।

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