अयोध्या। श्री रामजन्मभूमि परिसर में कथित चोरी और उससे जुड़े प्रकरण को लेकर देश भर में फैलाए जा रहे दुष्प्रचार के खिलाफ अयोध्या का संत समाज पूरी तरह से एकजुट हो गया है। मणिराम दास छावनी स्थित श्री राम सत्संग भवन ‘धर्म मंडपम’ में आयोजित ‘संत मंडल अयोध्या धाम’ की संगोष्ठी में पूज्य संतों ने अनर्गल प्रलाप और भ्रामक नरेटिव चलाने वालों का पुरजोर प्रतिवाद किया। संतों ने स्पष्ट किया कि राम मंदिर आंदोलन में अपना सर्वस्व देने वाले महापुरुषों और ट्रस्ट के पदाधिकारियों पर लगाए जा रहे आरोप पूरी तरह से मिथ्या और आधारहीन हैं।
चंपत राय निष्कलंक, त्यागपत्र उनका व्यक्तिगत निर्णय: महंत गिरीशदास
संगोष्ठी में डांडिया मंदिर के महंत गिरीशदास जी महाराज ने कहा कि श्री रामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय परम संत हैं और उन्होंने विगत 50 वर्षों से निस्वार्थ भाव से राम मंदिर आंदोलन को दिशा दी है। उन पर लगाए गए सभी आरोप निराधार हैं और उन्होंने जनभावनाओं को सर्वोपरि रखते हुए स्वयं की प्रेरणा से त्यागपत्र दिया है। उन्होंने सुझाव दिया कि अयोध्यावासियों को रामलला के दर्शन सुलभ कराने के लिए उनके ‘आधार कार्ड’ को ही पहचान का मुख्य आधार बनाया जाना चाहिए।
वहीं, मणिराम दास छावनी के महंत कमलनयन दास जी महाराज ने अध्यक्षीय संबोधन में कहा कि जो ताकतें अदालत में भगवान राम के अस्तित्व का विरोध करती थीं, आज वही मंदिर की व्यवस्था पर सवाल उठा रही हैं। विदेशों से सनातन धर्म को बदनाम करने के लिए फंडिंग हो रही है। उन्होंने कहा कि समय आने पर दूध का दूध और पानी का पानी हो जाएगा और षड्यंत्रकारियों को उनके किए का परिणाम भुगतना पड़ेगा।
‘मालिक पर आरोप लगाना छद्म राजनीति’: आचार्य मिथिलेषनंदिनीशरण
सिद्धपीठ श्री हनुमंत निवास के आचार्य मिथिलेषनंदिनीशरण जी ने कहा कि देश में एक सुनियोजित ‘नरेटिव वॉर’ चलाया जा रहा है। उन्होंने प्रसिद्ध अभिनेता अनुपम खेर के वक्तव्य का उल्लेख करते हुए कहा, “चोरी होने पर चोर पकड़े जाते हैं, मालिक नहीं; परंतु राम मंदिर मामले में सेवादारों पर ही आरोप लगाने का नाटक किया जा रहा है।” उन्होंने संतों से आह्वान किया कि दुष्प्रचार का तत्काल और दृढ़ता से प्रतिकार किया जाना चाहिए ताकि श्रद्धालुओं का विश्वास न डगे।
अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत संजय दास ने राम मंदिर आंदोलन में विश्व हिंदू परिषद (VHP) और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के योगदान की सराहना करते हुए कहा कि चंपत राय के संघर्ष को भुलाया नहीं जा सकता। उन्होंने सनातन धर्म और अयोध्या की छवि धूमिल करने वाले तथाकथित वक्ताओं के सामाजिक बहिष्कार की मांग की।
5 सदस्यीय धार्मिक समिति के गठन का स्वागत
संगोष्ठी में मौजूद तमाम प्रमुख धर्माचार्यों, जिनमें महंत रामानंद दास, अधिकारी राजकुमार दास, रामायणी रामकृष्ण दास, महंत वैदेही वल्लभशरण और महंत मुरलीदास शामिल थे, ने ट्रस्ट में 5 सदस्यीय ‘धार्मिक समिति’ के गठन का सहर्ष स्वागत किया। संतों का मानना है कि इस समिति के माध्यम से श्री रामानंदीय परंपरा के अनुसार पूजा-पद्धति और उत्सवों का सुचारू संचालन होगा तथा व्यवस्था से जुड़े सभी विघ्न-बाधाएं दूर होंगी।
बैठक के अंत में सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित किया गया कि अयोध्या की एकता, अखंडता और गरिमा की रक्षा के लिए संत समाज हर दो-तीन महीने में संवाद करेगा और मीडिया व सोशल मीडिया के माध्यम से भ्रम फैलाने वाले कालनेमियों को बेनकाब किया जाएगा।










