नोएडा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर 29 सितंबर 2024 को शुरू होगा परिचालन

JEWAR, NOV 24 (UNI):- A worker carrying dummy of an aircraft as work is in full swing on the eve of the laying of foundation stone of Noida International Airport at Jewar on Thursday. Prime Minister Narendra Modi will lay the foundation stone of the Airport. UNI PHOTO-AK6U

जेवर (गौतमबुद्ध नगर) .  उत्तरी भारत की आर्थिक प्रगति के इंजन के रूप में देखे जा रहे उत्तर प्रदेश के गौतमबुद्ध नगर के जेेवर में बनने वाले नोएडा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के पहले चरण का काम शिलान्यास के 1095 दिनों में पूरा करके 29 सितंबर 2024 को परिचालन आरंभ करने का लक्ष्य तय किया गया है।


प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी कल अपराह्न यहां नोएडा अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे (एनआईए) की आधारशिला रखेंगे। इस मौके पर उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, केन्द्रीय नागर विमानन मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया, गौतमबुद्धनगर के सांसद डॉ. महेश शर्मा, अलीगढ़ के सांसद सतीश गौतम आदि मौजूद रहेंगे। राज्य की योगी आदित्यनाथ सरकार में स्वास्थ्य मंत्री एवं गौतमबुद्ध नगर के प्रभारी मंत्री जयप्रताप सिंह ने अपर मुख्य सचिव (नागर विमानन) एस पी गोयल और यमुना एक्सप्रेसवे विकास प्राधिकरण के मुख्य कार्यकारी अधिकारी अरुणवीर सिंह सहित प्रशासन एवं पुलिस के अधिकारियों के साथ निरंतर कार्यक्रम स्थल पर तैयारियों की समीक्षा की।


अपर मुख्य सचिव श्री गोयल ने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि हवाईअड्डे के लिए आवश्यक करीब 6200 हेक्टेयर ज़मीन में से पहले चरण के निर्माण के लिए 1334 हेक्टेयर भूमि का अधिग्रहण किया जा चुका है। सभी प्रकार की स्वीकृतियां प्राप्त हो चुकीं हैं। निर्माण करने वाली कंपनी ज्यूरिख एयरपोर्ट इंटरनेशनल एजी की भारतीय इकाई ने निर्माण की पूरी योजना तैयार कर ली है। पहले चरण में एक रनवे एवं एक टर्मिनल के साथ निर्माण शिलान्यास के 1095 दिनों के भीतर किया जाएगा और 29 सितंबर 2024 में पहली यात्री अथवा कार्गाे उड़ान संचालित होने लगेगी। उन्होंने कहा कि सरकार ने निर्माण की समयावधि को लेकर बहुत कठोर शर्तें रखीं हैं। निर्माण में देरी होने पर कड़े दंडात्मक प्रावधान रखे हैं। उन्होंने कहा कि ज़मीन के अधिग्रहण के पश्चात 3002 परिवारों के पुनर्वास का कार्य भी पूरा हो गया है। सबको वैकल्पिक भूमि एवं आवास प्रदान किया जा चुका है।


श्री अरुणवीर सिंह ने कहा कि नोएडा अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डा विश्व का चौथा सबसे बड़ा हवाई अड्डा होगा। छह रनवे वाले इस हवाईअड्डे में शुरुआती यात्री वहन क्षमता एक करोड़ 20 लाख यात्री प्रतिवर्ष तथा मालवहन क्षमता 20 लाख टन सालाना होने का अनुमान है। बाद में हवाई अड्डे के सभी चरण पूर्ण होने तक ये क्रमश: सात करोड़ यात्री एवं आठ करोड़ टन तक जाने की संभावना है। उन्होंने कहा कि नोएडा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा उत्तरी भारत में लॉजिस्टिक्स का एक विशाल एवं वैश्विक हब बनेगा जो राज्य का आर्थिक कायाकल्प करने में अहम भूमिका निभायेगा। यहां विमानों के अनुरक्षण, मरम्मत एवं पुनर्निर्माण (एमआरओ) के लिए भी अलग से बड़ा भूभाग आवंटित किया गया है। इससे पहले एमआरओ के लिए विमानों को विदेश भेजना पड़ता था लेकिन अब नोएडा में ये सुविधा हो जाएगी।


यह भारत का पहला ऐसा हवाई अड्डा होगा, जहां कार्बन उत्सर्जन शुद्ध रूप से शून्य होगा। जेवर के अलावा गोवा और नवी मुंबई के हवाई अड्डे भी ग्रीनफील्ड हवाईअड्डे होंगे। इस हवाई अड्डे के अंतर्गत एक ऐसा समर्पित भूखंड चिह्नित किया है जहां परियोजना स्थल से हटाये जाने वाले वृक्षों को लगाया जायेगा। इस तरह उसे जंगलमय पार्क का रूप दिया जायेगा। एनआईए वहां के सभी मूल जीवजंतुओं की सुरक्षा करेगा और हवाई अड्डे के विकास के दौरान प्रकृति का पूरा ध्यान रखा जायेगा। नाेएडा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के प्रथम चरण के निर्माण की लागत 4588 करोड़ रुपए की होगी जो निवेशक कंपनी व्यय करेगी जबकि भूमि अधिग्रहण की लागत 4326 करोड़ आयी है जिसे उत्तर प्रदेश सरकार वहन कर रही है। इस प्रकार प्रथम चरण की कुल लागत 8914 करोड़ रुपए आयी है। आधिकारिक दस्तावेजों के अनुसार पूरी परियोजना की निर्माण लागत 29 हजार 560 करोड़ रुपए की होगी।
नोएडा अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे (एनआईए) के साथ उत्तर प्रदेश देश का एकमात्र ऐसा राज्य होगा जहां पांच अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे बनाये जा रहे हैं। कुशीनगर हवाई अड्डे का हाल में उद्घाटन हो चुका है और अयोध्या में एक अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे का निर्माण-कार्य चल रहा है। लखनऊ एवं वाराणसी पहले ही अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के रूप में काम कर रहे हैं। राज्य में इस समय नौ हवाईअड्डे परिचालित हैं जिनमें इन लखनऊ एवं वाराणसी के अलावा प्रयागराज, गोरखपुर, आगरा, बरेली, कानपुर शामिल हैं। अगले साल अलीगढ़, चित्रकूट, आजमगढ़, श्रावस्ती एवं मुरादाबाद के हवाई अड्डे भी परिचालित होने लगेंगे। इस प्रकार से उत्तर प्रदेश देश में सर्वाधिक 17 हवाई अड्डों वाला राज्य बन जाएगा।


राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में यह दूसरा अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा होगा। इससे इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डे पर दबाव को कम करने में मदद मिलेगी। भौगोलिक रूप से रणनीतिक स्थिति के कारण यह दिल्ली, नोएडा, गाजियाबाद, अलीगढ़, आगरा, फरीदाबाद सहित शहरी आबादी और पड़ोसी इलाकों के लिए बहुत उपयोगी साबित होगा। इस हवाईअड्डे से कम से कम पांच एक्सप्रेसवे एवं राष्ट्रीय राजमार्ग -यमुना एक्सप्रेसवे, वेस्टर्न पेरीफेरल एक्सप्रेसवे, ईस्टर्न पेरीफेरल एक्सप्रेसवे, दिल्ली-मुम्बई एक्सप्रेसवे, राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या 91 जुड़ेंगे।


दिल्ली वाराणसी हाईस्पीड रेलवे के अलावा इसे दिल्ली, आगरा, मथुरा एवं वृंदावन से रैपिड रेल से भी जोड़ा जाएगा। प्रस्तावित दिल्ली-वाराणसी हाई स्पीड रेल से दिल्ली और हवाई अड्डे के बीच का सफर मात्र 21 मिनट का हो जायेगा। नोएडा अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डे के समीप औद्योगिक कॉरीडोर, फिल्म सिटी के लिए पॉड टैक्सी की सेवाएं भी उपलब्ध करायीं जाएंगी। हवाई अड्डे में ग्राउंड ट्रांसपोर्टेशन सेंटर विकसित किया जायेगा जिसमें मल्टी मॉडल ट्रांजिट केंद्र, मेट्रो और हाई स्पीड रेलवे के स्टेशन होंगे। टैक्सी, बस सेवा और निजी वाहन पार्किंग सुविधा मौजूद होगी।


सरकारी सूत्रों का कहना है कि स्विट्ज़रलैंड की ज्यूरिख एयरपोर्ट इंटरनेशनल एजी द्वारा निर्माणाधीन नाेएडा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा उत्तरी भारत के लिये लॉजिस्टिक्स का द्वार बनेगा। अपने विस्तृत पैमाने और क्षमता के कारण, हवाई अड्डा उत्तरप्रदेश के परिदृश्य को बदल देगा। वह राज्य को वैश्विक लॉजिस्टिक मानचित्र में स्थापित होने में मदद करेगा। पहली बार भारत में किसी ऐसे हवाई अड्डे की परिकल्पना की गई है जहां एकीकृत मल्टी मॉडल कार्गो केंद्र हो तथा जहां सारा ध्यान लॉजिस्टिक सम्बंधी खर्चों और समय में कमी लाने पर हो।


सूत्रों के अनुसार नोएडा अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डे को लोकप्रिय बनाने एवं ग्राहकों में स्थापित करने के लिए शुरुआत यूजर यानी उपयोगकर्ता शुल्क दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डे से काफी कम रखा जाएगा। यह करीब चार सौ रुपए प्रति यात्री तक हो सकता है। औद्योगिक उत्पादों के निर्बाध आवागमन की सुविधा के जरिये यह हवाई अड्डा क्षेत्र में भारी निवेश को आकर्षित करने, औद्योगिक विकास की गति बढ़ाने और स्थानीय उत्पादों को राष्ट्रीय तथा अंतर्राष्ट्रीय बाजारों तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभायेगा। इससे नये उद्यमों को अधिसंख्य अवसर मिलेंगे तथा प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रोजगार के कम से कम एक लाख मौके भी पैदा होंगे।


इस तरह हवाई अड्डा सड़क, रेल और मेट्रो से सीधे जुड़ने में सक्षम हो जायेगा। नोएडा और दिल्ली को निर्बाध मेट्रो सेवा के जरिये जोड़ा जायेगा। आसपास के सभी प्रमुख मार्ग और राजमार्ग, जैसे यमुना एक्सप्रेसवे, वेस्टर्न पेरीफेरल एक्सप्रेसवे, ईस्टर्न पेरीफेरल एक्सप्रेसवे, दिल्ली-मुम्बई एक्सप्रेसवे तथा अन्य भी हवाई अड्डे से जोड़े जायेंगे। हवाई अड्डे को हवाई अड्डे की डिजाइन बनाने में इस बात का ध्यान रखा गया है कि परिचालन खर्च कम हो तथा निर्बाध और तेजी से यात्रियों का आवागमन हो सके। हवाई अड्डे में टर्मिनल के नजदीक ही हवाई जहाजों को खड़ा करने की सुविधा होगी ताकि उसी स्थान से घरेलू और अंतर्राष्ट्रीय उड़ानों के परिचालन में वायुसेवाओं को आसानी हो। इसके कारण हवाई अड्डे पर हवाई जहाज जल्दी से काम पर लग जायेंगे तथा यात्रियों के आवागमन भी निर्बाध और तेजी से संभव होगा।

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