ट्रंप का बड़ा मास्टरस्ट्रोक: ईरान से शांति वार्ता के लिए चुना ‘इस्लामाबाद’, जेडी वेंस संभाल सकते हैं कमान; क्या खत्म होगा तनाव?

वॉशिंगटन/इस्लामाबाद: मध्य पूर्व में जारी तनाव के बीच दुनिया की नजरें एक बार फिर अमेरिका और ईरान पर टिक गई हैं। पाकिस्तान की मध्यस्थता की पिछली कोशिशें विफल रहने के बाद, अब अमेरिकी प्रशासन ईरान के साथ दूसरे दौर की सीधी और उच्च-स्तरीय बातचीत की तैयारी कर रहा है। सूत्रों की मानें तो इस महा-वार्ता का नेतृत्व अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस कर सकते हैं और इसके लिए पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद को सबसे संभावित वेन्यू (स्थल) के तौर पर चुना गया है।

ट्रंप की ‘स्पेशल टीम’ सक्रिय: कुशनर और विटकॉफ के कंधों पर जिम्मेदारी

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस शांति मिशन को सफल बनाने के लिए अपनी सबसे भरोसेमंद टीम को मैदान में उतार दिया है। इस टीम में ट्रंप के विशेष दूत स्टीव विटकॉफ और उनके दामाद जेरेड कुशनर शामिल हैं। खबर है कि करीब 21 घंटे तक चली मैराथन कूटनीतिक चर्चा के बाद ये प्रतिनिधि अब ईरानी अधिकारियों और अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थों के साथ सीधे संपर्क में हैं। ट्रंप ने संकेत दिए हैं कि अगले 48 घंटों में इस मिशन को लेकर कोई बड़ा एलान हो सकता है।

यूरोप नहीं ‘इस्लामाबाद’ क्यों? ट्रंप ने की आसिम मुनीर की तारीफ

शुरुआत में चर्चा थी कि यह ऐतिहासिक बैठक यूरोप के किसी शहर में होगी, लेकिन राष्ट्रपति ट्रंप ने अचानक इस्लामाबाद के पक्ष में झुकाव दिखाकर सबको चौंका दिया। ट्रंप ने पाकिस्तान के फील्ड मार्शल आसिम मुनीर की जमकर तारीफ करते हुए कहा कि मुनीर ने क्षेत्रीय स्थिरता और भारत के साथ तनाव कम करने में प्रभावी भूमिका निभाई है। ट्रंप का मानना है कि इस संवेदनशील कूटनीतिक वार्ता के लिए पाकिस्तान एक न्यूट्रल और उचित मंच साबित हो सकता है।

परमाणु कार्यक्रम पर अड़ा पेंच: यूरेनियम संवर्धन पर क्या है रुख?

शांति की इस राह में सबसे बड़ा रोड़ा ईरान का परमाणु कार्यक्रम बना हुआ है। हालांकि, कूटनीतिक मध्यस्थता कर रहे रिटायर्ड पाकिस्तानी लेफ्टिनेंट जनरल मोहम्मद सईद का दावा है कि तेहरान ने यूरेनियम संवर्धन के मुद्दे पर कुछ ‘लचीलापन’ दिखाया है। दूसरी ओर, ट्रंप ने उन खबरों को खारिज कर दिया है जिनमें कहा गया था कि अमेरिका ने 20 साल तक यूरेनियम संवर्धन रोकने की शर्त रखी है। ट्रंप का कहना है कि उनका लक्ष्य ईरान को परमाणु हथियार बनाने से रोकना है, न कि उसे किसी समयसीमा में बांधना।

ईरान का कड़ा रुख और बैकडोर डिप्लोमेसी

भले ही बातचीत की टेबल सज रही हो, लेकिन ईरान के प्रतिनिधि मोहम्मद मरंडी का रुख अब भी सख्त है। उनका कहना है कि किसी भी प्रकार की आर्थिक नाकेबंदी ईरान के संवर्धन कार्यक्रम को दबा नहीं सकती। इस बीच, खबर है कि कुछ अन्य गुप्त देश भी बैकडोर डिप्लोमेसी के जरिए दोनों महाशक्तियों को करीब लाने का प्रयास कर रहे हैं। अब देखना यह होगा कि क्या इस्लामाबाद की धरती पर होने वाली यह मुलाकात विश्व शांति के लिए कोई नया रास्ता खोल पाएगी या नहीं।

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