लखनऊ। उत्तर प्रदेश में आगामी त्रि-स्तरीय पंचायत चुनावों को लेकर योगी सरकार ने एक बेहद बड़ा और रणनीतिक फैसला लिया है। सरकार ने राज्य के स्थानीय ग्रामीण निकायों में अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के आरक्षण की स्थिति की समीक्षा और अध्ययन के लिए एक नए ‘पिछड़ा वर्ग आयोग’ का गठन कर दिया है। इलाहाबाद हाईकोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश न्यायमूर्ति राम औतार सिंह को इस पांच सदस्यीय आयोग का अध्यक्ष नियुक्त किया गया है। माना जा रहा है कि सरकार का यह कदम विपक्षी दलों के समीकरणों को मात देने और ओबीसी वोट बैंक को साधने के लिए बेहद अहम साबित होगा।
योगी सरकार द्वारा गठित इस विशेष आयोग में न्यायविद और प्रशासनिक विशेषज्ञों को शामिल किया गया है। अध्यक्ष न्यायमूर्ति राम औतार सिंह के अलावा, सेवानिवृत्त अतिरिक्त जिला न्यायाधीश (ADJ) ब्रजेश कुमार और संतोष विश्वकर्मा को बतौर सदस्य नियुक्त किया गया है। वहीं, प्रशासनिक अनुभव को तरजीह देते हुए सेवानिवृत्त आईएएस (IAS) अधिकारी अरविंद चौरसिया और एस.पी. सिंह को भी इस आयोग का सदस्य बनाया गया है। यह आयोग कार्यभार ग्रहण करने की तारीख से अगले छह महीने तक वैध रहेगा और इसी समयावधि के भीतर इसे पंचायत निकायों में ओबीसी के पिछड़ेपन की प्रकृति, प्रभाव और आरक्षण व्यवस्था का बारीकी से अध्ययन कर अपनी विस्तृत रिपोर्ट शासन को सौंपनी होगी।
अखिलेश यादव के ‘PDA’ फॉर्मूले की काट! चुनावों से ठीक पहले चला बड़ा दांव
राजनीतिक गलियारों में योगी सरकार के इस फैसले को समाजवादी पार्टी (SP) के मुखिया अखिलेश यादव की ‘PDA’ (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) रणनीति की जवाबी काट के तौर पर देखा जा रहा है। पंचायत चुनाव से ऐन पहले इस तरह के आयोग का गठन कर भाजपा ने साफ संदेश दिया है कि वह ओबीसी आरक्षण के मुद्दे पर पूरी तरह गंभीर है। इस फैसले के बाद अब राज्य में सियासी सरगर्मियां तेज हो गई हैं, क्योंकि आयोग की रिपोर्ट आने के बाद ही आरक्षण की नई रूपरेखा तय होगी।
ग्राम प्रधानों और ब्लॉक प्रमुखों का बढ़ेगा कार्यकाल, प्रशासक संभालेंगे कमान
इसी बीच प्रदेश के पंचायती राज मंत्री ओमप्रकाश राजभर ने एक और बड़ा अपडेट दिया है। उन्होंने बताया कि विभाग ने सरकार को एक अहम प्रस्ताव भेजा है, जिसके तहत ग्राम प्रधानों और ब्लॉक प्रमुखों का कार्यकाल समाप्त होने के बाद प्रशासकों (प्रशासनिक समिति) की नियुक्ति की जाएगी। बता दें कि मौजूदा ग्राम प्रधानों का कार्यकाल इसी महीने 26 मई को समाप्त होने जा रहा है। राजभर ने विपक्षी दल पर निशाना साधते हुए कहा कि समाजवादी पार्टी ने पंचायत चुनावों को टालने के लिए हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। अब ऐसी स्थिति में प्रशासनिक समिति के माध्यम से ही ग्राम प्रधानों, ब्लॉक प्रमुखों और जिला पंचायत अध्यक्षों का कार्यकाल आगे बढ़ाया जाएगा।
अब विधानसभा चुनाव के बाद ही होंगे यूपी में पंचायत चुनाव!
पंचायती राज मंत्री के बयानों और नए पिछड़ा वर्ग आयोग को रिपोर्ट सौंपने के लिए मिले 6 महीने के समय को देखते हुए यह साफ हो गया है कि प्रदेश में पंचायत चुनाव तय समय पर नहीं होंगे। प्रशासनिक और कानूनी अड़चनों तथा आरक्षण के नए सिरे से निर्धारण की प्रक्रिया के चलते अब यूपी में त्रि-स्तरीय पंचायत चुनाव उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों के संपन्न होने के बाद ही कराए जाने की पूरी उम्मीद है। तब तक गांवों के विकास कार्य और प्रशासनिक व्यवस्था अफसरों व समिति के जिम्मे रहेगी।














