अयोध्या राम मंदिर चढ़ावा चोरी कांड: वाराणसी से जुड़े तार, बिना वेरिफिकेशन भर्ती ने खोली सुरक्षा की पोल

वाराणसी: अयोध्या स्थित भव्य राम मंदिर में चढ़ावे की राशि चोरी होने के मामले ने अब एक नया मोड़ ले लिया है। इस गंभीर प्रकरण में वाराणसी का कनेक्शन सामने आने से हड़कंप मच गया है। मामले की जांच कर रही SIT (स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम) ने अब तक कुल 18 आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जिनमें से 6 लोग वाराणसी की एक प्रतिष्ठित सिक्योरिटी एजेंसी के माध्यम से भर्ती किए गए थे। इस खुलासे के बाद सुरक्षा व्यवस्था और नियुक्ति प्रक्रिया पर बड़े सवाल खड़े हो गए हैं।

बैंक और एजेंसी के बीच छिड़ी जिम्मेदारी की जंग

इस पूरे मामले में सिक्योरिटी एजेंसी ने खुद को पूरी तरह से पाक-साफ बताया है। एजेंसी के संचालक गौरव सिंह का दावा है कि उनकी कंपनी ने कुल 22 कर्मचारियों को केवल हाउसकीपिंग के कार्यों के लिए भेजा था। उन्होंने अपना बचाव करते हुए कहा कि कर्मचारियों से वहां क्या काम कराया जा रहा था, इसकी उन्हें कोई जानकारी नहीं थी। उनके अनुसार, मंदिर या बैंक परिसर में कर्मचारियों से क्या कार्य लेना है, यह पूरी तरह से संबंधित बैंक शाखा की जिम्मेदारी थी।

बिना पुलिस वेरिफिकेशन और सिफारिश पर हुई थी भर्ती

जांच में एक बेहद चौंकाने वाला तथ्य सामने आया है कि इन सभी 22 कर्मचारियों की नियुक्ति बिना किसी पुलिस वेरिफिकेशन के की गई थी। एजेंसी के संचालक ने आरोप लगाया है कि अयोध्या स्थित SBI शाखा के तत्कालीन मुख्य प्रबंधक ने ही इन सभी लोगों की सिफारिश की थी। इतना ही नहीं, बैंक की ओर से ही इन कर्मचारियों के नाम और बायोडाटा उपलब्ध कराए गए थे, जिसके बाद एजेंसी ने उन्हें ड्यूटी पर तैनात कर दिया। बैंक द्वारा मुहैया कराई गई सूची में कई ऐसे लोग भी शामिल थे, जो पहले किसी अन्य एजेंसी के साथ काम कर चुके थे।

26 साल पुरानी साख पर लगा बड़ा दाग

यह मामला वाराणसी की उस सिक्योरिटी एजेंसी के लिए भी बड़ी मुसीबत बन गया है, जो करीब 26 वर्षों से इस क्षेत्र में अपनी सेवाएं दे रही है। दावा है कि यह कंपनी देश के 8 राज्यों में सक्रिय है और वर्तमान में इसके अंतर्गत 2000 से अधिक कर्मचारी काम कर रहे हैं। SIT ने मामले की गंभीरता को देखते हुए कंपनी के सुपरवाइजर से भी गहन पूछताछ की है। फिलहाल, इस पूरे प्रकरण ने मंदिर जैसी संवेदनशील जगह पर तैनात किए जाने वाले कर्मचारियों की चयन प्रक्रिया और बैंक की भूमिका पर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं, जिसका जवाब SIT की अंतिम रिपोर्ट के बाद ही साफ हो पाएगा।

 

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