
अयोध्या के श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में दान प्रबंधन को लेकर उठे हालिया विवाद के बाद श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने पूरे सिस्टम को अधिक सुरक्षित, पारदर्शी और जवाबदेह बनाने के लिए कड़े कदम उठाने शुरू कर दिए हैं। श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाए जाने वाले करोड़ों रुपये के दान की गिनती, रिकॉर्ड रखरखाव, बैंक डिपॉजिट और पूरी मॉनिटरिंग के लिए एक नया और मजबूत ढांचा तैयार किया जा रहा है। ट्रस्ट का मुख्य उद्देश्य भविष्य में किसी भी प्रकार की वित्तीय गड़बड़ी या अनियमितता की गुंजाइश को पूरी तरह खत्म करना और देश-विदेश के करोड़ों श्रद्धालुओं का विश्वास बनाए रखना है।
फुल CCTV कवरेज और सख्त SOP: हर एक नोट का रखा जाएगा हिसाब
सूत्रों के मुताबिक, अब दान की पूरी गिनती 24×7 हाई-रिज़ॉल्यूशन सीसीटीवी (CCTV) कैमरों की पैनी नजर में की जाएगी। दान पेटियों को खोलने से लेकर नकदी की छंटाई, काउंटिंग मशीनों का उपयोग, पैकेजिंग और रकम को बैंक तक सुरक्षित पहुंचाने का हर चरण कैमरों में रिकॉर्ड होगा। इसके अलावा, पूरी प्रक्रिया के लिए एक नया मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) लागू किया जा रहा है। इसके तहत गिनती कक्ष में केवल अधिकृत (Authorized) कर्मचारियों को ही प्रवेश मिलेगा और हर गतिविधि का डिजिटल व लिखित दस्तावेजीकरण किया जाएगा ताकि किसी भी स्तर पर तुरंत जवाबदेही तय की जा सके।
बढ़ती भीड़ और करोड़ों के चढ़ावे को संभालने के लिए अनुभवी हाथों में कमान
राम मंदिर में सामान्य दिनों के साथ-साथ विशेष पर्वों और त्योहारों पर रोजाना लाखों श्रद्धालु पहुंचते हैं, जिससे दान की राशि का दायरा काफी बड़ा हो जाता है। भारी-भरकम चढ़ावे और प्रबंधन को सुचारू रूप से चलाने के लिए ट्रस्ट ने प्रशासनिक स्तर पर बड़े फेरबदल किए हैं। इसी कड़ी में ट्रस्ट ने जगदीश आफले को अपना पहला आधिकारिक सचिव नियुक्त किया है, जिनकी औपचारिक घोषणा 2 सितंबर को होने वाली बैठक में की जाएगी। उन्हें प्रशासनिक समन्वय और दान निगरानी की पूरी कमान सौंपी गई है। गौरतलब है कि चंपत राय के पद छोड़ने के बाद फिलहाल कृष्ण मोहन अंतरिम महासचिव के रूप में जिम्मेदारी संभाल रहे हैं।
तकनीक और इंडिपेंडेंट ऑडिट से बढ़ेगा श्रद्धालुओं का भरोसा
मंदिर प्रशासन का स्पष्ट कहना है कि इन बदलावों का मकसद केवल सुरक्षा बढ़ाना ही नहीं, बल्कि दान देने वाले भक्तों के बीच पारदर्शिता और विश्वास को और मजबूत करना है। आने वाले दिनों में दान की डिजिटल रिकॉर्डिंग, टाइम-बाउंड रिपोर्टिंग और स्वतंत्र ऑडिट (Independent Audit) जैसी व्यवस्थाओं को और अधिक कड़ा किया जाएगा, जिससे राम मंदिर का दान प्रबंधन देश के सबसे सुरक्षित और पारदर्शी प्रणालियों में से एक बन सके।














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