
अयोध्या: राम जन्मभूमि मंदिर के चढ़ावे में हेराफेरी और चोरी के मामले में हर दिन चौंकाने वाले खुलासे हो रहे हैं। इस हाई-प्रोफाइल मामले की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, कई रसूखदारों की धड़कनें तेज होने लगी हैं। इसी बीच अब एक ऐसा 24 सेकंड का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसने जांच की दिशा ही बदलकर रख दी है। इस वीडियो में मुख्य आरोपियों में से एक अविनाश शुक्ला, पुलिस और बैंक कर्मचारियों की मौजूदगी में एक सफेद रंग की लग्जरी कार की तरफ बढ़ता हुआ दिखाई दे रहा है।
अमर उजाला को सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, इस वीडियो में अविनाश के हाथ में काले रंग का एक बैग साफ नजर आ रहा है। दावा किया जा रहा है कि यह वही बैग है जिसमें चोरी की मोटी रकम छिपाई गई थी, जिसे पुलिस ने शुरुआती कार्रवाई के दौरान बरामद किया था। हालांकि, पुलिस इस बरामदगी को लेकर अभी पूरी तरह चुप्पी साधे हुए है।
5 जून की रात का वो ‘सस्पेंस’ और काले बैग का रहस्य
वायरल हो रहा यह सनसनीखेज सीसीटीवी फुटेज 5 जून 2026 की रात ठीक 8 बजकर 13 मिनट का बताया जा रहा है। वीडियो में साफ दिख रहा है कि पुलिस की स्पेशल टीम और बैंक के अधिकारी आरोपी अविनाश शुक्ला को घेरकर एक सफेद कार के पास ले जा रहे हैं। सूत्रों का कहना है कि जब राम मंदिर ट्रस्ट को चढ़ावे की रकम में बड़ी हेराफेरी की भनक लगी थी, तो आनन-फानन में पुलिस ने अविनाश के ठिकाने पर रेड मारी थी। चर्चा है कि उसी वक्त इस काले बैग से लगभग 5 लाख रुपये कैश बरामद हुए थे, जिसे अब आधिकारिक रिकॉर्ड में लाने की कशमकश चल रही है।
क्या ट्रस्ट को पहले से थी भनक? छिपाई गई पूरी कहानी
इस पूरे घटनाक्रम में सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि क्या राम मंदिर ट्रस्ट को इस महाचोरी की जानकारी पहले से थी? जांच से जुड़े बेहद पुख्ता सूत्रों ने खुलासा किया है कि 5 जून को ही ट्रस्ट के आला पदाधिकारियों के निर्देश पर कुछ नुमाइंदों ने पुलिस के साथ मिलकर आरोपी के ठिकाने पर पहली दबिश दे दी थी। यानी पुलिस के रिकॉर्ड में यह मामला भले ही 7 जून को दर्ज होकर सार्वजनिक हुआ हो, लेकिन खाकी के पास इसकी पूरी स्क्रिप्ट 5 जून को ही पहुंच चुकी थी। अब सवाल यह है कि आखिर दो दिनों तक लिखित शिकायत देने में देरी क्यों की गई?
रविवार की सुबह अयोध्या पुलिस का ‘मेगा ऑपरेशन’, दनादन छापेमारी
चोरी की जड़ों को पूरी तरह उखाड़ने के लिए अयोध्या पुलिस ने रविवार की सुबह एक बड़ा एक्शन प्लान तैयार किया। डिप्टी एसपी रैंक के वरिष्ठ अधिकारी की अगुवाई में पुलिस की अलग-अलग टीमों ने एक साथ सभी गिरफ्तार आरोपियों के घरों पर धावा बोल दिया। पुलिस ने मुख्य आरोपी रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू यादव, उसके भतीजे मनीष यादव, अविनाश शुक्ला, अनुकल्प मिश्रा और रमा शंकर मिश्रा के ठिकानों को घेर लिया। करीब डेढ़ से ढाई घंटे तक चली इस ताबड़तोड़ छापेमारी से पूरे इलाके में हड़कंप मच गया।
पुलिस के साथ मजिस्ट्रेट भी तैनात, खंगाला गया घर का कोना-कोना
इस कार्रवाई की सबसे खास बात यह रही कि पुलिस के साथ जिला प्रशासन की एक विशेष टीम भी मौके पर मुस्तैद थी। पारदर्शिता बनाए रखने के लिए पूरी तलाशी प्रशासनिक अधिकारियों की लाइव निगरानी में कराई गई। स्वर्गद्वार मोहल्ले में स्थित टिन्नू यादव और मनीष यादव के घर के चप्पे-चप्पे की तलाशी ली गई। अलमारियां तोड़ी गईं, संदूक खोले गए और यहां तक कि परिजनों के पर्स तक चेक किए गए। एक पड़ोसी ने गवाह के तौर पर बताया कि पुलिस ने घर का कोई भी हिस्सा नहीं छोड़ा था, हालांकि वहां से कोई नया कैश बरामद नहीं हुआ है।
करोड़ों के जेवरात और बेनामी संपत्ति के दस्तावेज बरामद, अब ईडी की एंट्री?
भले ही टिन्नू यादव के घर से कैश न मिला हो, लेकिन सूत्रों का दावा है कि कुछ अन्य आरोपियों के घरों से पुलिस के हाथ भारी मात्रा में सोने-चांदी के जेवरात और कई कीमती जमीनों व संपत्तियों के दस्तावेज लगे हैं। अब पुलिस और जांच एजेंसियां इन सभी दस्तावेजों का बारीकी से सत्यापन (Verification) करने जा रही हैं। यह पता लगाया जा रहा है कि ये संपत्तियां कब खरीदी गईं, इनकी सरकारी और बाजारू कीमत क्या है और इसे खरीदने के लिए पैसा कहां से आया था? अगर यह साबित होता है कि यह प्रॉपर्टी राम मंदिर के चढ़ावे के पैसे से खरीदी गई है, तो आरोपियों की संपत्तियां कुर्क भी की जा सकती हैं।
सिर्फ कैश नहीं, अब खंगाले जाएंगे बैंक अकाउंट और फाइनेंशियल ट्रांजैक्शन
अयोध्या पुलिस अब इस मामले को सिर्फ एक साधारण चोरी मानकर शांत बैठने के मूड में नहीं है। जांच का अगला चरण पूरी तरह से फाइनेंशियल फॉरेंसिक पर आधारित होगा। आरोपियों के पिछले कुछ सालों के बैंक स्टेटमेंट्स, ऑनलाइन ट्रांजैक्शन और उनके रिश्तेदारों के खातों की भी जांच की जाएगी। पुलिस यह देखना चाहती है कि चढ़ावे की जो रकम गायब हुई, उसे किस-किस के खातों में डायवर्ट किया गया।
फिलहाल इस मामले में कई गिरफ्तारियां हो चुकी हैं, लेकिन अयोध्या की फिजाओं में तैर रहे इन 5 बड़े सवालों के जवाब मिलना अभी बाकी हैं:
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अगर 5 जून को ही आरोपी के पास से काला बैग और कैश मिला, तो पुलिस ने 7 जून तक एफआईआर क्यों नहीं की?
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सीसीटीवी फुटेज में दिख रहे काले बैग के भीतर मौजूद 5 लाख रुपये का ऑफिशियल स्टेटस क्या है?
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आरोपियों के घर से मिले जेवरात और कीमती जमीनों के कागजात का असली मालिक कौन है?
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क्या इस महाचोरी के पीछे ट्रस्ट के ही कुछ बड़े चेहरों का हाथ है?
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क्या आने वाले दिनों में कुछ और रसूखदार नाम इस मामले में सह-आरोपी बनने जा रहे हैं?












