कानपुर होटल सुसाइड मिस्ट्री: ‘लव, लिव-इन और सल्फास’, कमरा नंबर 106 में दफन साढ़े तीन घंटे का खौफनाक सच

कानपुर। घंटाघर स्थित सूर्या होटल का कमरा नंबर 106 इस वक्त एक ऐसी प्रेम कहानी का गवाह बना हुआ है, जिसका अंत बेहद दर्दनाक और खौफनाक रहा। दिग्विजय और शिवांगी की मौत के बाद भले ही इज्जत बचाने के खातिर परिजनों के झूठ बेपर्दा हो गए हों, लेकिन बंद कमरे के अंदर का असली सच अब भी रहस्य बना हुआ है। पुलिस इस उलझी हुई गुत्थी को सुलझाने के लिए हर मुमकिन कोशिश कर रही है, क्योंकि इस सनसनीखेज वारदात के पीछे कई ऐसे सवाल हैं जिनके जवाब मिलना अभी बाकी हैं।

खिलखिलाते हुए आए, फिर साढ़े तीन घंटे में क्या हुआ?

शनिवार दोपहर 12:30 बजे जब दिग्विजय और शिवांगी ने सूर्या होटल के रिसेप्शन पर एंट्री की, तो उनके चेहरों पर किसी तरह का तनाव या शिकन नहीं थी। सीसीटीवी फुटेज में दोनों हंसते-खिलखिलाते नजर आ रहे हैं। रजिस्टर में नाम दर्ज कराने के बाद दोनों कमरा नंबर 106 में चले गए। लेकिन इसके बाद के साढ़े तीन घंटे की पिक्चर पूरी तरह धुंधली है।

शाम 4:30 बजे कमरे से कुछ अजीब आवाजें आने के बाद जब होटल स्टाफ ने दरवाजा खोला, तो दोनों की निढाल लाशें वहां पड़ी थीं। पुलिस इस बात की गहराई से तफ्तीश कर रही है कि आखिर इतने कम समय में ऐसा क्या हुआ कि दोनों ने जिंदगी खत्म करने का फैसला कर लिया। सर्विलांस की एक विशेष टीम दोनों के मोबाइल, कॉल डिटेल्स और व्हाट्सएप चैट को खंगालने में जुटी है।

क्या प्रेमी को धोखे से दिया गया जहर? शक के दायरे में शिवांगी

पुलिस सूत्रों के मुताबिक, जिस तरह दोनों बिना किसी तनाव के होटल आए थे, उससे इस बात की आशंका कम है कि मौत का फैसला सामूहिक (म्यूचुअल) था। कयास लगाए जा रहे हैं कि दोनों में से किसी एक ने लिव-इन रिलेशनशिप पर सहमति न बनने के चलते यह आत्मघाती कदम उठाया होगा।

पुलिस इस थ्योरी पर भी काम कर रही है कि शायद एक पार्टनर ने दूसरे को पानी में धोखे से सल्फास मिलाकर दे दिया और उसके बाद खुद भी जहर गटक लिया। इस मामले में शक की सुई शिवांगी की तरफ घूम रही है, क्योंकि वह काफी समय से बिना तलाक लिए दिग्विजय के साथ रहने के कानूनी रास्ते तलाश रही थी।

बिना तलाक ‘लिव-इन’ में रहने की जिद और पारिवारिक कलह

उन्नाव कचहरी में शिवांगी के सीनियर वकील ने इस बात की पुष्टि की है कि वह वहां वकालत की प्रैक्टिस के गुर सीखने आती थी। इसी दौरान उसने अपने सीनियर्स से बिना तलाक लिए किसी गैर-मर्द के साथ लिव-इन में रहने के कानूनी पहलुओं पर लंबी चर्चा की थी।

जब जनवरी में परिजनों को दिग्विजय और शिवांगी के बीच के इस रिश्ते की भनक लगी, तो घर में कोहराम मच गया। पारिवारिक बंदिशों और कलह के चलते जनवरी से ही शिवांगी ने कचहरी जाना बंद कर दिया था।

ट्रेन के सफर से शुरू हुआ इश्क, बच्चों को भी छोड़ने को थे तैयार

फतेहपुर के रहने वाले दिग्विजय सिंह की शादी साल 2013 में वंदना से हुई थी और उनका एक 10 साल का बेटा भी है। वह प्रयागराज में रेलवे में संविदा पर कोच अटेंडेंट था। वहीं, शिवांगी की शादी 15 साल पहले उन्नाव के धीरू तिवारी से हुई थी। धीरू बच्चों की अच्छी परवरिश और पत्नी की पढ़ाई के लिए तीन महीने पहले ही गुजरात के अहमदाबाद कमाने गया था।

दिग्विजय और शिवांगी की मुलाकात करीब आठ महीने पहले एक ट्रेन सफर के दौरान हुई थी, जो बाद में इंस्टाग्राम के जरिए प्यार में बदल गई। दोनों एक-दूसरे के प्यार में इस कदर अंधे हो चुके थे कि अपने हंसते-खेलते परिवार और बच्चों को भी छोड़ने के लिए तैयार थे। लेकिन जब कानूनी और सामाजिक रास्ते बंद नजर आए, तो इस खौफनाक अंत की पटकथा लिख दी गई। फिलहाल पुलिस सल्फास लाने वाले और मौत की असली वजहों की तलाश में जुटी है।

खबरें और भी हैं...

Leave a Comment

Are you human? Please solve:Captcha