
लखनऊ। उत्तर प्रदेश की राजनीति में 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर बिसात बिछने लगी है। एक तरफ सत्ताधारी एनडीए 2024 के आम चुनाव में हुए नुकसान की भरपाई कर 2017 और 2022 जैसी जोरदार वापसी के प्रयास में है, तो दूसरी तरफ लोकसभा नतीजों से उत्साहित इंडिया (INDIA) गठबंधन अपनी बढ़त को बरकरार रखकर सत्ता में आने की जुगत लगा रहा है। दोनों ही खेमे अपनी-अपनी राजनीतिक केमिस्ट्री को दुरुस्त करने में जुटे हैं।
2024 के आंकड़े: किसी के पास नहीं स्पष्ट बहुमत
अगर 2024 के लोकसभा नतीजों का विश्लेषण 403 विधानसभा सीटों के सेगमेंट के हिसाब से किया जाए, तो स्थिति बेहद दिलचस्प नजर आती है:
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सपा: 184 सीटों पर आगे
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एनडीए: 174 सीटों पर आगे
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कांग्रेस: 39 सीटों पर आगे
इन आंकड़ों के मुताबिक, किसी भी एक दल या गठबंधन को अकेले स्पष्ट बहुमत (202 सीट) मिलता नहीं दिखता। हालांकि सपा-कांग्रेस गठबंधन ने 43 लोकसभा सीटें जीतकर सीटों के मामले में बढ़त बनाई, लेकिन कुल वोट प्रतिशत में एनडीए का पलड़ा अब भी मामूली रूप से भारी रहा।
वोट प्रतिशत और नतीजों का बदलता मिजाज
उत्तर प्रदेश के चुनावी इतिहास को देखें तो लोकसभा और विधानसभा चुनावों में वोटरों का मूड अचानक बदलने का पुराना रिकॉर्ड रहा है:
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2004 vs 2007: 2004 लोकसभा में सपा को 35 सीटें मिलीं, लेकिन 2007 के विधानसभा चुनाव में जनता ने बसपा को पूर्ण बहुमत दे दिया।
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2012 vs 2014: 2012 में सपा ने पूर्ण बहुमत की सरकार बनाई, मगर ठीक दो साल बाद 2014 के आम चुनाव में जनता ने भाजपा को 71 सीटें देकर एकतरफा जनादेश दे दिया।
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2014 से 2022: भाजपा ने 2014, 2017, 2019 और 2022 के लगातार चार चुनावों में अपनी बढ़त बनाए रखी।
कांग्रेस का ‘ग्रेडिंग सिस्टम’: निष्क्रिय अध्यक्षों की होगी छुट्टी
संगठन को मजबूत करने के लिए कांग्रेस आलाकमान ने यूपी में सख्त कदम उठाने शुरू कर दिए हैं। पार्टी ने जिला और ब्लॉक स्तर के नेताओं के लिए A, B, C ग्रेडिंग सिस्टम लागू किया है:
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प्रदर्शन की समीक्षा: जिला, मंडल और ब्लॉक अध्यक्षों को उनके काम के आधार पर A, B या C वर्ग में बांटा जाएगा।
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निष्क्रिय नेताओं की छंटनी: ‘C’ कैटेगरी में आने वाले यानी काम न करने वाले अध्यक्षों को हटाकर उनकी जगह ‘प्रतिभा खोज’ अभियान से आए युवा नेताओं को मौका दिया जाएगा।
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सीधे इंटरव्यू: संगठन को दुरुस्त करने के लिए राहुल गांधी और प्रियंका गांधी स्वयं सचिवों का साक्षात्कार ले रहे हैं, जिसमें अब तक 39 सचिवों का इंटरव्यू हो चुका है।















