छत्रपति संभाजीनगर तिहरे हत्याकांड में बड़ा खुलासा: आईफोन नहीं, 20 साल पुराना पारिवारिक विवाद और जमीन बनी मौत की वजह!

महाराष्ट्र के छत्रपति संभाजीनगर से एक बेहद दर्दनाक और सनसनीखेज मामला सामने आया है, जिसने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया है। शहर के बहुचर्चित चांदगुडे परिवार के तीन सदस्यों की रहस्यमय परिस्थितियों में एक साथ मौत हो गई थी। इस दुखद घटना में मुरलीधर चांदगुडे (48), उनकी पत्नी संगीता और 18 वर्षीय बेटे कुणाल की जान चली गई। शुरुआत में इस हृदयविदारक घटना के पीछे एक आईफोन (iPhone) को मुख्य वजह बताया जा रहा था, लेकिन जैसे-जैसे पुलिस की जांच आगे बढ़ रही है, परिवार के भीतर चल रहे गहरे विवाद, कलह और तनाव की कई चौंकाने वाली परतें सामने आ रही हैं।

अलग-अलग जगहों पर हुआ अंतिम संस्कार

इस पूरी घटना की सबसे खौफनाक और हैरान करने वाली बात यह रही कि एक ही घर के इन तीनों सदस्यों का अंतिम संस्कार एक साथ नहीं किया गया। पोस्टमार्टम की प्रक्रिया पूरी होने के बाद जब शव परिजनों को सौंपे गए, तो परिवार के भीतर की आपसी कड़वाहट और दूरियां श्मशान घाट तक साफ नजर आईं। जानकारी के मुताबिक, कुणाल और उसकी मां संगीता का अंतिम संस्कार शहर के मुकुंदवाड़ी श्मशान घाट यानी संगीता के मायके में संपन्न हुआ। वहीं दूसरी ओर, मुरलीधर चांदगुडे के शव को उनके रिश्तेदार उनके पैतृक गांव धनगर पिंपलगांव ले गए। शुक्रवार की रात करीब 12 बजे गांव के ही एक खेत में उनका अंतिम संस्कार किया गया। एक ही परिवार के सदस्यों की एक साथ मौत के बाद भी अलग-अलग जगहों पर हुए अंतिम संस्कार ने स्थानीय लोगों और ग्रामीणों के मन में कई अनसुलझे सवाल खड़े कर दिए हैं।

20 साल पुराना मनमुटाव और 3 एकड़ जमीन का विवाद

ग्रामीणों के दावों और पुलिस की शुरुआती तफ्तीश के मुताबिक, चांदगुडे परिवार में पिछले कई सालों से गहरा पारिवारिक कलह चल रहा था। इस विवाद की मुख्य तौर पर दो बड़ी वजहें सामने आ रही हैं। ग्रामीणों का कहना है कि करीब 20 साल पहले मुरलीधर ने अपनी मर्जी से संगीता से प्रेम विवाह किया था। इस शादी की भनक उन्होंने अपने माता-पिता को नहीं लगने दी थी, जिसके बाद से ही परिवार के भीतर तनाव के बीज बोए गए थे। इसके अलावा, मुरलीधर के 75 वर्षीय पिता के नाम पर करीब तीन एकड़ पैतृक जमीन थी, जिसे उन्होंने बाद में मुरलीधर के नाम ट्रांसफर कर दिया था। इस बात से मुरलीधर की तीनों बहनें काफी नाराज थीं। पारिवारिक दबाव और लगातार बढ़ते तनाव के चलते कुछ साल पहले मुरलीधर ने उस जमीन का कुछ हिस्सा अपनी बहनों को भी दे दिया था। इसी फैसले के बाद से मुरलीधर और उनकी पत्नी संगीता के बीच कलह और भयंकर झगड़े शुरू हो गए थे।

मानसिक तनाव का शिकार था बेटा कुणाल

माता-पिता के बीच लगातार होने वाले विवाद और पारिवारिक कलह का सबसे बुरा और गहरा असर उनके 18 वर्षीय बेटे कुणाल के मानसिक स्वास्थ्य पर पड़ा था। ग्रामीणों के अनुसार, वह पिछले कुछ समय से गंभीर तनाव (Depression) में रहने लगा था। इसी कलह और तनाव की वजह से कुणाल और उसकी मां संगीता ने पैतृक गांव जाना पूरी तरह छोड़ दिया था। इसके विपरीत, मुरलीधर अक्सर अपने माता-पिता से मिलने गांव जाया करते थे और घटना से महज 15 दिन पहले भी वह गांव से होकर लौटे थे। मुरलीधर पेशे से एक ट्रांसपोर्ट कंपनी में ड्राइवर का काम करते थे, जिसके चलते उन्हें अक्सर काम के सिलसिले में 15 दिन से लेकर एक महीने तक घर से बाहर रहना पड़ता था। परिवार के एक बड़े बेटे की कुछ साल पहले ही बीमारी के कारण मौत हो चुकी थी, और मुरलीधर तथा उनके छोटे बेटे कुणाल के आपसी संबंध भी बिल्कुल अच्छे नहीं थे।

हर एंगल से गहराई से जांच कर रही पुलिस

फिलहाल पुलिस इस पूरे मामले में ग्रामीणों के दावों और पारिवारिक इतिहास की एक-एक कड़ी को आपस में जोड़ने में जुटी हुई है। पुलिस इस मुख्य एंगल से भी जांच कर रही है कि क्या माता-पिता के बीच का निरंतर विवाद, पिता की लंबी अनुपस्थिति और गहरे मानसिक तनाव ने ही कुणाल और पूरे परिवार को इस खौफनाक कदम उठाने पर मजबूर किया? पुलिस अधिकारियों का कहना है कि मामले से जुड़े रिश्तेदारों, पड़ोसियों और करीबियों के बयान दर्ज किए जा रहे हैं और इस सनसनीखेज मामले की तह तक जाने के लिए हर पहलू की बहुत बारीकी से तफ्तीश की जा रही है।

 

खबरें और भी हैं...

Leave a Comment

Are you human? Please solve:Captcha