दिल्ली लाल किला ब्लास्ट में UN का बड़ा खुलासा: अल-कायदा ने रची थी साजिश, AI और ChatGPT से तैयार किए ‘हाई-टेक’ बम

नई दिल्ली। देश की राजधानी दिल्ली के ऐतिहासिक लाल किला परिसर के पास हुए भीषण कार बम धमाके को लेकर संयुक्त राष्ट्र (UN) की ताजा रिपोर्ट में एक बेहद सनसनीखेज और चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। यूएन की रिपोर्ट में आधिकारिक तौर पर यह पुष्टि की गई है कि इस आतंकी हमले के पीछे अल-कायदा की भारतीय उपमहाद्वीप शाखा यानी ‘अल-कायदा इन द इंडियन सबकॉन्टिनेंट’ (AQIS) का हाथ था। रिपोर्ट के अनुसार, बिखरा हुआ माना जा रहा यह आतंकी गुट अब एक मजबूत क्षेत्रीय नेटवर्क के रूप में उभर रहा है, जो छोटे-छोटे गुप्त मॉड्यूल्स और आधुनिक तकनीक के जरिए अपने नापाक मंसूबों को अंजाम दे रहा है।

UN की रिपोर्ट से मचा हड़कंप, बांग्लादेश तक फैला जाल

संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट में इस बात पर गंभीर चिंता व्यक्त की गई है कि AQIS ने न केवल भारत में अपनी पैठ मजबूत की है, बल्कि वह पड़ोसी देश बांग्लादेश में भी अपने नए स्लीपर सेल्स तैयार करने की फिराक में है। रिपोर्ट के मुताबिक, संगठन ने बेहद कम समय में अपना वित्तीय और लॉजिस्टिक्स ढांचा खड़ा कर लिया है। एक बड़े केंद्रीय संगठन के रूप में काम करने के बजाय, यह छोटे-छोटे और फैले हुए सेल्स के जरिए विकेंद्रीकृत (decentralized) तरीके से काम कर रहा है, जिससे सुरक्षा एजेंसियों के लिए इन्हें ट्रैक करना एक बड़ी चुनौती बनता जा रहा है।

NIA की 7,500 पन्नों की चार्जशीट में ‘टेरर इंजीनियरिंग’ का खुलासा

दिल्ली लाल किला ब्लास्ट की जांच कर रही नेशनल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (NIA) ने भी इस मामले में मई महीने में 7,500 से अधिक पन्नों की एक विस्तृत चार्जशीट अदालत में दाखिल की थी। NIA की जांच में यह खौफनाक सच सामने आया कि आतंकियों ने इस हमले के लिए ‘टेरर इंजीनियरिंग’ और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) जैसी आधुनिक तकनीक का सहारा लिया था।

चार्जशीट के अनुसार, AQIS से जुड़े संगठन ‘अंसार गजवत-उल-हिंद’ (AGuH) के एक इन-हाउस इंजीनियर ने प्रयोगशाला स्तर (Laboratory-grade) की सटीकता के साथ रॉकेट इम्प्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस (IED) तैयार किए थे। इन खतरनाक विस्फोटकों का परीक्षण जम्मू-कश्मीर के अनंतनाग जिले में स्थित काजीगुंड के जंगलों में पहले ही किया जा चुका था।

अल-फलाह यूनिवर्सिटी और डॉक्टरों की सांठगांठ आई सामने

जांच एजेंसियों के रडार पर हरियाणा के फरीदाबाद स्थित अल-फलाह यूनिवर्सिटी भी आ गई है। चार्जशीट के मुताबिक, मामले का मुख्य आरोपी जासिर बिलाल वानी ‘तकनीकी मदद’ मुहैया कराने के उद्देश्य से वर्ष 2024-25 के दौरान कई बार इस यूनिवर्सिटी कैंपस में रुका था।

चौंकाने वाली बात यह है कि इस खूनी साजिश में यूनिवर्सिटी से जुड़े 3 डॉक्टर भी कथित तौर पर शामिल पाए गए। डॉक्टर अदील अहमद राथर ने ही जासिर की मुलाकात डॉ. उमर-उन-नबी से करवाई थी। डॉ. उमर वही मुख्य आरोपी है, जिसने विस्फोटकों से भरी कार को चलाकर लाल किले के पास धमाका किया था। इस भीषण त्रासदी में 11 मासूम लोगों की जान चली गई थी, जबकि कई अन्य गंभीर रूप से घायल हो गए थे।

YouTube और ChatGPT से सीखा बम बनाना

NIA की पड़ताल में डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के दुरुपयोग का एक नया और खतरनाक ट्रेंड सामने आया है। आरोपी जासिर ने रॉकेट IED बनाने का सटीक अनुपात और तरीका सीखने के लिए यूट्यूब (YouTube) और चैटजीपीटी (ChatGPT) जैसे एआई टूल्स का इस्तेमाल किया था।

वहीं, डॉ. अदील ने IED निर्माण के लिए जरूरी केमिकल जैसे NPK फर्टिलाइजर (पोटेशियम नाइट्रेट) और पिसी हुई चीनी की व्यवस्था की थी। इसके बाद इन सभी आरोपियों ने मिलकर रॉकेट IED असेंबल किए और जंगलों में जाकर उनका सफल ट्रायल भी किया था। यूएन की इस रिपोर्ट के बाद अब भारतीय सुरक्षा और खुफिया एजेंसियां अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इन आतंकी नेटवर्क्स को ध्वस्त करने के लिए और अधिक सतर्क हो गई हैं।

 

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