बड़ी खबर: अमेरिका और ईरान के बीच थमने जा रहा है महायुद्ध! दोहा में कल होगी सीक्रेट मीटिंग, इस ‘लाइफलाइन’ को बचाने के लिए झुके दोनों देश

वाशिंगटन/दोहा: मिडिल ईस्ट में पिछले कई दिनों से जारी भीषण तनाव के बीच दुनिया के लिए एक बहुत बड़ी और राहत भरी खबर सामने आ रही है। महाशक्ति अमेरिका और उसका धुर विरोधी ईरान एक-दूसरे पर हमले रोकने (Ceasefire) के लिए आखिरकार सहमत हो गए हैं। अमेरिकी न्यूज़ वेबसाइट ‘एक्सियोस’ ने एक बेहद वरिष्ठ अमेरिकी अधिकारी के हवाले से यह सनसनीखेज दावा किया है। रिपोर्ट के मुताबिक, दोनों देशों के प्रतिनिधि मंगलवार (कल) कतर की राजधानी दोहा में एक बेहद गोपनीय और रणनीतिक टेबल टॉक के लिए आमने-सामने बैठने जा रहे हैं।

इस वार्ता का मुख्य उद्देश्य दुनिया की सबसे संवेदनशील तेल आपूर्ति लाइन यानी ‘होर्मुज जलडमरूमध्य’ (Strait of Hormuz) को लेकर चल रहे विवाद और सैन्य टकराव को हमेशा के लिए सुलझाना है।

परमाणु वार्ता छोड़कर अब ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ पर टिकी बात, जानें क्यों बदला वेन्यू

रणनीतिक सूत्रों के मुताबिक, शुरुआत में यह हाई-लेवल मीटिंग स्विट्जरलैंड में आयोजित होनी थी, जहां ईरान के विवादित परमाणु कार्यक्रम (Nuclear Program) पर चर्चा की जानी थी। लेकिन पिछले दिनों दोनों देशों के बीच हुए भीषण सैन्य टकराव के बाद इस पूरी वार्ता का एजेंडा और वेन्यू दोनों बदल दिए गए। अब यह बैठक स्विट्जरलैंड के बजाय कतर के दोहा में होगी। बैठक का एजेंडा भी सीमित कर दिया गया है, जिसमें अब परमाणु कार्यक्रम नहीं, बल्कि सिर्फ होर्मुज जलडमरूमध्य से जुड़े व्यापारिक और सैन्य मुद्दों पर ही बातचीत केंद्रित रहेगी। व्हाइट हाउस ने हालांकि अभी तक इस प्रस्तावित वार्ता पर कोई भी आधिकारिक मुहर नहीं लगाई है।

“हम हर तरह की सैन्य कार्रवाई रोकने को तैयार”— अमेरिकी अधिकारियों का बड़ा खुलासा

‘एक्सियोस’ की रिपोर्ट में शामिल अमेरिकी अधिकारी ने इस ऐतिहासिक समझौते के शुरुआती संकेतों की पुष्टि करते हुए कहा:

“हमने फिलहाल एक-दूसरे के खिलाफ होने वाली सभी तरह की सैन्य कार्रवाइयों को रोकने का बड़ा फैसला किया है। मंगलवार को होने वाली दोहा वार्ता में अमेरिकी तकनीकी टीम की अगुवाई प्रमुख राजनयिक निक स्टीवर्ट करेंगे।”

वहीं, मामले की जानकारी रखने वाले एक दूसरे अमेरिकी अधिकारी ने बताया कि दोनों पक्ष “फिलहाल” अपने कदम पीछे खींचने पर राजी हो गए हैं। जब तक दोनों देशों के बीच तकनीकी बातचीत जारी रहेगी, तब तक होर्मुज के रास्ते अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक जहाज बिना किसी डर और पाबंदी के पूरी आजादी से आ-जा सकेंगे।

क्यों ‘होर्मुज’ बना है दोनों महाशक्तियों की नाक का सवाल?

दरअसल, होर्मुज जलडमरूमध्य वैश्विक अर्थव्यवस्था और तेल की सप्लाई के लिए एक ‘लाइफलाइन’ है। हाल ही में दोनों देशों के बीच एक गुप्त समझौता हुआ था, जिसमें ईरान ने वादा किया था कि वह होर्मुज के रास्ते गुजरने वाले कमर्शियल जहाजों को पूरी सुरक्षा और सुविधा देगा। इसके बदले में अमेरिका ने बड़ी राहत देते हुए ईरानी बंदरगाहों पर लगी अपनी सख्त आर्थिक नाकाबंदी (Blockade) को हटा लिया था। पिछले हफ्ते स्विट्जरलैंड में हुई बातचीत के दौरान दोनों सेनाओं के बीच किसी भी आपातकालीन स्थिति से निपटने के लिए एक ‘हॉटलाइन’ (Direct Hotline) स्थापित करने पर भी सहमति बनी थी।

ऐन वक्त पर ईरान ने क्यों दिखाई थी हेकड़ी? सरकारी टीवी पर हुआ खुलासा

इस बीच, ‘अरब न्यूज’ की एक रिपोर्ट ने इस बातचीत के पीछे चल रहे ड्रामे से भी पर्दा उठाया है। ईरान के सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई के प्रकाशन कार्यालय के वरिष्ठ सदस्य मेहदी फजाइली ने रविवार को ईरानी सरकारी टेलीविजन पर एक चौंकाने वाला बयान दिया था। फजाइली के मुताबिक, ईरान पर हाल ही में हुए कुछ हमलों और अमेरिका द्वारा समझौते की शर्तों को पूरी तरह न मानने के विरोध में ईरान ने रविवार को होने वाली प्रारंभिक तकनीकी बातचीत का बहिष्कार कर दिया था।

हालांकि, अब कतर की मध्यस्थता के बाद ईरान एक बार फिर मंगलवार को होने वाली महाबैठक के लिए टेबल पर आने को तैयार हो गया है। अब पूरी दुनिया की नजरें कल दोहा में होने वाली इस बैठक पर टिकी हैं, जो यह तय करेगी कि मिडिल ईस्ट में शांति बहाली होगी या फिर युद्ध की कोई नई चिंगारी सुलगेगी।

 

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