भोपाल। मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल से एक बेहद चौंकाने वाला और शर्मनाक मामला सामने आया है। यहां टीटी नगर इलाके में एक उच्च पदस्थ दिव्यांग अधिकारी को हनीट्रैप के जाल में फंसाकर लाखों रुपये ऐंठने की बड़ी साजिश का पर्दाफाश हुआ है। पीड़ित अधिकारी का आरोप है कि एक शातिर महिला ने पहले तो उनसे नजदीकियां बढ़ाईं और फिर उनकी कुछ आपत्तिजनक तस्वीरें खींचकर उन्हें ब्लैकमेल करना शुरू कर दिया। अब वह महिला इन तस्वीरों को वायरल करने की धमकी देकर 15 से 20 लाख रुपये की मोटी रकम मांग रही है।
दोस्ती के बहाने एंट्री और फिर ब्लैकमेलिंग का खौफनाक जाल
पीड़ित दिव्यांग अधिकारी ने अपनी शिकायत में बताया कि इस पूरी साजिश की शुरुआत बेहद सामान्य तरीके से हुई थी। आरोपी महिला ने खुद आगे रहकर उनसे संपर्क साधा था और दोस्ती की पहल की थी। अधिकारी ने सीधा और सरल स्वभाव होने के कारण महिला पर भरोसा कर लिया। लेकिन उन्हें इस बात का कतई अंदाजा नहीं था कि इस दोस्ती की आड़ में उनके खिलाफ इतनी बड़ी साजिश रची जा रही है। कुछ समय बीतने के बाद महिला ने अपना असली रंग दिखाना शुरू किया और अधिकारी को उनकी कुछ आपत्तिजनक तस्वीरें और स्क्रीनशॉट दिखाकर डराना-धमकाना शुरू कर दिया।
पुलिस के पास पहुंचे सबूत: मोबाइल चैट और वॉइस नोट खोलेंगे राज
इस मानसिक प्रताड़ना से तंग आकर पीड़ित अधिकारी ने करीब एक महीने पहले ही पुलिस के आला अधिकारियों और टीटी नगर थाना पुलिस की चौखट खटखटाई थी। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए पुलिस ने अधिकारी के विस्तृत बयान दर्ज कर लिए हैं। अपनी बेगुनाही और महिला की करतूतों को साबित करने के लिए अधिकारी ने पुलिस को कई पुख्ता सबूत भी सौंपे हैं। इनमें दोनों के बीच हुई मोबाइल चैट, वॉइस नोट्स, कॉल रिकॉर्डिंग्स और महिला द्वारा दी गई धमकियों के स्क्रीनशॉट जैसे महत्वपूर्ण डिजिटल साक्ष्य शामिल हैं।
नोटिस के बाद भी फरार है आरोपी महिला, पुलिस जांच में जुटी
शिकायत दर्ज होने के बाद हरकत में आई टीटी नगर थाना पुलिस ने मामले की पड़ताल तेज कर दी है। पुलिस ने आरोपी महिला को पूछताछ के लिए थाने हाजिर होने का नोटिस भी जारी किया था, लेकिन शातिर महिला अब तक पुलिस के सामने पेश नहीं हुई है और लगातार बच रही है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि डिजिटल साक्ष्यों की बारीकी से जांच की जा रही है। दोनों पक्षों के तथ्यों और सबूतों के आधार पर आगे की कड़ी वैधानिक कार्रवाई की जाएगी। हालांकि, पुलिस का यह भी कहना है कि जब तक पूरी जांच मुकम्मल नहीं हो जाती, तब तक आधिकारिक तौर पर किसी भी आरोप की पुष्टि नहीं की जा सकती।













